राजनांदगांव
गृहभाड़ा भत्ता सातवें वेतन के स्थान पर छटवें वेतन में देने से कर्मचारियों को हो रहा है आर्थिक क्षति : फेडरेशन
राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी, प्रांतीय प्रमुख महामंत्री सतीश ब्यौहरे, जिला संरक्षक मुकुल साव, जिला महामंत्री पीआर झाड़े, बृजभान सिन्हा, पीएल साहू, जितेंद्र बघेल, वीरेन्द्र रंगारी, सीएल चंद्रवंशी, राजेन्द्र देवांगन, रंजीत कुंजाम, संजीव मिश्रा, देवचंद बंजारे, शिवप्रसाद जोशी, केएल जोशी, खोम लाल वर्मा, मिलिंद कुमार मेश्राम, रमेश कुमार साहू, श्रीमती स्वाति वर्मा, नवीन कुमार पांडे, आदित्य कुमार तिवारी, ईश्वर दास मेश्राम, भूषण लाल साव, नरेश प्रसाद दुबे, श्रीश कुमार पांडे, श्रीमती सुशीला टंडन, श्रीमती वंदना पानसे, रानी ऐश्वर्य सिंह, बिहारी राम डहरिया, सोहन निषाद, उत्तम डड़सेना, पवन कुमार साहू, अब्दुल कलीम खान, जनक तिवारी, हेमंत पांडे, लीलाधर सेन, पुष्पेंद्र साहू ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य में छत्तीसगढ़ वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 (सातवां वेतनमान) को 1 जनवरी 2016 से लागू किया गया था। राज्य के कर्मचारियों (शिक्षक संवर्ग को छोड़कर) को सातवें वेतन आयोग के अनुशंसा अनुसार वेतनमान स्वीकृत हुआ था, लेकिन राज्य के कर्मचारियों को गृहभाड़ा भत्ता (एचआरए) सातवें मूलवेतन के स्थान पर छटवें मूलवेतन पर पुराने 10 प्रतिशत एवं 7 प्रतिशत दर पर आज पर्यन्त दिया जा रहा है, जबकि छत्तीसगढ़ राज्य में कार्यरत केंद्रीय कर्मचारियों को सातवे मूल वेतन में 1 जुलाई 2017 से 30 जून 2021 तक 16 प्रतिशत एवं 8 प्रतिशत के दर से गृहभाड़ा भत्ता (एचआरए) मिला था तथा 1 जुलाई 2021 से आज तक 18 प्रतिशत एवं 9 प्रतिशत के दर से गृहभाड़ा भत्ता (एचआरए) मिल रहा है। एक ही राज्य में केंद्र एवं राज्य शासन के कर्मचारियों को गृहभाड़ा भत्ता स्वीकृति के मामले में दोहरा मापदंड अपनाया गया है।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के बैनर पर राज्य के कर्मचारियों ने केन्द्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता (डीए) एवं गृहभाड़ा भत्ता (एचआरए) सहित अन्य मुद्दों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन एवं अनिश्चित हड़ताल विगत वर्ष किया था। राज्य शासन ने अनेक कमेटियों का गठन भी किया, लेकिन आज पर्यन्त निर्णय नहीं लिये जाने के कारण राज्य के 406854 कर्मचारी आहत हैं।
उन्होंने 1 जनवरी 2016 से 30 अप्रैल 2023 तक कुल 88 माह में कर्मचारियों को पुराने दर 10 प्रतिशत एवं 7 प्रतिशत में हुए न्यूनतम आर्थिक क्षति का विस्तृत जानकारी दिया है। उन्होंने बताया कि ग्रेड पे 1300 (लेवल-1) में 83864 एवं 58696 ग्रेड पे 1400 (लेवल-2) में 86504 एवं 60544 ग्रेड पे 1800 (लेवल-3) में 96800 एवं 67760 ग्रेड पे 1900 (लेवल-4) में 104808 एवं 73392 ग्रेड पे 2200 (लेवल-5) में 120384 एवं 84304 ग्रेड पे 2400 (लेवल-6) में 136048 एवं 95216 ग्रेड पे 2800 (लेवल.7) में 154264 एवं 107976 ग्रेड पे 4200 (लेवल-8) में 190344 एवं 133232 ग्रेड पे 4300 (लेवल-9) में 204776 एवं 143352 ग्रेड पे 4400 (लेवल-10) में 232232 एवं 162536 ग्रेड पे 4800 (लेवल-11) में 263912 एवं 184800 ग्रेड पे 5400 (लेवल-12) में 301576 एवं 211112 ग्रेड पे 6600 (लेवल-13) में 361768 एवं 253264 ग्रेड पे 7600 (लेवल-14) में 429528 एवं 300696 ग्रेड पे 8700 (लेवल-15) में 637032 एवं 445896 ग्रेड पे 8900 (लेवल-16) में 697224 एवं 488048 तथा ग्रेड पे 10000 (लेवल-17) में 762256 एवं 533632 का आर्थिक क्षति हो चुका है, जो कि केन्द्र के समान मौजूदा दर 18 प्रतिशत एवं 9 प्रतिशत के गणना में और अधिक होगा।
उन्होंने जानकारी दिया कि क्लास-4 कर्मचारी का 7वां पे 32700 है, तो उसे 10 प्रतिशत 3270 एवं 7 प्रतिशत 2289 के स्थान पर 6वां पे 12723 में 1272 एवं 891 प्रतिमाह मिल रहा है। वहीं क्लास-3 को 7वां पे 72100 में 7210 एवं 5047 मिलना चाहिए, जो कि 6वां पे 28054 में 2805 एवं 1964 मिल रहा है। इसी कड़ी में 7वां पे 41000 में 4100 एवं 2870 के स्थान पर 6वां पे 15953 में 1595 एवं 1117 तथा 7वां पे 23300 में 2330 एवं 1631 के स्थान पर 6वां पे 9066 में 907 एवं 635 मिल रहा है। क्लास-2 का 7वां पे 85200 को 8520 एवं 5964 के स्थान पर 6वां पे 33152 में 3315 एवं 2321 तथा 7वां पे 95900 में 9590 एवं 6713 के स्थान पर 6वां पे 37315 में 3732 एवं 2613 मिल रहा है। उन्होंने राज्य शासन से मांग किया है कि कर्मचारियों को गृहभाड़ा भत्ता 6वां पे के स्थान पर 7वां पे में स्वीकृत करने का आदेश कर्मचारी हित में जारी करें।
राजनांदगांव
महापौर ने 22 परिवारों को वितरित किए उज्ज्वला योजना के गैस कनेक्शन
राजनांदगांव। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत जिले में गरीब एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने की दिशा में महापौर मधुसूदन यादव ने 22 हितग्राहियों को गैस कनेक्शन वितरित किए।
यह वितरण मोतीपुर स्थित महापौर के निज निवास पर किया गया, जहां उन्होंने पात्र परिवारों को एलपीजी गैस कनेक्शन का पूरा सेट प्रदान किया।
कार्यक्रम में उपस्थित इंडेन गैस वितरक प्रतिनिधियों ने बताया कि पात्र हितग्राहियों को योजना के तहत गैस चूल्हा, रेगुलेटर, सुरक्षा पाइप तथा दो एलपीजी सिलेंडर निःशुल्क दिए जा रहे हैं। यह सुविधा केवल उन्हीं परिवारों को दी जा रही है जिनके पास पूर्व में कोई गैस कनेक्शन नहीं है।
महापौर ने कहा कि उज्ज्वला योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण एवं शहरी गरीब परिवारों को धुएं से मुक्ति दिलाना और महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि योजना से न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव आया है।
महापौर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह योजना देशभर में महिलाओं को सशक्त बनाने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने का कार्य कर रही है। इससे हजारों परिवार प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं।
कार्यक्रम में गैस एजेंसी के संचालक नरेंद्र जैन, प्रबंधक श्रेयांश जैन सहित हितग्राही एवं वार्डवासी उपस्थित रहे।
राजनांदगांव
बारिश से पहले शहर की सड़कों का होगा डामरीकरण, महापौर ने ठेकेदारों को दिए निर्देश
राजनांदगांव। मानसून की आमद से पहले शहर की खस्ताहाल सड़कों को सुधारने और डामरीकरण कार्य में तेजी लाने के लिए नगर निगम ने कवायद शुरू कर दी है। महापौर मधुसूदन यादव ने आज अपने कक्ष में निगम अध्यक्ष टोपेन्द्र सिंह पारस वर्मा और लोककर्म विभाग के प्रभारी सदस्य सावन वर्मा की उपस्थिति में ठेकेदारों की एक महत्वपूर्ण बैठक ली। बैठक में महापौर ने ठेकेदारों को दो टूक निर्देश दिए कि बारिश का मौसम शुरू होने से पहले हर हाल में शहर की प्रमुख सड़कों पर डामरीकरण का काम चालू किया जाए, ताकि नागरिकों को आवागमन में परेशानी न हो।
महापौर ने बैठक में निर्माण कार्यों की प्रगति को लेकर ठेकेदारों से बिंदुवार चर्चा की। इस दौरान ठेकेदारों ने अपनी व्यावहारिक समस्याएं साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में डामर (बिटुमिन) की सप्लाई में भारी दिक्कत आ रही है। वैश्विक परिस्थितियों और देश भर में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में हुई बेतहाशा वृद्धि के कारण डामर की कमी हो गई है, जिससे काम प्रभावित हो रहा है। ठेकेदारों के मुताबिक, फिलहाल सिर्फ मुंबई में ही डामर मिल पा रहा है, जहां उनकी गाड़ियां लगातार डामर लोड करने के लिए कतार में खड़ी हैं। जैसे ही वहां से डामर की खेप पहुंचेगी, शहर में काम तेज कर दिया जाएगा।
ठेकेदारों की समस्याओं को सुनने के बाद महापौर मधुसूदन यादव ने उन्हें आश्वस्त करते हुए राज्य सरकार के एक बड़े फैसले की जानकारी दी। महापौर ने बताया कि मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में बिटुमिन की कीमतों में हुई असाधारण और अप्रत्याशित वृद्धि को गंभीरता से लिया गया है। राज्य के विकास और निर्माण कार्यों में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से सरकार ने 01 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 की अवधि के लिए अनुबंधित ठेकेदारों को सीमित एवं आंशिक मूल्य राहत (क्षतिपूर्ति) प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद अब डामर मिलने का रास्ता आसान हो गया है, इसलिए ठेकेदार बिना किसी वित्तीय चिंता के तत्काल डामरीकरण का काम शुरू करें।
महापौर की समझाइश और सरकार की राहत घोषणा के बाद ठेकेदारों ने आश्वस्त किया कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अगले 10 दिनों के भीतर मुंबई से डामर की गाड़ियां राजनांदगांव पहुंचने की पूरी संभावना है। गाड़ी आते ही युद्धस्तर पर डामरीकरण शुरू कर दिया जाएगा। महापौर ने कहा कि सभी ठेकेदार एक-एक करके सड़कों को हाथ में लें और काम शुरू करें। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि मलिटी कंस्ट्रक्शन द्वारा कौरिनभाठा रोड में डामरीकरण का काम शुरू भी कर दिया गया है। इसी तरह अन्य एजेंसियां भी प्रयास कर काम चालू करें।
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में नगर निगम के कार्यपालन अभियंता (संविदा) यूके रामटेके, प्रभारी सहायक अभियंता श्रीमती गरिमा वर्मा सहित निर्माण एजेंसी एव्ही कंस्ट्रक्शन, मोहन कंस्ट्रक्शन, मेसर्स अभय कोटडिया और मलिटी कंस्ट्रक्शन के प्रतिनिधि व ठेकेदार मुख्य रूप से उपस्थित थे।
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सोसायटियों में खाद-बीज की किल्लत न हो, किसान परेशान हुए तो खैर नहीं : कलेक्टर
राजनांदगांव। खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने किसानों को समय पर खाद एवं बीज का वितरण सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी किसान को खाद-बीज के लिए परेशानी नहीं होनी चाहिए, इसके लिए पूरी व्यवस्था दुरुस्त रखी जाए।
कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए कि धान सहित दलहन-तिलहन फसलों में परम्परागत खाद के साथ वैकल्पिक खाद, नैनो यूरिया एवं डीएपी के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए, जिससे खेती की लागत घटे और उत्पादन बढ़े।
जानकारी के अनुसार जिले में इस वर्ष 68,690 मीट्रिक टन खाद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 41,509 मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक है। इसमें यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी शामिल हैं।
उप संचालक कृषि टीकम सिंह ठाकुर ने बताया कि अब तक 14,972 किसानों को खाद वितरण किया जा चुका है। वहीं समितियों में पर्याप्त मात्रा में खाद का भंडारण भी उपलब्ध है।
खरीफ सीजन के लिए 13,980 मि्ंटल बीज लक्ष्य के विरुद्ध 6,036 मि्ंटल बीज उपलब्ध है। इसमें से 3,201 मि्ंटल का भंडारण समितियों में किया गया है, जबकि 1,085 मि्ंटल बीज किसानों को वितरित किया जा चुका है।
जिले में उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए जिला एवं विकासखंड स्तर पर उड़नदस्ता दल सक्रिय है। अब तक 28 विक्रय केंद्रों को नोटिस जारी किया गया है, 7 केंद्रों में भंडारित उर्वरक जप्त कर सीलिंग की कार्रवाई की गई है, जबकि 5 निजी विक्रय केंद्रों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आगे भी नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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