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राजनांदगांव

तकनीकी त्यागपत्र देकर निम्न पद से उच्च पद पर चयनित शिक्षकों को सीधी भर्ती मानना गलत है : फेडरेशन

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राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी ने वित्त सचिव को ज्ञापन सौंपकर निम्न पद से उच्च पद पर चयनित शिक्षकों को स्टाइपेंड नियम से मुक्त करने का पक्ष रखा है। उन्होंने वित्त सचिव के समक्ष पक्ष रखा कि शिक्षा विभाग में पहले से कार्यरत जिन शिक्षकों ने विभागीय अनुमति लेकर निम्न पद से उच्च पद पर चयनित होने के फलस्वरूप निम्न पद से तकनीकी त्याग पत्र दिया था, उन पर छत्तीसगढ़ शासन वित्त विभाग का आदेश 3 अगस्त 2018 (वित्त निर्देश 41/2018) प्रभावशील है, लेकिन इसका पालन शिक्षा विभाग नहीं हो रहा है।
फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी, प्रांतीय प्रमुख महामंत्री सतीश ब्यौहरे, जिला संरक्षक मुकुल साव, जिला अध्यक्ष पीआर झाड़े, पीएल साहू, जितेंद्र बघेल, बृजभान सिन्हा, सीएल चंद्रवंशी, वीरेंद्र रंगारी, रंजीत कुंजाम, सोहन निषाद, अब्दुल कलीम खान, स्वाति वर्मा, नवीन कुमार पांडे, उत्तम डड़सेना, देवचंद बंजारे, शिव प्रसाद जोशी, खोमलाल वर्मा, हेमंत पांडे, लीलाधर सेन, पुष्पेंद्र साहू, संजीव मिश्रा, हेमंत दोंदीलकर, श्रीमती संगीता ब्यौहरे, श्रीमती अभिशिक्ता फंदियाल, सुधांशु सिंह, पायल देवांगन, वंदना पानसे, शिरीष कुमार पांडे, राजेश शर्मा, नरेश प्रसाद दुबे, रमेश कुमार साहू, ईश्वर दास विश्राम, रानी ऐश्वर्य सिंह ने उपरोक्त जानकारी देते हुए बताया कि जीवन में आगे बढ़ने की इच्छा, किसे नहीं होती है। छोटा व्यापारी बड़ा व्यापारी बनना चाहता है। छोटे किसान बड़े किसान बनना चाहते हैं। ठीक उसी प्रकार कर्मचारी भी अपनी योग्यता के आधार पर निम्न पद से उच्च पद में जाना चाहते हैं। इसके लिए कुछ कर्मचारी प्रमोशन का इंतजार करते हैं तो कुछ सीजीपीएससी एवं व्यापम की सीधी भर्ती की परीक्षा में विभागीय अनुमति लेकर परीक्षा उत्तीर्ण कर उच्च पद में जाते हैं, ताकि उन्हें उच्च पद में निम्न पद की तुलना में ज्यादा वेतन लाभ एवं स्टेटस मिल सके। परंतु वर्तमान में छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग में इसका उल्टा हो रहा है, जो शिक्षक विभागीय अनुमति लेकर परीक्षा देकर उच्च पद में गए हैं उन्हें अब निम्न पद की तुलना में कम वेतन मिल रहा है। इसका मुख्य कारण है कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा वित्त निर्देश 41/2018 के कंडिका- 2.2 में उल्लेखित वेतन संरक्षण का लाभ न देकर चयनित पद के वेतनमान का प्रथम वर्ष 70 प्रतिशत, द्वितीय वर्ष 80 प्रतिश्त और तृतीय वर्ष 90 प्रतिशत स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जो कि गलत है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन वित्त विभाग के आदेश 3 अगस्त 2017 (वित्त निर्देश 41/2018) में स्पष्ट उल्लेख है कि राज्य शासन के अधीन ऐसे शासकीय सेवक जो कि अपने ही विभाग अथवा अन्य विभागों में उच्च पद पर चयनित होते हैं तो उच्च पद पर कार्यभार ग्रहण करने दिया गया त्याग पत्र को प्रशासनिक कारणों से तकनीकी त्याग पत्र माना जायेगा।
उन्होंने बताया कि वित्त विभाग के आदेशानुसार तकनीकी त्याग पत्र जैसे प्रकरणों में उच्च पद पर जाने वाले कर्मचारियों को वेतन संरक्षण एवं वार्षिक वेतन वृद्धि सहित अन्य लाभ हेतु नियम लिखित है। तथापि बहुत सारे तकनीकी त्याग पत्र शिक्षकों को इसका लाभ वर्तमान में नहीं दिया जा रहा है। इस मुद्दे को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी द्वारा छत्तीसगढ़ शासन के वित्त सचिव अंकित आनंद को ज्ञापन सौंपकर इस मुद्दे हेतु ध्यान आकर्षित किया गया है। साथ ही यह मांग रखा गया है कि जो शिक्षक विगत 15-16 सालों से शासन को सेवा दे रहे थे और प्रमोशन की संभावना नहीं देखते हुए परीक्षा लिखकर नए पदों पर आए हैं उनको वेतन के स्थान पर वेतन का क्रमशः 3 वर्ष 70 प्रतिशत, 80 प्रतिशत, 90 प्रतिशत स्टाइपेंड देना उचित नहीं है। उन्होंने वित्त सचिव से यह मांग किया है कि तकनीकी त्यागपत्र के अधीन शिक्षकों को, स्टाइपेंड से मुक्त रखकर, वेतन संरक्षण संबंधी वित्त विभाग के निर्देश 41/2018 का पालन किये जाने हेतु आदेश जारी किया जावें। गौरतलब है कि एक अन्य निम्न पद से उच्च पद के मामले में न्यायालयीन आदेश के पालन में विभाग द्वारा पर लाखों का वेतन एरियर्स भुगतान किया गया है, लेकिन तकनीकी त्यागपत्र के मामले में वास्तविक वेतन भुगतान नहीं किया जाना अन्याय पूर्ण है।

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राजनांदगांव

कबीर जयंती पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, सांसद संतोष पांडे और महापौर ने दी शुभकामनाएं

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राजनांदगांव। कबीर जयंती के अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधायक डॉ. रमन सिंह, सांसद संतोष पांडे और महापौर मधुसूदन यादव ने जिलेवासियों को शुभकामनाएं देते हुए संत कबीर के विचारों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संत कबीर केवल महान संत ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक और युग प्रवर्तक भी थे, जिनके विचार आज भी समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।

संयुक्त शुभकामना संदेश में उन्होंने कहा कि संत कबीर ने सत्य, अहिंसा, दया, करुणा, परोपकार और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करते हुए मानवता और समानता पर आधारित समाज की स्थापना का मार्ग दिखाया। उनके दोहे आज भी लोगों, विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।

उन्होंने कहा कि कबीरधाम से लेकर दामाखेड़ा तक उनके अनुयायी आज भी उनके विचारों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। संत कबीर की रचनाओं में कबीर अमृतवाणी विशेष रूप से लोकप्रिय है और उनके दोहे विश्वभर में प्रसिद्ध हैं।

इस अवसर पर निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा, निगम अध्यक्ष टोपेन्द्र सिंह पारस वर्मा, नेता प्रतिपक्ष संतोष पिल्ले, महापौर परिषद के सदस्य, वरिष्ठ एवं कनिष्ठ सभापति, अपील समिति के सदस्य तथा पार्षदों ने भी नागरिकों को कबीर जयंती की शुभकामनाएं दीं। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि संत कबीर ने कभी धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव का समर्थन नहीं किया और उनका जीवन मानवता, सद्भाव और सामाजिक एकता का संदेश देता है। उन्होंने नागरिकों से संत कबीर के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की अपील की।

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राजनांदगांव

365 दिन बिना छुट्टी कर रहे पशुधन विभाग के मैदानी कर्मचारी, साप्ताहिक अवकाश की मांग संघ ने मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन

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राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ पशुधन विकास विभाग के मैदानी अधिकारी-कर्मचारी वर्षों से बिना किसी साप्ताहिक अवकाश के लगातार 365 दिन सेवाएं दे रहे हैं। कर्मचारियों की शारीरिक एवं मानसिक थकान तथा सेवा गुणवत्ता पर पड़ रहे विपरीत प्रभाव को देखते हुए अनुसूचित जाति-जनजाति पशुचिकित्सा अधिकारी संघ ने माननीय मुख्यमंत्री एवं माननीय विधानसभा अध्यक्ष से भेंट कर ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में प्रमुख मांगें:
संघ ने ज्ञापन के माध्यम से विभाग के मैदानी अमले को सप्ताह में एक दिन का अनिवार्य साप्ताहिक अवकाश देने की मांग की है। एवं शासकीय अवकाश के दिनों में भी पशु चिकित्सालय सुबह 8 बजे से 10 बजे तक 2 घंटे के लिए खोले जाएं, जिससे गंभीर बीमार पशुओं को तत्काल उपचार मिल सके।

संघ का पक्ष:
ज्ञापन सौंपते हुए संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. रामचंद्र रामटेके ने कहा, “मैदानी स्तर पर हमारे अधिकारी-कर्मचारी बस्तर के घने जंगलों से लेकर सरगुजा की दुर्गम पहाड़ियों तक टीकाकरण, नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान एवं आपातकालीन उपचार का कार्य करते हैं। वर्षभर बिना किसी साप्ताहिक अवकाश के लगातार कार्य करने से स्टाफ में अत्यधिक शारीरिक एवं मानसिक थकान व्याप्त है। इसका सीधा असर फील्ड में दी जा रही सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।”

संवैधानिक एवं समानता का तर्क:
डॉ. रामटेके ने बताया कि साप्ताहिक अवकाश का प्रावधान भारतीय संविधान में भी उल्लेखित है। राज्य के लगभग सभी विभागों में कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश की सुविधा प्राप्त है। यहां तक कि स्वास्थ्य विभाग जैसे आपातकालीन सेवा वाले विभाग में भी साप्ताहिक अवकाश एवं रोस्टर प्रणाली लागू है। पशुधन विकास विभाग के कर्मचारी भी उसी तर्ज पर मानव संसाधन नीति के तहत अवकाश के हकदार हैं।

अन्य प्रमुख मांगें:
ज्ञापन में संघ ने विभाग में लंबे समय से रिक्त सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी के पदों पर तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी उठाई। इसके अलावा दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के बैकलॉग पदों पर भर्ती प्रक्रिया को भी प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने का आग्रह किया गया, ताकि विभाग को योग्य मानव संसाधन मिल सके और पशुपालकों को बेहतर सेवाएं मिलें।

ज्ञापन प्राप्त कर मुख्यमंत्री ने इस पर शीघ्र निर्णय लेते हुए विभाग को निर्देशित करने का आश्वासन दिया।

ज्ञापन सौंपने के दौरान उपस्थित:
प्रांताध्यक्ष डॉ. रामचंद्र रामटेके, प्रांतीय सचिव डॉ. तरुण रामटेके सहित संघ के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। संघ ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष कर्मचारियों की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लेंगे।

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राजनांदगांव

स्कूलों में गायत्री मंत्र-हनुमान चालीसा, सरकार का फैसला सराहनीय : दीपक सोनी

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राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ शासन के मंत्रिमंडल द्वारा प्रदेश के विद्यालयों में विद्यार्थियों को गायत्री मंत्र एवं हनुमान चालीसा का पाठ कराने संबंधी लिए गए निर्णय का विश्व हिंदू रक्षा संगठन ने जोरदार स्वागत करते हुए इसे भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं संस्कारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी पहल बताया है।
विश्व हिंदू रक्षा संगठन के जिला अध्यक्ष दीपक सोनी ने जारी अपने वक्तव्य में कहा कि यह निर्णय नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं एवं नैतिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण की आधारशिला भी होते हैं। ऐसे में गायत्री मंत्र एवं हनुमान चालीसा जैसे प्रेरणादायी स्त्रोतों का अध्ययन विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोचए राष्ट्रभक्ति एवं नैतिक चेतना का विकास करने में सहायक सिद्ध होगा।
आगे उन्होंने कहा कि, भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन एवं समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर है। नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। राज्य सरकार का यह निर्णय विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
श्री सोनी ने इस निर्णय के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं विशेष रूप से शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू रक्षा संगठन छत्तीसगढ़ शासन के इस निर्णय का पूर्ण समर्थन करता है तथा आशा व्यक्त करता है कि इससे विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं एवं सनातन जीवन मूल्यों के प्रति जागरूकता और सम्मान की भावना और अधिक सुदृढ़ होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल शिक्षा के साथ.साथ संस्कारयुक्त समाज निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा आने वाली पीढ़ियों को भारतीय सभ्यता एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

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