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राजनांदगांव

कर्मचारियों का वेतन एवं सेवानिवृत्त, दिवंगत शिक्षकों तथा कर्मचारियों के अंतिम स्वतत्वों का भुगतान पूर्वानुसार वेतन मद से हो : फेडरेशन

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राजनांदगांव। स्कूल शिक्षा विभाग में एक ही स्कूल तीन नामों से संचालित हो रहा है। एक ही स्कूल का दो अलग-अलग पंजीयन है। पहला यूडाइस में तथा दूसरा फर्म्स एवं सोसाइटी में पंजीकृत है। पहला दो सेटअप से वेतन भुगतान हो रहा है। पहले का प्रबंधन प्रभारी मंत्री के द्वारा नियुक्त समिति के द्वारा तो वहीं दूसरा जिला कलेक्टर के समिति के अधीन है।
उल्लेखनीय है कि पूर्व शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने सेजेस स्कूलों का संचालन राज्य शासन के अधीन करने का घोषणा किया था। प्राप्त जानकारी के अनुसार इन्हीं हायर सेकंडरी-हाई स्कूलों को पीएमश्री स्कूल का भी नामकरण किया गया है। फेडरेशन का कहना है कि इन सभी स्कूलों को एक ही नाम पीएमश्री स्कूल रखा जाना चाहिए। क्योंकि एक ही स्कूल में तीन बजट का आबंटन अलग-अलग नाम से हो रहा है। इनका सेटअप भी अलग-अलग है।
उपरोक्त जानकारी देते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी, प्रांतीय प्रमुख महामंत्री सतीश ब्यौहरे, जिला संरक्षक मुकुल साव, जिला अध्यक्ष पीआर झाड़े, पीएल साहू, सीएल चंद्रवंशी, जितेंद्र बघेल, बृजभान सिन्हा, वीरेंद्र रंगारी, हेमंत पांडे, पुष्पेंद्र साहू, उत्तम डड़सेना, द्रोण साहू, रमेश साहू, संगीता ब्यौहरे, सीमा तरार, नीलू झाड़े, अभिषिक्ता फंदियाल, स्वाति वर्मा, संजीव मिश्रा, सुधांशु सिंह, सोहन निषाद, अब्दुल कलीम खान, राजेंद्र देवांगन, सीआर वर्मा, हीरालाल गजभिए एवं अनिल साहू ने बताया कि प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत रहे सेवानिवृत्त-दिवंगत शिक्षकों एवं कर्मचारियों के अंतिम स्वतत्वों का भुगतान अन्य स्कूलों के रिक्त पदों से किया जा रहा है। क्योंकि शासकीय शालाओं को प्राप्त आहरण एवं संवितरण अधिकार को पूर्व सरकार के शिक्षा प्रमुख सचिव ने सेजेस में परिवर्तित होने के कारण बंद करने का आदेश दिया था।
गौरतलब है कि वित्त विभाग के अनुशंसा से महालेखाकार द्वारा आहरण एवं संवितरण अधिकार का स्वीकृत आदेश जारी होता है। जिसको बंद करने का अधिकार शिक्षा विभाग को नहीं है। फेडरेशन ने पूर्व शिक्षा मंत्री एवं विभाग के उच्च अधिकारियों को वेतन मद से भुगतान करने का आग्रह किया था।जिसपर निर्णय नहीं होने से वेतन भुगतान तथा सेवानिवृत्त-दिवंगत शिक्षकों एवं कर्मचारियों के अंतिम स्वतत्वों के भुगतान में विलंब हो रहा है। फेडरेशन का कहना है कि निकट भविष्य में पदोन्नति से रिक्त पदों को भर दिया जायेगा। उस समय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत रहे सेवानिवृत्त-दिवंगत शिक्षकों एवं कर्मचारियों के अंतिम स्वतत्वों के भुगतान में दिक्कत होगा।
उन्होंने बताया कि उपरोक्त स्कूलों में शिक्षकों-कर्मचारियों की नियुक्ति नियम अलग है। शाला प्रवेश का नियम अलग है। शिक्षण का माध्यम अलग है। वेतन-बजट का मद अलग है। सेजेस स्कूलों में शिक्षकों, कर्मचारियों का भुगतान डीएमएफ फंड से चेक द्वारा होता है, नियमित का ट्रेजरी तथा पीएमश्री में आबंटित बजट से होता है। कई स्कूलों में दो प्राचार्य कार्यरत हैं। एक ही स्कूल में शिक्षक एवं कर्मचारियों का दो सेटअप है। उन्होंने बताया कि राज्य के अनेक ऐतिहासिक स्कूलों का नाम आश्चर्यजनक है। बस्तर संभाग के कांकेर जिले में पीएमश्री स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम नरहरदेव उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तथा सरगुजा संभाग में पीएमश्री स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुनकुरी पीएमश्री स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मनोर एवं पीएमश्री सर्वेश्वर दास नगर पालिक निगम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस राजनांदगांव उदाहरण है।
फेडरेशन ने स्कूलों का नामकरण पीएमश्री करने की मांग विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन से किया है। साथ ही इन स्कूलों में एक भर्ती नियम, एक सेटअप, एक वेतन मद तथा एक नाम का सुझाव दिया है।

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राजनांदगांव

महापौर ने 22 परिवारों को वितरित किए उज्ज्वला योजना के गैस कनेक्शन

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राजनांदगांव। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत जिले में गरीब एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने की दिशा में महापौर मधुसूदन यादव ने 22 हितग्राहियों को गैस कनेक्शन वितरित किए।
यह वितरण मोतीपुर स्थित महापौर के निज निवास पर किया गया, जहां उन्होंने पात्र परिवारों को एलपीजी गैस कनेक्शन का पूरा सेट प्रदान किया।
कार्यक्रम में उपस्थित इंडेन गैस वितरक प्रतिनिधियों ने बताया कि पात्र हितग्राहियों को योजना के तहत गैस चूल्हा, रेगुलेटर, सुरक्षा पाइप तथा दो एलपीजी सिलेंडर निःशुल्क दिए जा रहे हैं। यह सुविधा केवल उन्हीं परिवारों को दी जा रही है जिनके पास पूर्व में कोई गैस कनेक्शन नहीं है।
महापौर ने कहा कि उज्ज्वला योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण एवं शहरी गरीब परिवारों को धुएं से मुक्ति दिलाना और महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि योजना से न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव आया है।
महापौर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह योजना देशभर में महिलाओं को सशक्त बनाने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने का कार्य कर रही है। इससे हजारों परिवार प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं।
कार्यक्रम में गैस एजेंसी के संचालक नरेंद्र जैन, प्रबंधक श्रेयांश जैन सहित हितग्राही एवं वार्डवासी उपस्थित रहे।

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बारिश से पहले शहर की सड़कों का होगा डामरीकरण, महापौर ने ठेकेदारों को दिए निर्देश

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राजनांदगांव। मानसून की आमद से पहले शहर की खस्ताहाल सड़कों को सुधारने और डामरीकरण कार्य में तेजी लाने के लिए नगर निगम ने कवायद शुरू कर दी है। महापौर मधुसूदन यादव ने आज अपने कक्ष में निगम अध्यक्ष टोपेन्द्र सिंह पारस वर्मा और लोककर्म विभाग के प्रभारी सदस्य सावन वर्मा की उपस्थिति में ठेकेदारों की एक महत्वपूर्ण बैठक ली। बैठक में महापौर ने ठेकेदारों को दो टूक निर्देश दिए कि बारिश का मौसम शुरू होने से पहले हर हाल में शहर की प्रमुख सड़कों पर डामरीकरण का काम चालू किया जाए, ताकि नागरिकों को आवागमन में परेशानी न हो।
महापौर ने बैठक में निर्माण कार्यों की प्रगति को लेकर ठेकेदारों से बिंदुवार चर्चा की। इस दौरान ठेकेदारों ने अपनी व्यावहारिक समस्याएं साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में डामर (बिटुमिन) की सप्लाई में भारी दिक्कत आ रही है। वैश्विक परिस्थितियों और देश भर में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में हुई बेतहाशा वृद्धि के कारण डामर की कमी हो गई है, जिससे काम प्रभावित हो रहा है। ठेकेदारों के मुताबिक, फिलहाल सिर्फ मुंबई में ही डामर मिल पा रहा है, जहां उनकी गाड़ियां लगातार डामर लोड करने के लिए कतार में खड़ी हैं। जैसे ही वहां से डामर की खेप पहुंचेगी, शहर में काम तेज कर दिया जाएगा।
ठेकेदारों की समस्याओं को सुनने के बाद महापौर मधुसूदन यादव ने उन्हें आश्वस्त करते हुए राज्य सरकार के एक बड़े फैसले की जानकारी दी। महापौर ने बताया कि मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में बिटुमिन की कीमतों में हुई असाधारण और अप्रत्याशित वृद्धि को गंभीरता से लिया गया है। राज्य के विकास और निर्माण कार्यों में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से सरकार ने 01 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 की अवधि के लिए अनुबंधित ठेकेदारों को सीमित एवं आंशिक मूल्य राहत (क्षतिपूर्ति) प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद अब डामर मिलने का रास्ता आसान हो गया है, इसलिए ठेकेदार बिना किसी वित्तीय चिंता के तत्काल डामरीकरण का काम शुरू करें।
महापौर की समझाइश और सरकार की राहत घोषणा के बाद ठेकेदारों ने आश्वस्त किया कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अगले 10 दिनों के भीतर मुंबई से डामर की गाड़ियां राजनांदगांव पहुंचने की पूरी संभावना है। गाड़ी आते ही युद्धस्तर पर डामरीकरण शुरू कर दिया जाएगा। महापौर ने कहा कि सभी ठेकेदार एक-एक करके सड़कों को हाथ में लें और काम शुरू करें। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि मलिटी कंस्ट्रक्शन द्वारा कौरिनभाठा रोड में डामरीकरण का काम शुरू भी कर दिया गया है। इसी तरह अन्य एजेंसियां भी प्रयास कर काम चालू करें।
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में नगर निगम के कार्यपालन अभियंता (संविदा) यूके रामटेके, प्रभारी सहायक अभियंता श्रीमती गरिमा वर्मा सहित निर्माण एजेंसी एव्ही कंस्ट्रक्शन, मोहन कंस्ट्रक्शन, मेसर्स अभय कोटडिया और मलिटी कंस्ट्रक्शन के प्रतिनिधि व ठेकेदार मुख्य रूप से उपस्थित थे।

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सोसायटियों में खाद-बीज की किल्लत न हो, किसान परेशान हुए तो खैर नहीं : कलेक्टर

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राजनांदगांव। खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने किसानों को समय पर खाद एवं बीज का वितरण सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी किसान को खाद-बीज के लिए परेशानी नहीं होनी चाहिए, इसके लिए पूरी व्यवस्था दुरुस्त रखी जाए।
कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए कि धान सहित दलहन-तिलहन फसलों में परम्परागत खाद के साथ वैकल्पिक खाद, नैनो यूरिया एवं डीएपी के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए, जिससे खेती की लागत घटे और उत्पादन बढ़े।
जानकारी के अनुसार जिले में इस वर्ष 68,690 मीट्रिक टन खाद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 41,509 मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक है। इसमें यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी शामिल हैं।
उप संचालक कृषि टीकम सिंह ठाकुर ने बताया कि अब तक 14,972 किसानों को खाद वितरण किया जा चुका है। वहीं समितियों में पर्याप्त मात्रा में खाद का भंडारण भी उपलब्ध है।
खरीफ सीजन के लिए 13,980 मि्ंटल बीज लक्ष्य के विरुद्ध 6,036 मि्ंटल बीज उपलब्ध है। इसमें से 3,201 मि्ंटल का भंडारण समितियों में किया गया है, जबकि 1,085 मि्ंटल बीज किसानों को वितरित किया जा चुका है।
जिले में उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए जिला एवं विकासखंड स्तर पर उड़नदस्ता दल सक्रिय है। अब तक 28 विक्रय केंद्रों को नोटिस जारी किया गया है, 7 केंद्रों में भंडारित उर्वरक जप्त कर सीलिंग की कार्रवाई की गई है, जबकि 5 निजी विक्रय केंद्रों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आगे भी नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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