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बिना मान्यता लिए फिर आरंभ रविन्द्रनाथ टैगोर स्कूल, मुख्यमंत्री कार्यालय का जांच का आदेश हवा-हवाई

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खैरागढ़। शिक्षा का अधिकार कानून सिर्फ कागजों पर कड़ाई से पालन कराया जा रहा है, वरना आज शासकीय राशि का गबन करने वाले प्रायवेट स्कूल संचालकगण सलाखों के पीछे होते। नवीन जिला बनने के पश्चात् यह उम्मीद लगाई जा रही थी कि शिक्षा विभाग से भ्रष्टाचार कम हो जाएगा और कमीश्नखोरों पर सख्त कार्यवाही होगी लेकिन शासकीय राशि का गबन करने वाले आज सीना ताने घुम रहे है। मुख्यमंत्री के कार्यालय से प्राप्त जांच आदेश सिर्फ हवा-हवाई बन कर रह गया है, क्योंकि जांच के नाम से जो जमकर उगाही हो रही है, उससे तो कार्यवाही होने की उम्मीद धुंधला सी गई है।
लाखों के गबन में लिप्त स्कूल संचालक पुनः बिना मान्यता लिए छोटे-छोटे बच्चों से मोटी फीस लेकर स्कूल संचालित कर रहे है, जबकि तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी राजनांदगांव हेतराम सोम ने रविन्द्रनाथ टैगोर स्कूल, खैरानर्मदा, जिला खैरागढ़-गंडई-छुईखदान की जांच दिनांक 13.09.2021 और 23.10.2021 को कराया गया था और लोक शिक्षण संचालनालय ने वर्ष 2022 में जांच कराया गया और जांच अधिकारियों ने अपनी जांच रिपोर्ट और पंचनाम रिपोर्ट तत्कालीन डीईओ राजनांदगांव और संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय, नवा रायपुर के समक्ष प्रस्तुत किया था, जिसमें यह स्पष्ट उल्लेख है कि यह स्कूल वर्ष 2020-21 से पूर्णतः बंद है, अध्यापन कार्य नहीं हो रहा है, यानि यह स्कूल वर्ष 2019-20 तक ही संचालित था, लेकिन इसके बावजूद इस स्कूल को चालू बताकर वर्ष 2020-21 में 79 आरटीई के बच्चों के हिसाब से प्रतिपूर्ति राशि जो लगभग पांच लाख पछपन हजार चार सौ बीस रूपया है, दिनांक 06.10.2021 को स्कूल के खाते में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी राजनांदगांव हेतराम सोम ने मांग पत्र को सत्यापित कर लोक शिक्षण संचालनालय, नवा रायपुर से स्कूल के बैंक खाते में हस्तांतरण कराया गया, जबकि जांच अधिकारी को सिर्फ 48 बच्चों की जानकारी दी गई, उसमें से भी जनू 2020 को 44 बच्चे टीसी लेकर अन्य स्कूल में प्रवेश ले चुके थे।
दिनांक 08.12.2020 को इस स्कूल के खाते में 86 आरटीई के गरीब बच्चों के हिसाब से छह लाख दो हजार तीन सौ पच्चास रूपया हस्तांतरण कराया गया, जबकि वर्ष 2019-20 में इस स्कूल में इतने आरटीई के गरीब बच्चे प्रवेशित थे ही नहीं। इस प्रकार इस स्कूल ने बच्चों की अधिक संख्या बताकर दो वर्षो 2020 एवं 2021 को स्कूल के खाते में प्रतिपूर्ति राशि हस्तांतरण कराया गया। तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी राजनांदगांव हेतराम सोम ने मांग पत्र में उल्लेखित राशि को सत्यापित कर लोक शिक्षण संचालनालय, नवा रायपुर से स्कूल के बैंक खाते में यह राशि हस्तांतरण कराया गया। इस राशि को स्कूल के संचालक ने इस्तेमाल किया और इस प्रकार शासकीय राशि का सुनियोजित ढंग से जान-बुझकर एक षड्यंत्र के तहत संगठित रूप से गबन किया गया।
वैसे ही रविन्द्रनाथ टैगोर स्कूल, उदयपुर, जिला खैरागढ़-गंडई-छुईखदान के खाते में दिनांक 13.02.2020 को 61 आरटीई के बच्चों के हिसाब से चार लाख सताईस हजार एक सौ रूपया हस्तांतरित कराया गया और दिनांक 08.12.2020 को 71 आरटीई के बच्चे के हिसाब से पांच लाख दो हजार छह सौ बीस रूपया हस्तांतरित कराया गया, जबकि वर्ष 2019-2020 में इस स्कूल में इतने आरटीई के गरीब बच्चे प्रवेशित ही नहीं थे और वर्ष 2021-22 से स्कूल पूर्णतः बंद है। यानि यह स्कूल वर्ष 2020-21 तक ही संचालित था। जांच अधिकारियों के अनुसार इस स्कूल में सिर्फ 43 आरटीई के बच्चे ही पाए गए। यानि यह स्कूल, दो वर्षो 2019 एवं 2020 में बच्चों की संख्या अधिक बताकर प्रतिपूर्ति राशि की मांग किया गया, और जिला शिक्षा अधिकारी राजनांदगांव ने इस मांग पत्र को सत्यापित कर लोक शिक्षण संचालनालय, नवा रायपुर से राशि स्कूल के खाते हस्तांतरण कराया गया और इस राशि को स्कूल के संचालक ने इस्तेमाल किया।
शिकायतकर्त्ता क्रिष्टोफर पॉल, जो छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष भी है, उनका कहना है कि, रविन्द्रनाथ टैगोर स्कूल के संचालकगणों के द्वारा शासकीय राशि का सुनियोजित ढंग से जान-बुझकर एक षड्यंत्र के तहत संगठित रूप से गबन किया गया। पुलिस विभाग को सभी दस्तावेजी साक्ष्य दिए जा चुके है, लेकिन अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हुआ है, जो समझ से परे है।

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कबीर जयंती पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, सांसद संतोष पांडे और महापौर ने दी शुभकामनाएं

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राजनांदगांव। कबीर जयंती के अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधायक डॉ. रमन सिंह, सांसद संतोष पांडे और महापौर मधुसूदन यादव ने जिलेवासियों को शुभकामनाएं देते हुए संत कबीर के विचारों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संत कबीर केवल महान संत ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक और युग प्रवर्तक भी थे, जिनके विचार आज भी समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।

संयुक्त शुभकामना संदेश में उन्होंने कहा कि संत कबीर ने सत्य, अहिंसा, दया, करुणा, परोपकार और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करते हुए मानवता और समानता पर आधारित समाज की स्थापना का मार्ग दिखाया। उनके दोहे आज भी लोगों, विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।

उन्होंने कहा कि कबीरधाम से लेकर दामाखेड़ा तक उनके अनुयायी आज भी उनके विचारों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। संत कबीर की रचनाओं में कबीर अमृतवाणी विशेष रूप से लोकप्रिय है और उनके दोहे विश्वभर में प्रसिद्ध हैं।

इस अवसर पर निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा, निगम अध्यक्ष टोपेन्द्र सिंह पारस वर्मा, नेता प्रतिपक्ष संतोष पिल्ले, महापौर परिषद के सदस्य, वरिष्ठ एवं कनिष्ठ सभापति, अपील समिति के सदस्य तथा पार्षदों ने भी नागरिकों को कबीर जयंती की शुभकामनाएं दीं। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि संत कबीर ने कभी धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव का समर्थन नहीं किया और उनका जीवन मानवता, सद्भाव और सामाजिक एकता का संदेश देता है। उन्होंने नागरिकों से संत कबीर के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की अपील की।

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365 दिन बिना छुट्टी कर रहे पशुधन विभाग के मैदानी कर्मचारी, साप्ताहिक अवकाश की मांग संघ ने मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन

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राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ पशुधन विकास विभाग के मैदानी अधिकारी-कर्मचारी वर्षों से बिना किसी साप्ताहिक अवकाश के लगातार 365 दिन सेवाएं दे रहे हैं। कर्मचारियों की शारीरिक एवं मानसिक थकान तथा सेवा गुणवत्ता पर पड़ रहे विपरीत प्रभाव को देखते हुए अनुसूचित जाति-जनजाति पशुचिकित्सा अधिकारी संघ ने माननीय मुख्यमंत्री एवं माननीय विधानसभा अध्यक्ष से भेंट कर ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में प्रमुख मांगें:
संघ ने ज्ञापन के माध्यम से विभाग के मैदानी अमले को सप्ताह में एक दिन का अनिवार्य साप्ताहिक अवकाश देने की मांग की है। एवं शासकीय अवकाश के दिनों में भी पशु चिकित्सालय सुबह 8 बजे से 10 बजे तक 2 घंटे के लिए खोले जाएं, जिससे गंभीर बीमार पशुओं को तत्काल उपचार मिल सके।

संघ का पक्ष:
ज्ञापन सौंपते हुए संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. रामचंद्र रामटेके ने कहा, “मैदानी स्तर पर हमारे अधिकारी-कर्मचारी बस्तर के घने जंगलों से लेकर सरगुजा की दुर्गम पहाड़ियों तक टीकाकरण, नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान एवं आपातकालीन उपचार का कार्य करते हैं। वर्षभर बिना किसी साप्ताहिक अवकाश के लगातार कार्य करने से स्टाफ में अत्यधिक शारीरिक एवं मानसिक थकान व्याप्त है। इसका सीधा असर फील्ड में दी जा रही सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।”

संवैधानिक एवं समानता का तर्क:
डॉ. रामटेके ने बताया कि साप्ताहिक अवकाश का प्रावधान भारतीय संविधान में भी उल्लेखित है। राज्य के लगभग सभी विभागों में कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश की सुविधा प्राप्त है। यहां तक कि स्वास्थ्य विभाग जैसे आपातकालीन सेवा वाले विभाग में भी साप्ताहिक अवकाश एवं रोस्टर प्रणाली लागू है। पशुधन विकास विभाग के कर्मचारी भी उसी तर्ज पर मानव संसाधन नीति के तहत अवकाश के हकदार हैं।

अन्य प्रमुख मांगें:
ज्ञापन में संघ ने विभाग में लंबे समय से रिक्त सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी के पदों पर तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी उठाई। इसके अलावा दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के बैकलॉग पदों पर भर्ती प्रक्रिया को भी प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने का आग्रह किया गया, ताकि विभाग को योग्य मानव संसाधन मिल सके और पशुपालकों को बेहतर सेवाएं मिलें।

ज्ञापन प्राप्त कर मुख्यमंत्री ने इस पर शीघ्र निर्णय लेते हुए विभाग को निर्देशित करने का आश्वासन दिया।

ज्ञापन सौंपने के दौरान उपस्थित:
प्रांताध्यक्ष डॉ. रामचंद्र रामटेके, प्रांतीय सचिव डॉ. तरुण रामटेके सहित संघ के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। संघ ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष कर्मचारियों की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लेंगे।

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स्कूलों में गायत्री मंत्र-हनुमान चालीसा, सरकार का फैसला सराहनीय : दीपक सोनी

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राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ शासन के मंत्रिमंडल द्वारा प्रदेश के विद्यालयों में विद्यार्थियों को गायत्री मंत्र एवं हनुमान चालीसा का पाठ कराने संबंधी लिए गए निर्णय का विश्व हिंदू रक्षा संगठन ने जोरदार स्वागत करते हुए इसे भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं संस्कारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी पहल बताया है।
विश्व हिंदू रक्षा संगठन के जिला अध्यक्ष दीपक सोनी ने जारी अपने वक्तव्य में कहा कि यह निर्णय नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं एवं नैतिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण की आधारशिला भी होते हैं। ऐसे में गायत्री मंत्र एवं हनुमान चालीसा जैसे प्रेरणादायी स्त्रोतों का अध्ययन विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोचए राष्ट्रभक्ति एवं नैतिक चेतना का विकास करने में सहायक सिद्ध होगा।
आगे उन्होंने कहा कि, भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन एवं समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर है। नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। राज्य सरकार का यह निर्णय विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
श्री सोनी ने इस निर्णय के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं विशेष रूप से शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू रक्षा संगठन छत्तीसगढ़ शासन के इस निर्णय का पूर्ण समर्थन करता है तथा आशा व्यक्त करता है कि इससे विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं एवं सनातन जीवन मूल्यों के प्रति जागरूकता और सम्मान की भावना और अधिक सुदृढ़ होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल शिक्षा के साथ.साथ संस्कारयुक्त समाज निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा आने वाली पीढ़ियों को भारतीय सभ्यता एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

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