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राजनांदगांव

कृषि व कृषकों के लिए फिर घातक बन रही पेट्रोलियम व गैस पाइप लाइन के केंद्रीय नीति : कांग्रेस

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राजनांदगांव। कांग्रेस ने केंद्र सरकार की कार्य पद्धति पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसानों का हित करना छोड़ उनके भूमि और सुरक्षित कृषि क्षेत्र को उजाड़ करने का ताना-बाना बुनकर अपना तुगलकी आदेश फिर से जारी कर दिया है, जिससे टेमरी, सलोनी, गिधवा, हरडूवा, भरदाखुर्द, महरूम कला, मरकामटोला, ठेलकाडीह पचपेड़ी सहित आसपास के प्रभावित किसानों की नींद उड़ गई है, जो जिले सहित छत्तीसगढ़ के कृषि और किसानों के लिए घातक है।
कांग्रेस प्रवक्ता रूपेश दुबे ने बताया कि केंद्र सरकार पेट्रोलियम एवं खनिज पाइप लाइन बिछाने मुंबई-नागपुर-झारसुगड़ा हेतु गैस पाइप लाइन बिछाने मे कृषि भूमि के कास्तकार है, उनकी भूमि पर बिना जिला प्रशासन की अनुमति बिना मुआवजा दिए बिना किसानों को सूचना दिए कार्य प्रारंभ कर किसान गनेशू के ड्रिप इरिगेशन सिस्टम को तोड़ फोड़ कर आतंक मचाना चालू कर दिए, जिससे पीड़ित किसान से मिलने जिला पंचायत सदस्य हर्षिता स्वामी बघेल, मंडी सदस्य दुर्गेश द्विवेदी, सरपंच अश्वनी टंडन, प्रवीण पारख, प्रहलाद यादव, कुंभलाल महिलागे, चंद्रशेखर साहू, मंशाराम पाल सहित मौके पर पहुंचकर किसानों के हित संरक्षक के रूप में खड़ी रही, क्योंकि कांग्रेस नहीं चाहती कि जिले के अंजोरा-टेड़ेसरा सहित आसपास के किसान केंद्र सरकार की भारतमाला परियोजना के अंतर्गत जहां मुआवजा के लिए आज भी परेशान हैं। इसी प्रकार डोंगरगढ़-कवर्धा रेल लाइन के नाम से भी भूमि को चिन्हित कर उन भूमियों के क्रय-विक्रय पर ही रोक लगा दिया गया है, जिसके कारण कृषक परिवार अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए ना तो जमीन बेच पा रहे हैं ना ही उस पर उन्नतशील कृषि करने की कार्य योजना बना पा रहे हैं। इसका एकमात्र कारण केंद्र सरकार की अदूरदर्शी सोच है। स्वयं 2022 तक किसानों की आय को दुगनी करने की बात करने वाली भाजपा की केंद्र सरकार आय दुगना करना तो छोड़ ना इसकी कार्ययोजना तक नहीं बना पाई है और ना ही किसानों के हित के लिए कोई सोच प्रदर्शित की है। पाइप लाइन बिछाने में किसानों की जमीनों को अधिग्रहित कर कलेक्टर दर का 10 प्रतिशत ही मुआवजा देकर उस जमीन के हिस्से में किसान कोई काम नहीं कर पाएंगे अर्थात उतनी जमीन से हमेशा के लिए वंचित हो जाएंगे। 10 प्रतिशत मुआवजा राशि से किसान को ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। भूमियों में लगे वृक्षों का भी उचित मुआवजा किसानों को ना देकर दोहरी मार भारत सरकार देने जा रही है। सबसे पीड़ा दायक बात यह है कि जब निर्माण कार्य प्रारंभ होगा तो उनकी बड़ी-बड़ी वाहन और सामग्रियां के आवागमन से खेत मेड़ जहां ध्वस्त होंगे, वहीं भूमियों की उपजाऊ उर्वरा शक्ति भी कम होगी। साथ ही सुरक्षित कृषि क्षेत्र की भी दुर्गति पूर्ण उपयोग करेंगे, जिसके कारण भी किसानों को गंभीर आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि जब तक निर्माण कार्य चलेगा, तब तक किसान उस भूमि पर आर्थिक उन्नति का लाभ लेने से वंचित रहेंगे, फिर सुधार कार्य में मुआवजा से ज्यादा खर्च किसानों को करना पड़ेगा, ऐसी स्थिति में जहां किसान मार झेलेंगे, वहीं उनकी बहुमूल्य एवं प्रगति में के मार्ग में सहायक कृषि भूमि भी प्रभावित होगी। अतः केंद्र सरकार को चाहिए कि किसानों को कार्य प्रारंभ होने के पहले भूमि अधिग्रहण के मुआवजा के साथ-साथ निर्माण कार्य के दौरान होने वाली आर्थिक क्षति का भी मुआवजा देने का प्रावधान करें। कृषक गणेशु को उनकी क्षति का मुआवजा की मांग भी की है।

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राजनांदगांव

महापौर ने 22 परिवारों को वितरित किए उज्ज्वला योजना के गैस कनेक्शन

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राजनांदगांव। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत जिले में गरीब एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने की दिशा में महापौर मधुसूदन यादव ने 22 हितग्राहियों को गैस कनेक्शन वितरित किए।
यह वितरण मोतीपुर स्थित महापौर के निज निवास पर किया गया, जहां उन्होंने पात्र परिवारों को एलपीजी गैस कनेक्शन का पूरा सेट प्रदान किया।
कार्यक्रम में उपस्थित इंडेन गैस वितरक प्रतिनिधियों ने बताया कि पात्र हितग्राहियों को योजना के तहत गैस चूल्हा, रेगुलेटर, सुरक्षा पाइप तथा दो एलपीजी सिलेंडर निःशुल्क दिए जा रहे हैं। यह सुविधा केवल उन्हीं परिवारों को दी जा रही है जिनके पास पूर्व में कोई गैस कनेक्शन नहीं है।
महापौर ने कहा कि उज्ज्वला योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण एवं शहरी गरीब परिवारों को धुएं से मुक्ति दिलाना और महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि योजना से न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव आया है।
महापौर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह योजना देशभर में महिलाओं को सशक्त बनाने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने का कार्य कर रही है। इससे हजारों परिवार प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं।
कार्यक्रम में गैस एजेंसी के संचालक नरेंद्र जैन, प्रबंधक श्रेयांश जैन सहित हितग्राही एवं वार्डवासी उपस्थित रहे।

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बारिश से पहले शहर की सड़कों का होगा डामरीकरण, महापौर ने ठेकेदारों को दिए निर्देश

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राजनांदगांव। मानसून की आमद से पहले शहर की खस्ताहाल सड़कों को सुधारने और डामरीकरण कार्य में तेजी लाने के लिए नगर निगम ने कवायद शुरू कर दी है। महापौर मधुसूदन यादव ने आज अपने कक्ष में निगम अध्यक्ष टोपेन्द्र सिंह पारस वर्मा और लोककर्म विभाग के प्रभारी सदस्य सावन वर्मा की उपस्थिति में ठेकेदारों की एक महत्वपूर्ण बैठक ली। बैठक में महापौर ने ठेकेदारों को दो टूक निर्देश दिए कि बारिश का मौसम शुरू होने से पहले हर हाल में शहर की प्रमुख सड़कों पर डामरीकरण का काम चालू किया जाए, ताकि नागरिकों को आवागमन में परेशानी न हो।
महापौर ने बैठक में निर्माण कार्यों की प्रगति को लेकर ठेकेदारों से बिंदुवार चर्चा की। इस दौरान ठेकेदारों ने अपनी व्यावहारिक समस्याएं साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में डामर (बिटुमिन) की सप्लाई में भारी दिक्कत आ रही है। वैश्विक परिस्थितियों और देश भर में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में हुई बेतहाशा वृद्धि के कारण डामर की कमी हो गई है, जिससे काम प्रभावित हो रहा है। ठेकेदारों के मुताबिक, फिलहाल सिर्फ मुंबई में ही डामर मिल पा रहा है, जहां उनकी गाड़ियां लगातार डामर लोड करने के लिए कतार में खड़ी हैं। जैसे ही वहां से डामर की खेप पहुंचेगी, शहर में काम तेज कर दिया जाएगा।
ठेकेदारों की समस्याओं को सुनने के बाद महापौर मधुसूदन यादव ने उन्हें आश्वस्त करते हुए राज्य सरकार के एक बड़े फैसले की जानकारी दी। महापौर ने बताया कि मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में बिटुमिन की कीमतों में हुई असाधारण और अप्रत्याशित वृद्धि को गंभीरता से लिया गया है। राज्य के विकास और निर्माण कार्यों में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से सरकार ने 01 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 की अवधि के लिए अनुबंधित ठेकेदारों को सीमित एवं आंशिक मूल्य राहत (क्षतिपूर्ति) प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद अब डामर मिलने का रास्ता आसान हो गया है, इसलिए ठेकेदार बिना किसी वित्तीय चिंता के तत्काल डामरीकरण का काम शुरू करें।
महापौर की समझाइश और सरकार की राहत घोषणा के बाद ठेकेदारों ने आश्वस्त किया कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अगले 10 दिनों के भीतर मुंबई से डामर की गाड़ियां राजनांदगांव पहुंचने की पूरी संभावना है। गाड़ी आते ही युद्धस्तर पर डामरीकरण शुरू कर दिया जाएगा। महापौर ने कहा कि सभी ठेकेदार एक-एक करके सड़कों को हाथ में लें और काम शुरू करें। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि मलिटी कंस्ट्रक्शन द्वारा कौरिनभाठा रोड में डामरीकरण का काम शुरू भी कर दिया गया है। इसी तरह अन्य एजेंसियां भी प्रयास कर काम चालू करें।
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में नगर निगम के कार्यपालन अभियंता (संविदा) यूके रामटेके, प्रभारी सहायक अभियंता श्रीमती गरिमा वर्मा सहित निर्माण एजेंसी एव्ही कंस्ट्रक्शन, मोहन कंस्ट्रक्शन, मेसर्स अभय कोटडिया और मलिटी कंस्ट्रक्शन के प्रतिनिधि व ठेकेदार मुख्य रूप से उपस्थित थे।

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सोसायटियों में खाद-बीज की किल्लत न हो, किसान परेशान हुए तो खैर नहीं : कलेक्टर

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राजनांदगांव। खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने किसानों को समय पर खाद एवं बीज का वितरण सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी किसान को खाद-बीज के लिए परेशानी नहीं होनी चाहिए, इसके लिए पूरी व्यवस्था दुरुस्त रखी जाए।
कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए कि धान सहित दलहन-तिलहन फसलों में परम्परागत खाद के साथ वैकल्पिक खाद, नैनो यूरिया एवं डीएपी के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए, जिससे खेती की लागत घटे और उत्पादन बढ़े।
जानकारी के अनुसार जिले में इस वर्ष 68,690 मीट्रिक टन खाद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 41,509 मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक है। इसमें यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी शामिल हैं।
उप संचालक कृषि टीकम सिंह ठाकुर ने बताया कि अब तक 14,972 किसानों को खाद वितरण किया जा चुका है। वहीं समितियों में पर्याप्त मात्रा में खाद का भंडारण भी उपलब्ध है।
खरीफ सीजन के लिए 13,980 मि्ंटल बीज लक्ष्य के विरुद्ध 6,036 मि्ंटल बीज उपलब्ध है। इसमें से 3,201 मि्ंटल का भंडारण समितियों में किया गया है, जबकि 1,085 मि्ंटल बीज किसानों को वितरित किया जा चुका है।
जिले में उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए जिला एवं विकासखंड स्तर पर उड़नदस्ता दल सक्रिय है। अब तक 28 विक्रय केंद्रों को नोटिस जारी किया गया है, 7 केंद्रों में भंडारित उर्वरक जप्त कर सीलिंग की कार्रवाई की गई है, जबकि 5 निजी विक्रय केंद्रों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आगे भी नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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