राजनांदगांव
छतीसगढ़ में ऊन संवर्धन बोर्ड की गठन की घोषणा पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का आत्मीय आभार : मनोज पाल
राजनांदगांव। गत दिवस छत्तीसगढ़ झेरिया गडरिया (पाल) समाज द्वारा रायपुर के इंडोर स्टेडियम में वार्षिक अधिवेशन का आयोजन किया गया।उक्त अधिवेशन के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल उपस्थित हुए! कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, रायपुर शहर के महापौर एजाज ढेबर, खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन जी ,एवं छत्तीसगढ़ गडरिया पाल समाज के प्रदेश अध्यक्ष मिलन धनकर जी, सर्व गड़रिया समाज के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण महतो जी, उपस्थित हुए ,एवं छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से आए हजारों की संख्या में सामाजिक बंधु इस कार्यक्रम की शोभायमान हुए। कार्यक्रम की परिपेक्ष में समाज प्रेमी मनोज पाल ने आगे बताया कि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी ने कहा कि गडरिया पाल समाज प्रतिष्ठित एवं सम्मानित समाज है समाज के मुख्य व्यवसाय भेड़ पालन को प्रोत्साहन देते हुए भेड़ पालकों की परिवार के बच्चों को पारंपरिक एवं आधुनिक मशीनों के जरिए ऊन की बुनाई कार्य की सुविधा एवं भेड़ पालन को नई तकनीकी की जानकारी दी जाएगी एवं भेड़ पालन करने वालों को लोन की सुविधा मुहैया कराएगी माननीय मुख्यमंत्री जी भेड़ के ऊन की उद्योग लगाने हेतु रियायती दर पर जमीन बिजली की व्यवस्था सरकार द्वारा दी जावेगी जिससे समुदाय की कई बेरोजगार युवकों को रोजगार मिल सके साथ ही समुदाय के भवन के लिए 50 लाख की घोषणा माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा किया गया, छत्तीसगढ़ के संवेदनशील मुख्यमंत्री के द्वारा इस अविस्मरणीय पहल के लिए समाज के सभी लोगों ने आभार जताया ,मनोज पाल ने आगे कहा कि ऊन के उद्योग लगने से समुदाय के विकास में सहायक समावेशी एवं आनंदमय समुदाय का निर्माण होगा साथ ही कौशल तथा एकीकृत समग्र शिक्षा को प्रोत्साहित कर समाज को जिज्ञासु एवं रचनात्मक कार्यों में सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना है, जिससे परिपूर्ण जीवन जीने के लिए अवसर एवं सहायता मिलेगी। आभार व्यक्त करने वालों में छत्तीसगढ़ गडरिया पाल समाज के संरक्षक हीरामन पाल ,मातलडबरी राज के अध्यक्ष सुदर्शन पाल ,महेंद्र पाल, खेदू राम पाल ,परमानंद पाल ,रमेश पाल ,रामखेलावन पाल ,घासीराम पाल, हेमंत पाल, घनश्याम पाल, मुन्ना पाल ,विश्राम पाल, तखत राम पाल, केशव राम पाल नाथूराम पाल, कृपाराम पाल, कुंभकरण पाल, गज्जू पाल, देवेंद्र पाल ,चतुर पाल ,मनेष पाल, निलेश पाल ,हरदेव पाल ,दयाराम पाल ,चित्र कुमार पाल, नरेंद्र पाल, निर्मल पाल ,संत राम पाल, पवन कुमार पाल ,मुरारी पाल, गणेश पाल ,धनेश पाल विष्णु पाल आदि।
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मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों का खोला पिटारा, मोनू बहादुर ने जताया आभार
राजनांदगांव। बीते सोमवार संस्कारधानी की पावनधारा पर पधारे प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 510 करोड़ रुपए के कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया और विकास को एक नई दिशा दी। इतने बड़े और वृहद विकास कार्यों के लिए भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री मोनू बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, राजनांदगांव के लोकप्रिय विधायक व विधानसभा अध्यक्ष डा. रमन सिंह, प्रभारी मंत्री गजेंद्र यादव, लोकप्रिय सांसद संतोष पांडेय सहित पूरे भाजपा नेतृत्व का आभार जताया है।
मोनू बहादुर सिंह ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार में विकास कार्यों की गंगा बहाने का काम पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने किया था और लगातार पंद्रह वर्षों तक प्रदेश में विकास की गंगा बहती रही और अब मौजूदा मुख्यमत्री विष्णुदेव साय ने भी प्रदेश के विकास को नए आयाम दिए हैं।
मोनू बहादुर सिंह ने सभी का ह्रदय से आभार जताते हुए कहा कि 19 गांवों के 8 हजार एकड़ में सिंचाई क्षमता बढ़ाने की सोच, शिवनाथ नदी पर सस्पेंशन ब्रिज का निर्माण, सोयाबीन उत्पादन के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर, मोहारा मेला ग्राउंड से ऑक्सीजोन तक ब्रिज का निर्माण ये सभी कार्य ना सर भाजपा सरकार की दूरदर्शी सोच को दर्शाते हैं, बल्कि यह साबित भी करते हैं कि भाजपा ही एक ऐसी पार्टी है जो जाती धर्म से ऊपर उठाकर केवल विकास की राह पर चलती है।
मोनू ने आगे कहा कि कुमरदा, गैंदाटोला, कल्लूबंजारी में छप्पन करोड़ की लागत से सड़क निर्माण की सौगात विकास कार्यों की कड़ी में मील का पत्थर साबित होगी।
मोनू ने सभी का आभार जताने के अलावा यह भी कहा कि भाजपा की सरकार ही एक ऐसी सरकार है, जहां समर्थन मूल्य एवं कृषक उन्नति योजना के तहत 3100 रूपए प्रति मि्ंटल की दर और प्रति एकड़ 21 मि्ंटल के मान से धान खरीदी की जा रही है। सरकार द्वारा योजनाओं को धरातल स्तर पर क्रियान्वित किया जा रहा है।
मोनू ने कहा कि राजनांदगांव वासियों को सोमवार को 510 करोड़ 89 लाख 16 हजार रूपए की सौगात मिली है। उन्होंने कहा कि 114 करोड़ रूपए की लागत से शिवनाथ व्यपवर्तन योजना से धामनसरा, भर्रेगांव, जंगलेशर सहित 19 गांव को इस योजना से लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि पहले 1641 एकड़ में सिंचाई हो रही थी, लेकिन लाईनिंग कार्य होने पर 7870 एकड़ में सिंचाई होगी और इन सब कार्यों से ना सिर्फ राजनांदगांव को प्रदेश में अलग पहचान मिलेगी, बल्कि आम जनता की आर्थिक स्तिथि में भी बड़ा सुधार होगा।
राजनांदगांव
महंगाई और बिजली की दरों से जनता बेहाल, आर्थिक नीतियां पूरी तरह विफल : सागर ताम्रकार
राजनांदगांव। केंद्र सरकार की दोषपूर्ण आर्थिक नीतियों और लचर आपूर्ति प्रबंधन के कारण आम जनता का मासिक बजट पूरी तरह से बिगड़ चुका है। बढ़ती कीमतों ने विशेषकर निम्न और मध्यम वर्गीय परिवारों का जीना दूभर कर दिया है। यह बात पूर्व एनएसयूआई महासचिव और कांग्रेस नेता सागर ताम्रकार ने एक बयान में कही। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आर्थिक मोर्चे और कानून-व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए।
ताम्रकार ने सरकारी और व्यापारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था पर महंगाई का भारी दबाव है, जिससे आम आदमी पिस रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, खुदरा मुद्रास्फीति उछलकर 16 महीने के उच्चतम स्तर लगभग 3.93 प्रतिशत तक पहुंच गई है। थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई में भारी उछाल दर्ज किया गया है और यह 9.68 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है, जो उत्पादकों और कारखानों की लागत में भारी वृद्धि को दर्शाती है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईंधन व बिजली की थोक महंगाई 30 प्रतिशत से भी अधिक हो चुकी है, जिसका सीधा असर परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत पर पड़ रहा है। खाद्य महंगाई लगातार ऊंचे स्तर (लगभग 4.78 प्रतिशत) पर बनी हुई है। हरी सब्जियों के दाम 48 प्रतिशत से अधिक बढ़ गए हैं, जबकि चांदी की कीमतों में 155 प्रतिशत और सोने में 40 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
कांग्रेस नेता ने केंद्र की विदेश और आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब भारत को रूस से सस्ता कच्चा तेल मिल रहा था, तो अमेरिका के दबाव में वेनेजुएला से तेल खरीदने की क्या जरूरत थी? उन्होंने आरोप लगाया कि तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के नाम पर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। आज मोदी सरकार में अमीर और अमीर होते जा रहे हैं, जबकि गरीबों को दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं हो रहा है। पूंजीपति मित्रों के फायदे के लिए गरीबों का गला घोंटा जा रहा है।
राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए सागर ताम्रकार ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक बिजली उत्पादक राज्य है, लेकिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कार्यकाल में चार बार बिजली की दरों में वृद्धि की गई है। भीषण गर्मी के इस मौसम में भी जनता को निर्बाध बिजली नहीं मिल पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए सुशासन तिहार का जश्न मना रही है, जो कि जनता के साथ क्रूर मजाक है।
बयान में आगे कहा गया कि छत्तीसगढ़ आज नशा और अपराध का गढ़ बन चुका है। किसान, जवान, आदिवासी और महिलाएं आत्महत्या करने को मजबूर हैं। बालोद में आदिवासियों और मीडियाकर्मियों के साथ हुई बर्बरता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन पर कब्जा करने की मुहिम चलाई जा रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार केवल बड़े उद्योगपतियों के इशारे पर काम कर रही है।
ताम्रकार ने सरकार से जनता को तुरंत राहत देने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है, जिसमें आम जनता को राहत देने के लिए पेट्रोल- डीजल और रसोई गैस पर भारी एक्साइज ड्यूटी और टैक्स तुरंत कम किए जाएं। खाद्य पदार्थों, विशेष रूप से हरी सब्जियों और दालों की जमाखोरी और मुनाफाखोरी करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो। आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की वितरण प्रणाली को मजबूत किया जाए ताकि गरीब और मध्यम वर्ग को सस्ती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध हो सके।
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आपातकाल पर भाजपा का राजनीतिक पाखंड : कांग्रेस
राजनांदगांव। भारतीय जनता पार्टी आज आपातकाल का नाम लेकर लोकतंत्र की दुहाई देती है, लेकिन उसे यह भी बताना चाहिए कि आज देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता, विपक्ष की आवाज, मीडिया की स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों की स्थिति क्या है।
उक्त व्यक्तव जारी करते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के संयुक्त महासचिव आफताब आलम ने कहा कि 1975 में लगाया गया आपातकाल तत्कालीन संवैधानिक प्रावधानों के तहत घोषित किया गया था। यह निर्णय असाधारण परिस्थितियों में लिया गया था और अंततः जनता के बीच जाकर चुनाव कराया गया। जनता का जो भी जनादेश आया, कांग्रेस ने उसे पूरी विनम्रता से स्वीकार किया और शांतिपूर्ण ढंग से सत्ता हस्तांतरित की। यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी कसौटी है।
संयुक्त महासचिव आफताब आलम ने कहा कि भाजपा को यह बताना चाहिए कि यदि वह लोकतंत्र की सबसे बड़ी संरक्षक है, तो आज विपक्षी नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई, निर्वाचित सरकारों को अस्थिर करने के आरोप, संसद में विपक्ष की आवाज को दमन एवं सीमित करने की शिकायतें और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर उठते सवाल क्यों लगातार सामने आ रहे हैं?
कांग्रेस ने अपने इतिहास से सीख ली है और लोकतंत्र तथा संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बार-बार दोहराया है। लेकिन भाजपा आज भी 50 वर्ष पुराने इतिहास के सहारे वर्तमान की विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।
देश की जनता अब इतिहास की बहस नहीं, बल्कि वर्तमान के सवालों के जवाब चाहती है-नीट जैसे परीक्षा के पेपर लीक होना, महंगाई क्यों बढ़ रही है, बेरोजगारी क्यों चरम पर है, बिजली की समस्या भयावह हो चुकी है, किसानों की आय क्यों नहीं बढ़ रही, और आम नागरिक का जीवन लगातार कठिन क्यों होता जा रहा है? आज की स्थिति का आकलन करें तो आपातकाल से ज्यादा खतरनाक बनी हुई है।
भाजपा को इतिहास की राजनीति छोड़कर वर्तमान का हिसाब देना चाहिए। कांग्रेस लोकतंत्र, संविधान और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए पहले भी प्रतिबद्ध थी, आज भी है और आगे भी रहेगी।
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