बालोद
ऑनलाईन वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से मनाया गया संविधान दिवस
बालोद। घनश्याम सिंह गुप्त महाविद्यालय, बालोद के विधि विभाग के द्वारा संविधान दिवस के अवसर पर ऑनलाईन गूगल मीट के माध्यम से वर्चुअल संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता डॉ. सुरेन्द्र कुमार एसोसिएट प्रोफेसर केंद्रीय विश्व विद्यालय बोधगया थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जेके खलखो के द्वारा की गई। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. सुरेन्द्र कुमार ने संविधान के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को तथ्यों से अवगत कराया।
मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. सुरेन्द्र कुमार एसोसिएट प्रोफेसर केंद्रीय विश्व विद्यालय बोधगया नें अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि, भारतीय लोकतंत्र में आज का दिन (26 नवंबर) काफी महत्वपूर्ण है। लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की आत्मा हमारा संविधान जिसे हमने आज ही के दिन 26 नवंबर 1949 को स्वीकार किया था और जिसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। यह एक ऐतिहासिक पल है। इसी दिन एक राष्ट्र के तौर पर हमने तय किया था कि अब आगे हमारी दिशा किन निर्देशों पर होगी किन नियमों पर होगी संविधान उक्त निर्देश-नियम के एक-एक शब्द पवित्र व पूजनीय हैं। हमारा संविधान जितना जीवंत है उतना संवेदनशील तथा जितना जवाबदेह है उतना सक्षम भी है। संविधान ही है, जो देश को लोकतंत्र के रास्ते पर बनाए रखता है और उसे भटकने से रोकता है, अर्थात भारत का संविधान विधि के नियमों को स्थापित करने के साथ-साथ लोकतंत्र का रक्षक भी है, और मानवाधिकारों की रक्षा करता है। भारतीय संविधान को उन्होंने महाग्रंथ तक कहा।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जेके खलखो नें भारतीय संविधान को मूल अधिकारों और कर्तव्यों का समुच्चय कहा। विभागाध्यक्ष राघवेश पांडे ने संविधान निर्माण होने की स्थिति और संविधान के निर्माण के पहले की विषमताओं की तुलनात्मक रूप से बात रखी और संविधान के प्रत्येक वाक्य को अपने जीवन में उतारने और उसका अनुसरण करने सुझाव दिया। महाविद्यालय के ही एक वरिष्ठ छात्र सत्यनारायण गुप्ता ने संविधान को देश के लिए, सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय की अवधारणा को चरितार्थ करने वाला एकमात्र मार्गदर्शक बताया। संगोष्ठी के पश्चात संविधान की उद्देशिका का सामूहिक रूप से वाचन किया गया।
उक्त अवसर पर महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक सीडी मानिकपुरी, डॉ. दीपाली राव, एनएस प्रभारी जीएन खरे, जेआर नायक सहित विधि विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक जेके पटेल, वरिष्ठ प्राध्यापिका श्रीमती स्वाति वैष्णव, पूनमचंद गुप्ता, सुब्रत मंडल और महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में शामिल थे। कार्यक्रम का सफल संचालन महाविद्यालय के विधि विभाग की प्राध्यापिका सुश्री पूजा ठाकुर ने किया। अंत में आभार प्रदर्शन जेके पटेल के द्वारा किया गया।
बालोद
बौद्धिक संपदा का ज्ञान सभी के लिए है जरूरी : डॉ. मोना पुरोहित
बालोद। शासकीय घनश्याम सिंह गुप्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बालोद में विधि विभाग द्वारा एक सप्ताह का फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आभाषी मोड में दिनांक 19 फरवरी 2024 से प्रारंभ हुआ। दिनांक 23 फरवरी 2024 को कार्यक्रम का पांचवा दिन था, जिसमें मुख्य वक्ता प्रोफेसर डॉ. मोना पुरोहित (संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष विधि विभाग बरकतउल्ला विश्व विद्यालय) थी। उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकार के उभरते आयाम विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। प्रो. डा. मोना पुरोहित ने अपने व्याख्यान में कहा कि, बौद्धिक संपदा वर्तमान समय का बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है, उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकार को बहुत ही आसान एवं सरल शब्दों में समझाते हुए इसके उभरते बिंदुओं को विस्तार से बताया। उन्होंने कॉपीराइट एक्ट, पेटेंट एक्ट, ट्रेडमार्क एक्ट, ज्योग्राफीकल इंडिकेशन एक्ट पर भी विस्तार से अपने वक्तव्य रखें। उन्होंने शोधार्थियों और प्रतिभागियों से आह्वान किया कि, बौद्धिक संपदा का ज्ञान शोध की प्रासंगिकता को गति देता है। अतः बौद्धिक संपदा का ज्ञान सभी शोधार्थियों के लिए बेहद आवश्यक है। डॉ. पुरोहित द्वारा सभी प्रतिभागियों के प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर दिया गया। इस कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राघवेश पांडेय ने अपने गुरु का स्वागत करते हुए कहा कि, बौद्धिक संपदा अधिकार का ज्ञान सभी के लिए बेहद जरूरी है। साथ ही इस व्याख्यान का लाभ निश्चित ही सभी को मिलेगा। मुख्य वक्ता का स्वागत विधि विभाग की सहायक प्राध्यापिका श्रीमती स्वाति वैष्णव ने किया। अंत में आभार प्रदर्शन डॉ. जेके पटेल ने किया। इस अवसर पर आयोजन समिति के सदस्य प्रो. सीडी मानिकपुरी, अतिथि प्राध्यापक पूनम चंद्र गुप्ता एवं सुब्रत मंडल उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सुश्री पूजा ठाकुर द्वारा बहुत ही आदर्श रूप में किया गया। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने ऑन-लाइन व्याख्यान का लाभ उठाया।
बालोद
देश की प्रगति के लिए लैंगिक समानता जरूरी : डॉ. शशिकांत त्रिपाठी
बालोद। शासकीय घनश्याम सिंह गुप्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बालोद के विधि विभाग एवं आईक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वन वीक फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के चौथे दिन, मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. शशिकांत त्रिपाठी, एसोसिएट प्रोफेसर छत्रपति शाहू जी महाराज कानपुर विश्व विद्यालय एवं अटल बिहारी वाजपेई स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज थे। उन्होंने लैंगिक संवेदीकरण विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि, भारत में नारियों की पूजा की जाती है, हमारे धर्म शास्त्रों में भी इसका उल्लेख देखने को मिलता है, लेकिन व्यवहारिक रूप से देखा जाये तो समाज में ऐसा बिल्कुल नहीं है। हमारा प्रयास यही होना चाहिए कि, हम मानव समाज में बदलाव कैसे लाएं कि, समाज भी नारी और पुरुष को एक समान दृष्टि से देखने लगे। वही समाज संसार में प्रगति कर सकता है, जो लैंगिक समानता को प्राथमिकता देता है, किन्तु विडंबना है कि, आज भी लैंगिक भेदभाव जारी है, इसलिए हम सभी को इस मुद्दे पर बात करने की आवश्यकता पड़ रही है, वरना अगर यह प्रचलन में नहीं होता तो इस विषय में बात करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। आज महिलाएं हवाई जहाज उड़ा रही है, बड़े-बड़े जहाज चला रही है, लड़ाकू विमान उड़ा रही है, डॉक्टर है, टीचर है, नर्स है, प्रत्येक क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसलिए आज पुरानी दकियासुनी मान्यताओं को तोड़ते हुए महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर देने की जरूरत है, ताकि वह नई ऊंचाइयों में पहुंचकर अपना खुद का मुकाम बना सके। व्याख्यान के पूर्व कार्यक्रम के संयोजक एवं विधि विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राघवेश पांडे ने उक्त कार्यक्रम को महत्त्वकांक्षी बताते हुए कहा कि, निश्चित ही आज का विषय, समाज के दृष्टिकोण को बदलने में सहायक होंगी और देश के विकास और प्रगति को नया आयाम देगी। लैंगिक असमानता आज की ज्वलंत समस्या है, और इसे समाजिक जागरूकता से ही दूर किया जा सकता है। महाविद्यालय के अतिथि प्राध्यापक पूनम चंद गुप्ता ने व्याख्यान से पूर्व, आज के अतिथि और मुख्य वक्ता डॉ. शशिकांत त्रिपाठी का परिचय कराया। कार्यक्रम का सफल संचालन सुश्री पूजा ठाकुर ने किया और आभार प्रदर्शन सुब्रत मंडल अतिथि प्राध्यापक ने किया। इस अवसर पर आयोजन समिति के सदस्य प्रो. सीडी मानिकपुरी, प्रो. स्वाति वैष्णव सहायक प्राध्यापक विधि, कार्यक्रम के सह संयोजक डॉ. जैनेंद्र कुमार पटेल सहायक प्राध्यापक विधि एवं कार्यक्रम संचालन समिति के सदस्य पूनम चंद गुप्ता ने सक्रिय रूप से अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।
बालोद
फैकेल्टी प्रोग्राम से नवाचार को मिलता है बढ़ावा : डॉ. अरुणा पलटा
बालोद। शासकीय घनश्याम सिंह गुप्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय बालोद में विधि विभाग द्वारा एक सप्ताह का फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आभाषी मोड में दिनांक 19 फरवरी 2024 से प्रारंभ हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हेमचंद यादव विश्व विद्यालय दुर्ग के कुलपति डॉ. अरुणा पलटा, विशिष्ट अतिथि कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप एवं आज के तकनीकी सेशन के मुख्य वक्ता दिल्ली विश्व विद्यालय के प्रध्यापक डॉ. नरेश महिपाल थे। साथ ही कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. जेके खलखो प्राचार्य शासकीय घनश्याम सिंह गुप्त महाविद्यालय बालोद ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए पहले दिन के इस आयोजन में मुख्य अतिथि डॉ. अरुणा पलटा ने इस कार्यक्रम की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए अपने शुभकामना संदेश में कहा कि, वर्तमान समय में शिक्षा के उत्तरोत्तर प्रगति के लिए फैकेल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम से शिक्षकों में एक नई ऊर्जा का संचार होता है और जब बहू विषयी विषयों पर इस प्रकार के कार्यक्रम होते हैं तब विभिन्न विषयों का ज्ञान भी होता है। आगे उन्होंने कहा कि, यह कार्यक्रम सफलता के नये आयाम गढ़ेगी। विशिष्ट अतिथि भूपेंद्र कुलदीप ने कहा कि, यह बड़े ही गौरव का क्षण है कि, हमारे सबसे बड़े महाविद्यालय में यह कार्यक्रम आयोजित हो रहा है, इस कार्यक्रम के द्वारा शिक्षकों को एक नया आयाम मिलेगा और शिक्षकों के व्यक्तिगत विकास में भी यह उतना ही सहायक होगा। आज के विषय विशेषज्ञ डॉ. नरेश महिपाल ने घरेलू हिंसा और न्यायिक सक्रियता पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने घरेलू हिंसा विधि और न्यायपालिका के द्वारा दिए गए निर्णय को सारगर्भित रूप से बताया और प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर दिया। इस कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राधवेश पांडे ने अपने स्वागत भाषण में अवगत कराया कि, यहां पहला अवसर है कि, विधि विभाग द्वारा फैकेल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम महाविद्यालय में आयोजित किया गया है। इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के विधि विभाग की प्राध्यापिका सुश्री पूजा ठाकुर द्वारा बहुत ही आदर्श रूप में किया गया। अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एचएल मानकर द्वारा तथा रिसोर्स पर्सन का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दीपाली राव के द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रो. सीडी मानिकपुरी, प्रो. एलके गवेल, डॉ. जेके पटेल, पूनमचंद गुप्ता, सुब्रत मंडल आदि प्राध्यापक उपस्थित थे।
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