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राजनांदगांव

संस्कार सिटी के चार एनसीसी कैडेट्स का बिलासपुर सैन्य शिविर के लिए चयन, विद्यालय में हर्ष

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राजनांदगांव। संस्कार सिटी इंटरनेशनल स्कूल के चार एनसीसी कैडेट्स का संयुक्त वार्षिक शिविर (130 ग्रुप टीएससी-1) के लिए चयन हुआ है। इस उपलब्धि से विद्यालय परिवार में खुशी का माहौल है। चयनित कैडेट्स 2 से 12 जुलाई तक बिलासपुर में आयोजित होने वाले शिविर में भाग लेंगे।
शिविर के दौरान कैडेट्स को थल सैनिक कैंप (टीएससी) की तैयारी के तहत शूटिंग, उन्नत सैन्य प्रशिक्षणए ड्रिल (परेड) तथा नेतृत्व विकास से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
चयनित कैडेट्स में कक्षा 9वीं के ओझल पटेल और हिमांशु साहू तथा कक्षा 10वीं के पुष्कर साहू और सौरभ पोंडी शामिल हैं। विद्यालय प्रबंधन ने इसे संस्था और जिले के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है।
विद्यालय की प्राचार्या रेखा तिवारी ने चयनित कैडेट्स को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि एनसीसी विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करती है। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी कैडेट्स शिविर में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय और जिले का नाम रोशन करेंगे।
विद्यालय के प्रबंधक अतुल देशलहरा, आदित्य अग्रवाल एवं ऊहा अग्रवाल ने भी चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि कैडेट्स की यह सफलता अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायी है और भविष्य में वे राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

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राजनांदगांव

पीएम सूर्यघर योजना से रोशन हुआ शिक्षक प्रशांत यादव का घर, बिजली बिल हुआ शून्य

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राजनांदगांव। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों के लिए आर्थिक बचत के साथ स्वच्छ ऊर्जा अपनाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। शहर की जीवन कॉलोनी निवासी शिक्षक प्रशांत यादव ने योजना का लाभ लेकर अपने घर में 3 किलोवॉट क्षमता का सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित कराया है। इससे उनका बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो गया है और वे पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रहे हैं।

प्रशांत यादव ने बताया कि अप्रैल 2026 से सोलर प्लांट से बिजली उत्पादन शुरू हुआ। गर्मी के मौसम में प्रतिदिन करीब 20 यूनिट तक बिजली का उत्पादन हुआ, जिससे पहले 1500 रुपए से लेकर गर्मी में 3 से 4 हजार रुपए तक आने वाला मासिक बिजली बिल पूरी तरह समाप्त हो गया।

उन्होंने बताया कि सोलर संयंत्र की स्थापना के लिए बैंक से वित्तीय सहायता मिली तथा अधिकृत वेंडर के सहयोग से पूरी प्रक्रिया आसानी से पूरी हुई। केंद्र और राज्य शासन से कुल 1.08 लाख रुपए की सब्सिडी मिलने से संयंत्र की लागत भी काफी कम हो गई।

प्रशांत यादव ने बताया कि नेट मीटरिंग व्यवस्था के माध्यम से अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जा रही है। वहीं ‘मोर बिजली’ मोबाइल एप के जरिए रोजाना बिजली उत्पादन और खपत की जानकारी भी आसानी से मिल जाती है। बादल छाए रहने पर भी सोलर प्लांट से संतोषजनक बिजली उत्पादन हो रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना केवल बिजली बिल कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा रही है। उनके घर में लगे सोलर रूफटॉप को देखकर कई मित्र और सहकर्मी भी इस योजना से प्रेरित हुए हैं और अपने घरों में सोलर सिस्टम लगाने की तैयारी कर रहे हैं।

प्रशांत यादव ने नागरिकों से योजना का लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि यह दीर्घकालीन आर्थिक बचत के साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस जनहितकारी योजना के लिए केंद्र और राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

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राजनांदगांव

कम पानी में ज्यादा मुनाफा : धान छोड़ उद्यानिकी फसलों की ओर बढ़े किसान तामेश्वर साहू

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राजनांदगांव। अल्प वर्षा और जल संरक्षण की आवश्यकता के बीच जिले के ग्राम जंगलेसर के किसान तामेश्वर लाल साहू ने धान की पारंपरिक खेती छोड़कर उद्यानिकी फसलों को अपनाते हुए फसल विविधीकरण की मिसाल पेश की है। कम पानी में अधिक उत्पादन और बेहतर आमदनी मिलने से वे अब अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।

करीब तीन एकड़ भूमि के मालिक तामेश्वर साहू ने बताया कि पहले वे खरीफ सीजन में धान की खेती करते थे, जिससे प्रति एकड़ लगभग 15 हजार रुपए का लाभ होता था। बदलते मौसम और पानी की कमी को देखते हुए उन्होंने धान की जगह सब्जी एवं अन्य उद्यानिकी फसलों की खेती शुरू की। पिछले वर्ष आधा एकड़ में बैंगन की खेती से उन्हें करीब साढ़े तीन लाख रुपए का लाभ हुआ। बेहतर मुनाफे से उत्साहित होकर इस वर्ष उन्होंने उद्यानिकी फसलों का रकबा और बढ़ा दिया है।

उन्होंने बताया कि धान की तुलना में सब्जियों और अन्य वैकल्पिक फसलों में पानी की जरूरत कम होती है। इससे जल संरक्षण के साथ मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है। लगातार धान की खेती से भूमि कठोर होती है, जबकि उद्यानिकी फसलों से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर रहती है और उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होती है।

तामेश्वर साहू ने किसानों से मौसम और जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए धान के साथ मक्का, मूंग, दलहन, तिलहन और उद्यानिकी फसलों की खेती अपनाने की अपील की। उनका कहना है कि इससे कम पानी में अधिक उत्पादन और बेहतर आय हासिल की जा सकती है।

उन्होंने बताया कि राज्य शासन द्वारा धान के स्थान पर अन्य फसलें लगाने वाले किसानों को 15 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। इस योजना से किसानों में फसल विविधीकरण के प्रति रुचि बढ़ी है। उन्होंने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

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झमाझम बारिश से बेहाल राजनांदगांव, अमले के साथ सड़क पर उतरे महापौर व आयुक्त

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राजनांदगांव। शनिवार रात से शहर में हो रही लगातार मूसलाधार बारिश ने नगर निगम की व्यवस्थाओं की परीक्षा ले ली। बारिश के कारण शहर की निचली बस्तियों और झुग्गी इलाकों में पानी भर गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रविवार सुबह से ही महापौर मधुसूदन यादव, निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा, निगम अध्यक्ष टोपेन्द्र सिंह (पारस वर्मा) और स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी सदस्य शैकी बग्गा खुद मैदान में उतरे। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के इस संयुक्त दल ने शहर के आंतरिक व बाहरी क्षेत्रों का तूफानी दौरा कर राहत कार्य शुरू कराया। इस दौरान कलेक्टर जितेन्द्र यादव भी जिला मुख्यालय से स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग करते रहे।

महापौर व आयुक्त ने चिखली, इंदिरा नगर, नंदई, बसंतपुर अस्पताल परिसर, मोहारा और लखोली जैसे जलभराव वाले क्षेत्रों का बारीकी से निरीक्षण किया। ममता नगर अंडरब्रिज में भारी पानी भर जाने के कारण तत्काल हैवी पंप लगाकर पानी की निकासी कराई गई, जिससे आवागमन बहाल हो सका।

मलबे और अतिक्रमण पर चली जेसीबी, खोदी गईं कच्ची नालियां
निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि कई जगहों पर नागरिकों द्वारा नालियों के ऊपर अस्थाई निर्माण कर लेने और नाले में भारी कचरा फंसने के कारण पानी की निकासी रुद्ध हो गई थी। महापौर के निर्देश पर तत्काल जेसीबी मशीनों को तैनात किया गया। अमले ने नालियों के ऊपर के अवरोधों को हटाया और फंसे हुए मलबे को साफ कराया।

जी.ई. रोड, बसंतपुर जिला अस्पताल, हाट बाजार, राजीव नगर, आर.के. नगर, मोतीपुर, कैलाश नगर और केशर नगर की झुग्गी बस्तियों में घरों के आसपास जमा पानी को निकालने के लिए आपातकालीन तौर पर कच्ची नालियां खुदवाई गईं। महापौर ने स्वास्थ्य अमले को हिदायत दी कि निचली बस्तियों में अल्प वर्षा में भी जलभराव हो जाता है, इसलिए मानसून के दौरान यहां नियमित रूप से बड़े नालों की गहरी सफाई सुनिश्चित की जाए।

नाला निर्माण से भविष्य में मिलेगी स्थाई राहत: महापौर
“जिस तरह जिला चिकित्सालय परिसर को ऊंचा करने से वहां पानी भरने की समस्या का स्थाई समाधान हो गया, ठीक उसी तरह शहर में चल रहे बड़े नाला निर्माण कार्यों से आने वाले वर्षों में नागरिकों को जलभराव से मुक्ति मिल जाएगी। वर्तमान में शासन की स्वीकृति से ‘नार कन्हैया नाला’ (जो इंदिरा नगर, नंदई आदि क्षेत्रों से गुजरता है) के संकरे व कच्चे हिस्से को तोड़कर नया पक्का नाला बनाया जा रहा है। अभी लोहा बाड़ा क्षेत्र में काम चलने से थोड़ी असुविधा जरूर हो रही है। इसके साथ ही गोकुल नगर नाले के निर्माण की प्रक्रिया भी गति पर है। इनके पूरा होते ही स्थिति पूरी तरह सुधर जाएगी।”
— मधुसूदन यादव, महापौर

कमिश्नर के कड़े तेवर: लापरवाही पर होगी सीधी कार्रवाई
निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा ने तकनीकी अधिकारियों और स्वास्थ्य अमले की बैठक लेकर दोटूक निर्देश दिए कि जलभराव और गड्ढों वाले स्थानों से पानी निकासी के काम में कोई ढिलाई न बरती जाए।

वार्ड प्रभारियों को निर्देश: सभी वार्ड प्रभारी और सफाई दरोगा अपने-अपने वार्डों के संवेदनशील और जलभराव वाले क्षेत्रों को तत्काल चिन्हांकित कर उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपें।

तीन शिफ्टों में अलर्ट: टाका घर स्थित मुख्य कंट्रोल रूम में तैनात कर्मचारियों को तीनों पालियों (24 घंटे) में मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं।

संसाधनों की उपलब्धता: आपातकालीन स्थिति और बाढ़ जैसे हालातों से निपटने के लिए आवश्यक उपकरण और संसाधन रेडी मोड पर रखने को कहा गया है, ताकि शिकायत मिलते ही त्वरित कार्रवाई की जा सके।

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