छत्तीसगढ़
पर्यटन विकास की असीम संभावनाओं को देखते हुए प्रसाद योजना के तहत 48 करोड़ 43 लाख 83 हजार रूपए की लागत से डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर एवं डोंगरगढ़ को पर्यटन के दृष्टिकोण से किया जा रहा विकसित
राजनांदगांव। राजनांदगांव जिले में नागपुर से बिलासुपर के बीच पर्वत श्रृंखला में फैले पर्वत के मध्य सर्वोच्च शिखर पर माँ बम्लेश्वरी देवी का विशाल मंदिर स्थित है। डोंगरगढ़ की पहाड़ी पर स्थित शक्तिरूपा मां बम्लेश्वरी देवी का विख्यात मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि मां बम्लेश्वरी देवी से भक्तों द्वारा मांगी गई मनोकामना पूर्ण होती है। बड़ी बम्लेश्वरी के समतल पर स्थित मंदिर छोटी बम्लेश्वरी के नाम से प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यह मां बम्लेश्वरी की छोटी बहन है। इस पर्वत श्रृंखला की नैसर्गिक सुंदरता मनमोहक है। मंदिर चारों ओर हरे भरे वनों पहाड़ियों, छोटे-बड़े तालाबों से घिरा हुआ है। पहाड़ी के नीचे कामकंदला तालाब है। मां बम्लेश्वरी के मंदिर में प्रति वर्ष चैत्र नवरात्र एवं क्वांर नवरात्र के समय दो बार भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। जिसमें लाखों की संख्या में भक्त एवं दर्शनार्थी पैदल एवं अन्य माध्यमों से पहुंचते हैं। डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर पर जाने के लिए सीढ़ियों के अलावा रोपवे की सुविधा भी है। माँ बम्लेश्वरी देवी का मंदिर 1610 फीट ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। देश के विभिन्न राज्यों एवं विदेशों से भी भक्त पर्वत पर बने लगभग 1000 सीढ़ियों की कठिन चढ़ाई कर माता के दर्शन के लिए आते हैं। इसके अलावा रोपेवे एक अतिरिक्त आकर्षण का केन्द्र है। प्राचीन काल से ही डोंगरगढ़ दर्शनार्थियों की आध्यात्मिक धार्मिक भावनाओं का केन्द्र है। माँ बम्लेश्वरी को बमलाई दाई या दाई बमलाई, माँ बगलामुखी के नाम से भी जाना जाता है।
भारत सरकार पर्यटन मंत्रालय की प्रसाद योजना के तहत माँ बम्लेश्वरी देवी मंदिर एवं डोंगरगढ़ विकास के लिए लगभग 48 करोड़ 43 लाख 83 हजार रूपए की लागत से डोंगरगढ़ में माँ बम्लेश्वरी देवी मंदिर एवं डोंगरगढ़ को पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित किया जा रहा है। देश-विदेश से यहां आने वाले दर्शनार्थियों एवं श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हुई है। जिसके दृष्टिगत यहां प्रसाद योजना के तहत पर्यटन विकास की असीम संभावनाओं को देखते हुए अधोसंरचना का निर्माण किया जा रहा है। इस योजना अंतर्गत मां बम्लेश्वरी मंदिर पहाड़ी एवं इसके आस पास पर्यटन सुविधाएं एवं सौदर्यीकरण का कार्य किया जा रहा है। प्रज्ञागिरि पहाड़ी पर पर्यटन सुविधाएं विकसित की जा रही है। माँ बम्लेश्वरी मंदिर विकास के लिए लगभग 7 करोड़ 28 लाख 84 हजार रूपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। सीढ़ियों का जीर्णोद्धार, शेड, सीढ़ियों पर रेलिंग, पेयजल सुविधा, पगोड़ा, मेडिकल रूम, दुकाने, सोलर प्रकाशिकरण, पार्किंग, विश्राम कक्ष, सीसीटीवी सर्विलांस, तालाब के आसपास का विकास, सालिड वेस्ट मैनेजमेंट, बायो टायलेट एवं सुविधाएं विकसित की जा रही है।
डोंगरगढ़ स्थिति प्रज्ञागिरि पर्वत जो बौद्ध पर्यटन स्थल एवं बौद्ध तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध है। प्रज्ञागिरी विकास के लिए 5 करोड़ 54 लाख 59 हजार रूपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस पर्वत में तथागत भगवान गौतम बुद्ध की ध्यानस्थ मुद्रा में प्रतिमा स्थापित है। मेडिटेशन सेंटर, कैफेटेरिया, पार्किंग, वाटर टैंक, गार्डरूम, पेयजल एवं बोरवेल, सीढ़ियों का जीर्णोद्धार, रेलिंग, साइनेजेस, सोलर प्रकाशीकरण, सेनिटेशन फिटिंग, इलेक्टि्रकल, एसी, सीसीटीवी, फायर फाईटिंग सिस्टम रहेगा। पिल्गि्रम फेसिलिटेशन सेंटर 33 करोड़ 29 लाख 74 हजार रूपए की लागत से विकसित किया जा रहा है। श्रीयंत्र भवन, प्रवेशद्वार, बाउण्ड्रीवाल, ड्रेन, सीसी रोड, अंडर ग्राउण्ड वाटर टैंक, पार्किंग एवं ड्रायवर कक्ष, लैडस्केपिंग, सोलर प्रकाशीकरण, साइनेजेस, इलेक्टि्रकल, फायर फाइटिंग, पेयजल जैसी सुविधाएं रहेंगी। श्रद्धालुओं के लिए 9.5 एकड़ में डोंगरगढ़ की तीन पहाड़ियों के बीच एवं एक श्रीयंत्र के आकार में पिल्गि्रम फेसिलिटेशन सेंटर या पर्यटक सुविधा केन्द्र का निर्माण किया जा रहा है। जिसका आकार श्रीयंत्र के जैसा है। इसमें ध्यान केन्द्र, विश्राम कक्ष, पेयजल, प्रसाद कक्ष, सांस्कृतिक मंच, क्लॉक रूम, सत्संग कक्ष, प्रदर्शनी गैलरी, शौचालय, लैंड स्कैपिंग, सोलर प्रकाशीकरण एवं पार्किंग की व्यवस्था रहेगी। अब तक लगभग 95 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने की ओर अग्रसर है तथा कार्य अंतिम चरण में है।
डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ राज्य के राजनांदगांव जिले का एक शहर और नगर पालिका है, जो माँ बम्लेश्वरी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। डोंगरगढ़ को धर्मनगरी के नाम से भी जाना जाता है। डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। डोंगरगढ़ राजधानी रायपुर से 106 किलोमीटर एवं जिला मुख्यालय राजनांदगांव से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है तथा मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग के अंतर्गत आता है। हावड़ा-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर डोंगरगढ़ रेलवे जंक्शन है। डोंगर का अर्थ पहाड़ और गढ़ का अर्थ दुर्ग होता है, अर्थात डोंगरगढ़ का अर्थ पहाड़ पर स्थित दुर्ग है। डोंगरगढ़ को प्राचीन काल में कामाख्या नगरी, कामावती नगर एवं डुंगराज्य नगर के नाम से जाना जाता था। डोंगरगढ़ नगर मुम्बई-कलकत्ता (व्हाया-नागपुर) के मध्य रेल्वे लाईन एवं हवाई अड्डा पर महाराष्ट्र की उप राजधानी नागपुर (आरेंज सीटी) से 200 किलोमीटर दूर एवं छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रेल्वे लाईन एवं हवाई अड्डे से 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। डोंगरगढ़ पहुंचने का सुगम माध्यम रेल्वे मार्ग है। कलकत्ता- मुम्बई नेशनल हाईवे मार्ग क्रमांक 6 पर स्थित पश्चिम दिशा की ओर से ग्राम चिचोला से 17 किलोमीटर एवं पूर्व दिशा की ओर ग्राम तुमड़ीबोड़ से 22 किलोमीटर की दूरी पर डोंगरगढ़ नगर स्थित है।
मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुये, मंदिर कमेटी ने नगर के जन-जन को मंदिर कमेटी से जोड़ने के लिए सन् 1976 में सार्वजनिक ट्रस्ट का स्वरूप प्रदान किया। मंदिर ट्रस्ट समिति द्वारा लगातार अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को अदा करते हुये मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर के चहुंमुखी विकास एवं दर्शनार्थियों की सुविधा हेतु सतत प्रयास किया जा रहा है। जिसके परिणाम स्वरूप यहां प्रतिदिन एवं चैत्र व क्वांर नवरात्र पर्व के दौरान बड़ी संख्या में भक्तों का तांता माँ का आर्शीवाद पाने के लिए लगा रहता है। अनेक भक्तजनों द्वारा सार्वजनिक व व्यक्तिगत रूप से माँ बम्लेश्वरी देवी के नियमित दर्शन पूजन हेतु विभिन्न प्रदेशों व घरों, नगरों में माँ बम्लेश्वरी देवी माता का मंदिर स्थापित किया है, जो मां बम्लेश्वरी देवी के प्रति नागरिकों की अगाध श्रद्धा, भक्ति व विश्वास का प्रतीक है।
माँ बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति डोंगरगढ़ द्वारा नीचे मंदिर का भव्य निर्माण कराया गया है। मंदिर का भव्य निर्माण नई दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर के तर्ज पर गुजरात, राजस्थान के विश्व प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा कराया गया है। मंदिर में कुल 8 प्रवेश द्वार, 14 फीट 7 इंच की ऊंचाई के 44 पीलर, मंदिर की शिखर सहित कुल ऊंचाई 95 फीट 3 इंच, चौड़ाई 70 फीट एवं लम्बाई 208 फीट है। मंदिर के गर्भ गृह 15 फीट 9 इंच लम्बाई व 15 फीट 9 इंच चौड़ाई है। मंदिर के रंग मंडप लम्बाई 41 फीट एवं चौड़ाई 41 फीट है। मंदिर का बाहरी भाग बंशीपहाड़पुर राजस्थान के पत्थरों से एवं मंदिर के भीतरी हिस्से व गर्भ गृह में अम्बाजी के मार्बल से सजाया गया है। समिति द्वारा छिरपानी धर्मशाला, ऊपर मंदिर धर्मशाला, नीचे मंदिर धर्मशाला के अलावा नगर में अनेक धर्मशालाएं, लॉज, होटल की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा ट्रस्ट द्वारा भोजनालय व रेस्टोरेंट सेवा ऊपर पहाड़ी मंदिर एवं छिरपानी परिसर में उपलब्ध है।
छत्तीसगढ़
जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का शुभारंभ, 63 हजार से अधिक लोगों की होगी घर-घर जांच
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई। प्रदेशव्यापी मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के अंतर्गत जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में आज 15 जून को अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर श्री इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रेम कुमार पटेल ने स्वास्थ्य विभाग के सर्वे दलों को मलेरिया जांच किट प्रदान कर अभियान की शुरुआत की।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष शर्मा ने बताया कि 15 जून से 14 जुलाई तक संचालित होने वाले इस विशेष अभियान के तहत जिले के 116 ग्रामों में स्थित 12,739 परिवारों के लगभग 63,747 व्यक्तियों का घर-घर जाकर मलेरिया सर्वेक्षण एवं जांच की जाएगी। अभियान के दौरान बुखार अथवा मलेरिया के लक्षण वाले व्यक्तियों की तत्काल जांच की जाएगी तथा संदिग्ध व्यक्तियों के रक्त नमूने लेकर परीक्षण किया जाएगा।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विवेक बिसेन ने बताया कि जांच में मलेरिया पॉजिटिव पाए जाने वाले सभी मरीजों को तत्काल निःशुल्क दवा उपलब्ध कराकर उपचार प्रारंभ किया जाएगा। मरीज की स्थिति एवं रोग की गंभीरता के अनुसार आवश्यक होने पर उसे निकटस्थ स्वास्थ्य केंद्र अथवा चिकित्सालय में भर्ती कर समुचित उपचार भी प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समय पर जांच एवं उपचार से मलेरिया के गंभीर दुष्प्रभावों को रोका जा सकता है तथा संक्रमण के प्रसार पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
अभियान का मुख्य उद्देश्य मलेरिया रोगियों की शीघ्र पहचान, समय पर उपचार एवं संक्रमण के प्रसार को रोकना है। साथ ही ग्रामीणों को मच्छरजनित रोगों से बचाव, मच्छरदानी के नियमित उपयोग, स्वच्छता एवं जलभराव रोकने के उपायों के संबंध में जागरूक किया जाएगा।
कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने जिलेवासियों से अभियान में सहयोग करने तथा सर्वे दलों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की, ताकि जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई को मलेरिया मुक्त बनाने के लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त किया जा सके।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, मलेरिया कार्यक्रम से जुड़े अधिकारी, पर्यवेक्षक एवं मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़
तंबाकू नियंत्रण, पल्स पोलियो एवं मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान की तैयारियों की कलेक्टर ने की समीक्षा
खैरागढ़। कलेक्टर एवं जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल की अध्यक्षता में मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी), राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस (पल्स पोलियो अभियान) तथा मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के अंतर्गत जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में तीनों महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रमों की तैयारियों एवं प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिले में संचालित जनजागरूकता, प्रवर्तन एवं तंबाकू मुक्त वातावरण निर्माण संबंधी गतिविधियों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध, तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन एवं प्रचार पर प्रतिबंध तथा 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक संबंधी प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन तथा नियमित निरीक्षण एवं चालानी कार्रवाई करने पर विशेष जोर दिया।
कलेक्टर श्री चंद्रवाल ने चयनित ग्राम पंचायतों में जनप्रतिनिधियों, महिला स्व-सहायता समूहों, शिक्षकों, युवाओं तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की सहभागिता से तंबाकू मुक्त वातावरण विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्राम स्तर पर शपथ कार्यक्रम, जनजागरूकता अभियान, चेतावनी बोर्ड स्थापना तथा तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता पर निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता बताई, ताकि चयनित ग्राम पंचायतों को आदर्श तंबाकू मुक्त ग्राम के रूप में विकसित किया जा सके।
बैठक में मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के 14 वें चरण की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ समय-सीमा में शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के निर्देश दिए।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विवेक बिसेन ने बताया कि अभियान जिले के 116 ग्रामों में संचालित किया जाएगा, जिसमें लगभग 64 हजार आबादी को शामिल किया गया है। अभियान के सफल संचालन के लिए 216 सर्वे दल एवं 12 सुपरवाइजर नियुक्त किए गए हैं। प्रत्येक दल में आरएचओ (महिला/पुरुष) अथवा सीएचओ के साथ एक मितानिन को शामिल किया गया है।
अभियान के दौरान घर-घर पहुंचकर आरडी किट के माध्यम से मलेरिया की जांच की जाएगी। मलेरिया पॉजिटिव मरीजों का तत्काल उपचार सुनिश्चित करने के साथ उपचार पूर्ण होने के बाद फॉलोअप स्लाइड भी तैयार की जाएगी। इसके अलावा सोर्स नियंत्रण गतिविधियां, मच्छरदानी के उपयोग के प्रति जागरूकता एवं जनसंपर्क अभियान भी चलाए जाएंगे। सभी चयनित ग्रामों में मितानिनों द्वारा रैलियां निकाली जाएंगी तथा प्रतिदिन शाम 7 बजे सीटी एवं घंटी बजाकर मच्छरदानी उपयोग के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। दीवार लेखन, पोस्टर एवं बैनर के माध्यम से भी व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
बैठक में राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस (पल्स पोलियो अभियान) की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। यह अभियान 28 जून से 30 जून 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिसके अंतर्गत 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी। अभियान के प्रथम दिन 28 जून को निर्धारित बूथों पर बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाई जाएगी, जबकि 29 एवं 30 जून को स्वास्थ्य दल घर-घर पहुंचकर बच्चों को दवा पिलाएंगे। कलेक्टर ने अभियान के प्रभावी संचालन के लिए सूक्ष्म कार्ययोजना, प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं आवश्यक संसाधनों की समीक्षा करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग को समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश दिए।
बैठक में जिला पंचायत सीईओ प्रेमकुमार पटेल, अपर कलेक्टर सुरेन्द्र ठाकुर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष शर्मा, जिला कार्यक्रम प्रबंधक सोनल धु्रव, जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विवेक बिसेन, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. बोधन परते, वीबीडी सुपरवाइजर विवेक मेश्राम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़
बिरसा मुंडा जयंती पर युवाओं को मिला समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का संदेश
रायपुर। महान स्वतंत्रता सेनानी और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर मंगलवार को ऑल वॉलंटरी एसोसिएशन फाउंडेशन द्वारा विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में युवाओं और आदिवासी समाज से भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों को अपनाकर समाज व राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के निदेशक डॉ. हेमशंकर जेठमल साहू ने की। शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर संस्था के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएं, युवा एवं विभिन्न आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
डॉ. साहू ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने अपने जीवन में शोषण और अन्याय के खिलाफ संघर्ष करते हुए आदिवासी समाज को नई दिशा दी। उन्होंने कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनका जीवन साहस, आत्मसम्मान और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
उन्होंने युवाओं से शिक्षा, संगठन और आत्मविश्वास के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया। कहा कि युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और यदि वह सही दिशा में आगे बढ़े तो समाज में व्यापक परिवर्तन संभव है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज में जागरूकता फैलाने, सामाजिक कुरीतियों को दूर करने और लोगों को उनके अधिकारों के प्रति सजग बनाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके नेतृत्व में चला जनआंदोलन आज भी सामाजिक न्याय और स्वाभिमान की प्रेरणा देता है।
इस दौरान संस्था के सदस्यों ने आदिवासी समाज के उत्थान, शिक्षा के प्रसार, युवाओं के कौशल विकास और सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। संस्था ने भविष्य में भी भगवान बिरसा मुंडा के विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता अभियान और संगोष्ठियों के आयोजन की घोषणा की।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने भगवान बिरसा मुंडा के बताए मार्ग पर चलने तथा समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कार्य करने की शपथ ली। साथ ही उनके विचारों और योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प भी दोहराया।
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राजनांदगांव4 years ago
ब्रेकिंग न्यूज़ राजनांदगांव। धारा 144 लागू किसी प्रकार के आयोजन, रैली, सामाजिक तथा अन्य आयोजन प्रतिन्धित
