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प्रदेश के अनियमित कर्मचारियों को नई सरकार से सकारात्मक पहल की उम्मीद : गोपाल प्रसाद साहू

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राजनांदगांव। गोपाल प्रसाद साहू प्रांतीय संयोजक छत्तीसगढ़ अनियमित कर्मचारी मोर्चा ने बताया कि प्रदेश के अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने, पृथक कर्मचारियों की बहाली, अंशकालीन कर्मचारियों को पूर्णकालीन करने एवं आउट सोर्सिंग-ठेका-सेवा प्रदाता सिस्टम को बंद करने सहित विभिन्न मांगों पर सकारात्मक पहल करने नई सरकार से सकारात्मक उम्मीद है। प्रदेश में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों ख्आउट सोर्सिंग (प्लेसमेंट), सेवा प्रदाता, ठेका, जाबदर, संविदा, दैनिक वेतन भोगी, कलेक्टर दर, श्रमायुक्त दर पर कार्यरत श्रमिक, मानदेय, अशंकालिक,, अपने नियमितीकरण सहित अन्य मांगों को लेकर विभिन्न मंचों के माध्यम से निरंतर संघर्षरत है।
उल्लेखनीय है प्रदेश के लाखों अनियमित कर्मचारी प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है, ये विगत 5, 10, 15, 20, 25 वर्षों से अधिक समय से आर्थिक एवं मानसिक शोषण के शिकार प्रशासनिक रूप से हो रहे है तथा नियमित कर्मचारी से आधे से कम वेतन में कार्य करने मजबूर है। वर्तमान में इनकी स्थिति मध्यकालीन बंधुआ मजदूर से बदतर है। बेरोजगारी, आर्थिक असुरक्षा, पारिवारिक जिम्मेदारी, प्रशासनिक दबाव के कारण ये अनियमित कर्मचारी अपने विरुद्ध हो रहे अन्याय का विरोध खुलकर नहीं कर पाते है। उपरोक्त कारणों से समाज के पढ़े-लिखे नव-युवा-युवतियां मानसिक अवसाद से ग्रसित हो रहे है। कानूनी बाध्यताएं चंद्रमोहन नेगी विरुद्ध हिमांचल प्रदेश सरकार 17 अप्रैल 2020 के परिपेक्ष्य में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियमितीकरण हेतु उमादेवी विरुद्ध सचिव कर्नाटक सरकार द्वारा पारित एक बार की बाध्यताएं समाप्त कर दी है।
वर्तमान सरकार ने अपने घोषणा के अनुरूप अनियमित, संविदा एवं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित करने, छटनी न करने तथा आउट सोर्सिंग बंद करने का वादा पूरा नहीं किया और इन वर्ग के कर्मचारियों का वेतन में अपेक्षाकृत वृद्धि नहीं की, जिससे इन वर्ग के कर्मचारी व्यथित है।
छत्तीसगढ़ अनियमित कर्मचारी मोर्चा नई सरकार के समक्ष उपरोक्त समस्याओं को सक्षमता से रखने के उद्देश्य से 100 से अधिक अनियमित संगठनों का बैठक 3 दिसंबर के बाद आहूत करेगा, जिसमे आगामी रणनीतियों पर समग्र विचार-विमर्श किया जावेगा।
बाक्स..
मांग :
1. धरना-प्रदर्शन के दौरान अनियमित कर्मचारियों पर दर्ज मुकदमा को शून्य किया जावे।
2. दैनिक वेतन-कलेक्टर दर/श्रमायुक्त दर/संविदा के अस्थायी श्रमिक/समतुल्य मानदेय/जॉबदर (संविदा तुल्य मानदेय) पर कार्यरत कर्मचारियों को तत्काल नियमित किया जावे।
3. जॉबदर में कार्यरत कर्मचारियों को मासिक न्यूनतम वेतन पर समायोजित किया जावे तथा नियत अवधि के भीतर नियमितीकरण। (गौसेवक, पीएआईडब्ल्यू, मैत्री, वेक्सिन वाहक, मितानीन, मितानिन प्रशिक्षक)।
4. न्यून मानदेय कर्मचारियों को पद हेतु निर्धारित न्यूनतम वेतन दिया जावे तथा एक नियत अवधि के भीतर नियमितीकरण। (किसान मित्र, ग्राम पंचायत भृत्य/आपरेटर, शिक्षा दूत, शिक्षक मितान, शिक्षण सेवक, ट्यूटर शिक्षक, स्थानीय अतिथि शिक्षक, शाला संगवारी, पोटाकेबिन भृत्य/रसोइया/अनुदेशक, अतिथि शिक्षक-मदरसा, विशेष पिछड़ी क्षेत्रों के विद्यालय में कार्यरत शिक्षक, बिहान कैडर कर्मचारी एवं अन्य)
5. विगत वर्षों से निकाले गए/छटनी किये गए अनियमित कर्मचारियों को तत्काल बहाल किया जावे। (महिला पुलिस वालेंटियर, अंशकालीन स्कूल सफाई कर्मचारी सीतापुर, अतिथि शिक्षक, शिक्षण सेवक-बस्तर, ट्यूटर शिक्षक-राजनांदगांव, जनभागीदारी शिक्षक, कम्प्यूटर शिक्षक, प्रेरक, औपचारिकेत्तर अनुदेशक, ग्राम स्वराज अभियान कम्प्यूटर आपरेटर, अतिथि व्याख्याता आदि)
6. अंशकालीन कर्मचारियों को पूर्णकालीन किया जावे तथा एक नियत अवधि के भीतर नियमितीकरण। (स्कूल, पालीटेक्निक एवं इंजीनियरिंग कालेज तथा आईटीआई में कार्यरत अतिथि शिक्षक/व्याख्याता/मेहमान प्रवक्ता एवं कर्मचारी)।
7. संस्था या कार्यालय में जहां कुछ माह के लिए कार्य लिया जाता है, वहां वर्षभर कार्य लिया जावे। (अतिथि शिक्षक, अतिथि व्याख्याता, धान उपार्जन केन्द्रों कार्यरत आपरेटर)
8. आउटसोर्सिंग (प्लेसमेंट) के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को विभाग में समायोजित पश्चात् एक नियत अवधि के भीतर नियमितीकरण। (समस्त विभाग जहां प्लेसमेंट से अनियमित कर्मचारी नियोजित है)
9. ठेका के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को विभाग में समायोजित कर, एक नियत अवधि के भीतर नियमितीकरण। (परिवहन कर्मचारी, स्वास्थ्य सहायता कियोस्क कर्मचारी, विद्युत विभाग-स्टेशन आपरेटर, मीटर रीडर, समार्ट कार्ड मेकर एवं अन्य)।
10. सेवा प्रदाता के रूप में कार्यरत कर्मचारियों को विभाग में समायोजित कर, एक नियत अवधि के भीतर नियमितीकरण। (सखी, क्रेड़ा तकनीशियन)।
अनुमानित अनियमित कर्मचारियों की संख्या : (अक्टूबर 2023 की स्थिति में)

1. प्लेसमेंट (आउट सोर्सिंग)-40537
2. ठेका/सेवा प्रदाता-30946
3. मानदेय-112233
4. जॉबदर- 10032
5. अंशकालीन- 65934
6. दे.वे.भो./कलेक्टर दर/श्रमायुक्त श्रमिक-30772
7. संविदा-50089
उप योग-340543
8. मध्यान्न भोजन रसोईया (मानदेय)- 87025
9. मितानिन (जॉब दर)-72240
10. बिहान केडर (मानदेय)-98696
11. आंगनबाड़ी/मिनी कार्यकर्त्ता (मानदेय)-52474
12. आंगनबाड़ी सहायिका (मानदेय)-46660
13. अनुकंपा नियुक्ति शिक्षाकर्मी-1269
उप योग-358564
14. पृथक अनियमित कर्मचारी-39934
योग-738841
स्रोत : जैसा संबंधित विभाग के अनियमित कर्मचारियों द्वारा बताया गया।

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कबीर जयंती पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, सांसद संतोष पांडे और महापौर ने दी शुभकामनाएं

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राजनांदगांव। कबीर जयंती के अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधायक डॉ. रमन सिंह, सांसद संतोष पांडे और महापौर मधुसूदन यादव ने जिलेवासियों को शुभकामनाएं देते हुए संत कबीर के विचारों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संत कबीर केवल महान संत ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक और युग प्रवर्तक भी थे, जिनके विचार आज भी समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।

संयुक्त शुभकामना संदेश में उन्होंने कहा कि संत कबीर ने सत्य, अहिंसा, दया, करुणा, परोपकार और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करते हुए मानवता और समानता पर आधारित समाज की स्थापना का मार्ग दिखाया। उनके दोहे आज भी लोगों, विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।

उन्होंने कहा कि कबीरधाम से लेकर दामाखेड़ा तक उनके अनुयायी आज भी उनके विचारों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। संत कबीर की रचनाओं में कबीर अमृतवाणी विशेष रूप से लोकप्रिय है और उनके दोहे विश्वभर में प्रसिद्ध हैं।

इस अवसर पर निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा, निगम अध्यक्ष टोपेन्द्र सिंह पारस वर्मा, नेता प्रतिपक्ष संतोष पिल्ले, महापौर परिषद के सदस्य, वरिष्ठ एवं कनिष्ठ सभापति, अपील समिति के सदस्य तथा पार्षदों ने भी नागरिकों को कबीर जयंती की शुभकामनाएं दीं। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि संत कबीर ने कभी धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव का समर्थन नहीं किया और उनका जीवन मानवता, सद्भाव और सामाजिक एकता का संदेश देता है। उन्होंने नागरिकों से संत कबीर के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की अपील की।

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365 दिन बिना छुट्टी कर रहे पशुधन विभाग के मैदानी कर्मचारी, साप्ताहिक अवकाश की मांग संघ ने मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन

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राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ पशुधन विकास विभाग के मैदानी अधिकारी-कर्मचारी वर्षों से बिना किसी साप्ताहिक अवकाश के लगातार 365 दिन सेवाएं दे रहे हैं। कर्मचारियों की शारीरिक एवं मानसिक थकान तथा सेवा गुणवत्ता पर पड़ रहे विपरीत प्रभाव को देखते हुए अनुसूचित जाति-जनजाति पशुचिकित्सा अधिकारी संघ ने माननीय मुख्यमंत्री एवं माननीय विधानसभा अध्यक्ष से भेंट कर ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में प्रमुख मांगें:
संघ ने ज्ञापन के माध्यम से विभाग के मैदानी अमले को सप्ताह में एक दिन का अनिवार्य साप्ताहिक अवकाश देने की मांग की है। एवं शासकीय अवकाश के दिनों में भी पशु चिकित्सालय सुबह 8 बजे से 10 बजे तक 2 घंटे के लिए खोले जाएं, जिससे गंभीर बीमार पशुओं को तत्काल उपचार मिल सके।

संघ का पक्ष:
ज्ञापन सौंपते हुए संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. रामचंद्र रामटेके ने कहा, “मैदानी स्तर पर हमारे अधिकारी-कर्मचारी बस्तर के घने जंगलों से लेकर सरगुजा की दुर्गम पहाड़ियों तक टीकाकरण, नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान एवं आपातकालीन उपचार का कार्य करते हैं। वर्षभर बिना किसी साप्ताहिक अवकाश के लगातार कार्य करने से स्टाफ में अत्यधिक शारीरिक एवं मानसिक थकान व्याप्त है। इसका सीधा असर फील्ड में दी जा रही सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।”

संवैधानिक एवं समानता का तर्क:
डॉ. रामटेके ने बताया कि साप्ताहिक अवकाश का प्रावधान भारतीय संविधान में भी उल्लेखित है। राज्य के लगभग सभी विभागों में कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश की सुविधा प्राप्त है। यहां तक कि स्वास्थ्य विभाग जैसे आपातकालीन सेवा वाले विभाग में भी साप्ताहिक अवकाश एवं रोस्टर प्रणाली लागू है। पशुधन विकास विभाग के कर्मचारी भी उसी तर्ज पर मानव संसाधन नीति के तहत अवकाश के हकदार हैं।

अन्य प्रमुख मांगें:
ज्ञापन में संघ ने विभाग में लंबे समय से रिक्त सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी के पदों पर तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी उठाई। इसके अलावा दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के बैकलॉग पदों पर भर्ती प्रक्रिया को भी प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने का आग्रह किया गया, ताकि विभाग को योग्य मानव संसाधन मिल सके और पशुपालकों को बेहतर सेवाएं मिलें।

ज्ञापन प्राप्त कर मुख्यमंत्री ने इस पर शीघ्र निर्णय लेते हुए विभाग को निर्देशित करने का आश्वासन दिया।

ज्ञापन सौंपने के दौरान उपस्थित:
प्रांताध्यक्ष डॉ. रामचंद्र रामटेके, प्रांतीय सचिव डॉ. तरुण रामटेके सहित संघ के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। संघ ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष कर्मचारियों की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लेंगे।

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स्कूलों में गायत्री मंत्र-हनुमान चालीसा, सरकार का फैसला सराहनीय : दीपक सोनी

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राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ शासन के मंत्रिमंडल द्वारा प्रदेश के विद्यालयों में विद्यार्थियों को गायत्री मंत्र एवं हनुमान चालीसा का पाठ कराने संबंधी लिए गए निर्णय का विश्व हिंदू रक्षा संगठन ने जोरदार स्वागत करते हुए इसे भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं संस्कारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी पहल बताया है।
विश्व हिंदू रक्षा संगठन के जिला अध्यक्ष दीपक सोनी ने जारी अपने वक्तव्य में कहा कि यह निर्णय नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं एवं नैतिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण की आधारशिला भी होते हैं। ऐसे में गायत्री मंत्र एवं हनुमान चालीसा जैसे प्रेरणादायी स्त्रोतों का अध्ययन विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोचए राष्ट्रभक्ति एवं नैतिक चेतना का विकास करने में सहायक सिद्ध होगा।
आगे उन्होंने कहा कि, भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन एवं समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर है। नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। राज्य सरकार का यह निर्णय विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
श्री सोनी ने इस निर्णय के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं विशेष रूप से शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू रक्षा संगठन छत्तीसगढ़ शासन के इस निर्णय का पूर्ण समर्थन करता है तथा आशा व्यक्त करता है कि इससे विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं एवं सनातन जीवन मूल्यों के प्रति जागरूकता और सम्मान की भावना और अधिक सुदृढ़ होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल शिक्षा के साथ.साथ संस्कारयुक्त समाज निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा आने वाली पीढ़ियों को भारतीय सभ्यता एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

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