राजनांदगांव
शासकीय कमला देवी राठी स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय में तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
राजनांदगांव। शासकीय कमला देवी राठी स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय, राजनांदगांव के मनोविज्ञान विभाग एवं साइकोलाजिकल फोरम छत्तीसगढ़ के संयुक्त तात्वाधान में दिनांक 7 से 9 दिसंबर 2023 को रिसेंट ट्रेंड एंड टेकनिक्स ऑफ रिसर्च मेथडोलाजी इन सोसियल सांइसेस विषय पर आभासी माध्यम (ऑन लाईन मोड़) पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के प्रथम दिवस पं. सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्व विद्यालय के कुलपति प्रो. बंशगोपाल सिंह के मुख्य आथित्य में कार्यशाला का शुभारंभ हुआ।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आलोक मिश्रा ने कहा कि महाविद्यालय का मनोविज्ञान विभाग हेमचंद यादव विश्व विद्यालय के अंतर्गत मनोविज्ञान विषय का एक मात्र शोध केंद्र है। अतः रिसर्च मेथडोलाजी पर कार्यशाला का आयोजन पूरे परिक्षेत्र के छात्रों के लिये अत्यंत लाभदायक होगा।
कार्यशाला की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए कार्यशाला के समन्वयक एवं मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बसंत कुमार सोनबेर ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य स्नातकोत्तर एवं शोध छात्रों को शोध विधिविज्ञान की तकनीकी पहलुओं से परिचय करवाना है, जिसके लिए शोध विधिविज्ञान के सभी महत्वपूर्ण विषयों को इस कार्यशाला में शामिल करने का प्रयास किया गया है।
कार्यशाला के प्रथम दिवस के पहले सत्र में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. रश्मि सिंह का व्याख्यान रहा, जिसमें उन्होंने शोध समस्या एवं उद्ददेश्यों के निर्धारण पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। दूसरे सत्र के वक्ता डॉ. ललित मिश्रा रहे, जो कि इन्दिरा गांधी जनजाति राष्ट्रीय विश्व विद्यालय अमरकंटक मध्यप्रदेश में मनोविज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर है। आपने शोध परिकल्पना निर्माण के विषय पर अपने विचार रखे।
कार्यशाला के द्वितीय दिवस 8 दिसंबर को प्रमुख वक्ता डॉ. कृष्ण कुमार मिश्रा, एसोसिएट प्रोफेसर, स्कूल ऑफ बिहेविरल फोरेंसिक, नेशनल फोरेसिंक साइंस युनिर्वसिटी गांधी नगर, गुजरात एवं डॉ. तोसेन्द्र द्विवेदी एसोसिएट प्रोफेसर, मनोविज्ञान विभाग, जैन विश्व विद्यालय बैंगलोर, कर्नाटका रहें। आपने क्रमशः टू एक्सपेरीमेंटल डिजाईनः टाईप्स एडवांटेजेस एंड डिसएडवांटेजेस एवं एथिकल ईशुस इन रिसर्च विषय पर अपने-अपने व्याख्यान प्रस्तुत किये। व्याख्यान के पश्चात् प्रतिभागियों द्वारा आवश्यक प्रश्न भी किये गये जिसका समाधान रिसोर्स पर्सन द्वारा करने का प्रयास किया गया।
कार्यशाला के अंतिम दिवस दिनांक 9 दिसंबर को प्रथम सत्र का व्याख्यान प्रोफेसर धर्मेन्द्र कुमार सिंह, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान विभाग केन्द्रीय विश्व विद्यालय साऊथ बिहार, गया, बिहार द्वारा प्रस्तुत किया गया। आपने पैरामिट्रिक स्टेटिस्टिक्स के द्वारा शोध प्रदत्तो के विश्लेषण विषय पर परिचर्चा की। दूसरे सत्र का व्याख्यान प्रोफेसर राजीव चौधरी, विभागाध्यक्ष शारीरिक शिक्षा विभाग पं. रविशंकर शुक्ल विश्व विद्यालय रायपुर का रहा। आपने शोध आंकडों के विश्लेषण में नान पैरामिट्रिक स्टेटिस्टिक्स के उपयोग की चर्चा की। व्याख्यान के अन्त में स्रोताओं की शंकाओं का समाधान भी किया गया।
ऑन लाइन मोड पर आयोजित इस कार्यशाला में 512 पंजीयन प्राप्त हुए, जिन्हें गुगल मीट एवं यू-ट्यूब इट्रीमिंग के माध्यम से कनेक्ट किया गया। कार्यशाला के संयोजक डॉ. एस. रूपेन्द्र राव, सचिव साइकोलाजिकल फोरम छत्तीसगढ़ एवं विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान विभाग पं. सुंदर लाल शर्मा मुक्त विश्व विद्यालय बिलासपुर रहे। संगठन सचिव का दायित्व डॉ. मनोज कुमार राव सहायक प्राध्यापक शासकीय कला एवं वाणिज्य कन्या महाविद्यालय देवेन्द्र नगर रायपुर के द्वारा पूर्ण किया गया। कार्यशाला का सफल संचालन, सहसंयोजक डॉ. रोली तिवारी, कोषाध्यक्ष साइकोलाजिकल फोरम छत्तीसगढ़ द्वारा किया गया। शासकीय कमला देवी राठी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के अतिथि प्राध्यापक एवं सहसंयोजक डॉ. मोना माखीजा ने कार्यक्रम में शामिल सभी अतिथियों, श्रोत व्यक्तियों एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
राजनांदगांव
कबीर जयंती पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, सांसद संतोष पांडे और महापौर ने दी शुभकामनाएं
राजनांदगांव। कबीर जयंती के अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधायक डॉ. रमन सिंह, सांसद संतोष पांडे और महापौर मधुसूदन यादव ने जिलेवासियों को शुभकामनाएं देते हुए संत कबीर के विचारों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संत कबीर केवल महान संत ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक और युग प्रवर्तक भी थे, जिनके विचार आज भी समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।
संयुक्त शुभकामना संदेश में उन्होंने कहा कि संत कबीर ने सत्य, अहिंसा, दया, करुणा, परोपकार और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करते हुए मानवता और समानता पर आधारित समाज की स्थापना का मार्ग दिखाया। उनके दोहे आज भी लोगों, विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।
उन्होंने कहा कि कबीरधाम से लेकर दामाखेड़ा तक उनके अनुयायी आज भी उनके विचारों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। संत कबीर की रचनाओं में कबीर अमृतवाणी विशेष रूप से लोकप्रिय है और उनके दोहे विश्वभर में प्रसिद्ध हैं।
इस अवसर पर निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा, निगम अध्यक्ष टोपेन्द्र सिंह पारस वर्मा, नेता प्रतिपक्ष संतोष पिल्ले, महापौर परिषद के सदस्य, वरिष्ठ एवं कनिष्ठ सभापति, अपील समिति के सदस्य तथा पार्षदों ने भी नागरिकों को कबीर जयंती की शुभकामनाएं दीं। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि संत कबीर ने कभी धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव का समर्थन नहीं किया और उनका जीवन मानवता, सद्भाव और सामाजिक एकता का संदेश देता है। उन्होंने नागरिकों से संत कबीर के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की अपील की।
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365 दिन बिना छुट्टी कर रहे पशुधन विभाग के मैदानी कर्मचारी, साप्ताहिक अवकाश की मांग संघ ने मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन
राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ पशुधन विकास विभाग के मैदानी अधिकारी-कर्मचारी वर्षों से बिना किसी साप्ताहिक अवकाश के लगातार 365 दिन सेवाएं दे रहे हैं। कर्मचारियों की शारीरिक एवं मानसिक थकान तथा सेवा गुणवत्ता पर पड़ रहे विपरीत प्रभाव को देखते हुए अनुसूचित जाति-जनजाति पशुचिकित्सा अधिकारी संघ ने माननीय मुख्यमंत्री एवं माननीय विधानसभा अध्यक्ष से भेंट कर ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में प्रमुख मांगें:
संघ ने ज्ञापन के माध्यम से विभाग के मैदानी अमले को सप्ताह में एक दिन का अनिवार्य साप्ताहिक अवकाश देने की मांग की है। एवं शासकीय अवकाश के दिनों में भी पशु चिकित्सालय सुबह 8 बजे से 10 बजे तक 2 घंटे के लिए खोले जाएं, जिससे गंभीर बीमार पशुओं को तत्काल उपचार मिल सके।
संघ का पक्ष:
ज्ञापन सौंपते हुए संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. रामचंद्र रामटेके ने कहा, “मैदानी स्तर पर हमारे अधिकारी-कर्मचारी बस्तर के घने जंगलों से लेकर सरगुजा की दुर्गम पहाड़ियों तक टीकाकरण, नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान एवं आपातकालीन उपचार का कार्य करते हैं। वर्षभर बिना किसी साप्ताहिक अवकाश के लगातार कार्य करने से स्टाफ में अत्यधिक शारीरिक एवं मानसिक थकान व्याप्त है। इसका सीधा असर फील्ड में दी जा रही सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।”
संवैधानिक एवं समानता का तर्क:
डॉ. रामटेके ने बताया कि साप्ताहिक अवकाश का प्रावधान भारतीय संविधान में भी उल्लेखित है। राज्य के लगभग सभी विभागों में कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश की सुविधा प्राप्त है। यहां तक कि स्वास्थ्य विभाग जैसे आपातकालीन सेवा वाले विभाग में भी साप्ताहिक अवकाश एवं रोस्टर प्रणाली लागू है। पशुधन विकास विभाग के कर्मचारी भी उसी तर्ज पर मानव संसाधन नीति के तहत अवकाश के हकदार हैं।
अन्य प्रमुख मांगें:
ज्ञापन में संघ ने विभाग में लंबे समय से रिक्त सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी के पदों पर तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी उठाई। इसके अलावा दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के बैकलॉग पदों पर भर्ती प्रक्रिया को भी प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने का आग्रह किया गया, ताकि विभाग को योग्य मानव संसाधन मिल सके और पशुपालकों को बेहतर सेवाएं मिलें।
ज्ञापन प्राप्त कर मुख्यमंत्री ने इस पर शीघ्र निर्णय लेते हुए विभाग को निर्देशित करने का आश्वासन दिया।
ज्ञापन सौंपने के दौरान उपस्थित:
प्रांताध्यक्ष डॉ. रामचंद्र रामटेके, प्रांतीय सचिव डॉ. तरुण रामटेके सहित संघ के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। संघ ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष कर्मचारियों की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लेंगे।
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स्कूलों में गायत्री मंत्र-हनुमान चालीसा, सरकार का फैसला सराहनीय : दीपक सोनी
राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ शासन के मंत्रिमंडल द्वारा प्रदेश के विद्यालयों में विद्यार्थियों को गायत्री मंत्र एवं हनुमान चालीसा का पाठ कराने संबंधी लिए गए निर्णय का विश्व हिंदू रक्षा संगठन ने जोरदार स्वागत करते हुए इसे भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं संस्कारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी पहल बताया है।
विश्व हिंदू रक्षा संगठन के जिला अध्यक्ष दीपक सोनी ने जारी अपने वक्तव्य में कहा कि यह निर्णय नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं एवं नैतिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण की आधारशिला भी होते हैं। ऐसे में गायत्री मंत्र एवं हनुमान चालीसा जैसे प्रेरणादायी स्त्रोतों का अध्ययन विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोचए राष्ट्रभक्ति एवं नैतिक चेतना का विकास करने में सहायक सिद्ध होगा।
आगे उन्होंने कहा कि, भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन एवं समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर है। नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। राज्य सरकार का यह निर्णय विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
श्री सोनी ने इस निर्णय के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं विशेष रूप से शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू रक्षा संगठन छत्तीसगढ़ शासन के इस निर्णय का पूर्ण समर्थन करता है तथा आशा व्यक्त करता है कि इससे विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं एवं सनातन जीवन मूल्यों के प्रति जागरूकता और सम्मान की भावना और अधिक सुदृढ़ होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल शिक्षा के साथ.साथ संस्कारयुक्त समाज निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा आने वाली पीढ़ियों को भारतीय सभ्यता एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में मील का पत्थर सिद्ध होगी।
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