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छत्तीसगढ़

*अंतरराष्ट्रीय बास्केटबाॅल प्रशिक्षक कालवा राजेश्वर राव ने वनांचल एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के रॉ टेलेंटेड बालिकाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया।*

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राजनांदगांव को बास्केटबाॅल की नर्सरी बनाने में अहम भूमिका

एक ही स्थान पर 08 बास्केटबाॅल कोर्ट सहित शहर में 20 से अधिक कोर्ट बनवाने में अहम भूमिका।

राजनांदगांव में 2001 में साई ट्रेनिंग सेंटर राजनांदगांव की स्थापना की गई उस समय यहाँ साई का यह सेंटर हॉकी, कई आवासीय योजना एवं बास्केटबॉल एवं व्हॉलीबॉल की डे बोर्डिंग योजना संचालित थी। 2001 में यह केंद्र मुख्यतः हॉकी के लिए ही खोला गया था। इसके लिए स्थानीय दिग्विजय स्टेडियम में ग्रासी हॉकी मैदान एवं टुटा फुटा बास्केटबॉल मैदान उपलब्ध था। वालीबॉल के खिलाडी स्टेट स्कूल के मैदान पर अभ्यास करते थे।
मार्च 2001 में साई ट्रेनिंग सेंटर राजनांदगांव में बास्केटबाॅल प्रशिक्षक के तौर पर कालवा राजेश्वर राव की पोस्टिंग हुई। उस समय यहाँ बास्केटबॉल ना के बराबर था।
उन्होंने शूरूवाती समय में विभिन्न स्कूलों से संपर्क कर अलग अलग स्कूलों में जाकर रॉ टेलेंटेड बालक बालिकाओं को को चयनीत कर उनको सांईटिफिक ट्रेनिंग प्रदान करना शुरू किया। बास्केटबाॅल के लिए लम्बे कद के बच्चों की आवश्यकता होती है तो उन्होंने हाईट हॉट प्रोग्राम चलाकर लम्बे बच्चों की खोजकर तराशने का कार्य प्रारंभ किया। इन बच्चों को स्वयं के खर्च पर रखकर उन्हें ट्रेनिंग प्रदान की। साई में शुरुवात में आवासीय योजना में बास्केटबाॅल के 07 बालक खिलाडी थे जिसमें से एक टीम भी नही बन पाती थी। इसके पश्चात उन्होंने प्रतिष्ठित स्कूल युगांतर पब्लिक स्कूल राजनांदगांव के संचालक से मुलाकात करके वहां वनांचल एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों एवं एवं विभिन्न जिलों में रॉ टेलेंटेड खिलाड़ियों की खोजबीन शुरू की। एवं इन रॉ खिलाड़ियों को युगांतर पब्लिक स्कूल राजनांदगांव के हॉस्टल एवं स्वयं के घर पर रखकर बास्केटबॉल की ट्रेनिंग देना प्रारंभ किया। राजेश्वर राव द्वारा प्रदान की गई उच्च स्तरीय ट्रेनिंग का ही नतीजा है कि बास्केटबाॅल खेल में राजनांदगांव के खिलाड़ियों एवं टीमों ने कभी मुडकर नहीं देखा। छत्तीसगढ़ बनने के पश्चात राजनांदगांव के बास्केटबाॅल खिलाड़ियों ने पूर्व में दुर्ग जोन तत्पश्चात राजनांदगांव जोन एवं पूनः दुर्ग संभाग बनने के पश्चात मिनी, जुनियर एवं सिनियर सभी राज्य स्तरीय शालेय बास्केटबाॅल प्रतियोगिता में लगातार स्वर्ण पदक प्राप्त करने का गौरव प्राप्त किया एवं विभिन्न सी बी एस ई क्लस्टर एवं नेशनल बास्केटबॉल प्रतियोगिता मे स्वर्ण एवं रजत प्राप्त किया। विगत कई वर्षों से युगांतर पब्लिक स्कूल राजनांदगांव की टीम ने बास्केटबाॅल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है। राजनांदगांव के बालक बालिका बास्केटबाॅल खिलाड़ियों ने ना सिर्फ राज्य स्तरीय बल्कि विभिन्न राष्ट्रीय बास्केटबाॅल प्रतियोगिता में में देश में दबदबा कायम रखते हुए स्वर्ण रजत एवं कांस्य पदक प्राप्त किये साथ ही विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिताओं में भी श्री राजेश्वर राव के द्वारा प्रशिक्षित खिलाड़ियों ने विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व किया। राजनांदगांव में दिल्ली पब्लिक स्कूल की स्थापना के पश्चात श्री राव ने उनके संचालकों से भी मिलकर इस संबध में चर्चा की और उस स्कूल में भी इसी प्रकार के खिलाड़ियों को चयनीत कर उन्हें ट्रेनिंग देना प्रारंभ किया। इस प्रकार अब राजनांदगांव में साई के खिलाडी, युगांतर पब्लिक स्कूल के खिलाड़ी तथा दिल्ली पब्लिक स्कूल के खिलाड़ियों को निःशुल्क ट्रेनिंग प्रदान कर देश में बास्केटबॉल खेल में राजनांदगांव एवं छत्तीसगढ़ का दबदबा कायम किया एवं हॉकी की नर्सरी राजनांदगांव में बास्केटबाॅल की नर्सरी भी स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इसके पश्चात 2013 से उन्होंने एवं उनकी पत्नी कालवा राधा राव ने मिलकर विभिन्न नक्सल प्रभावित क्षेत्रों एवं वनांचल के आदिवासी बालिकाओं एवं अन्य गरीब तबकों की बालिकाओं में से रॉ टेलेंट को खोजकर तराशने का कार्य करना भी प्रारंभ किया और उन खिलाड़ियों को राज्य स्तरीय, राष्ट्रीय बास्केटबाॅल प्रतियोगिता में सहभागिता करा कर स्वर्ण रजत एवं कांस्य पदक दिलाया बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता में भी उन्हें पहुंचाकर वनांचल के रॉ टेलेंटेड खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया। एवं इन खिलाड़ियों के जीवन स्तर में बदलाव लाने का प्रयास किया।
इनके द्वारा प्रशिक्षित कई बालक बालिका खिलाड़ियों ने ना सिर्फ राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सहभागिता करायी बल्कि इनके द्वारा प्रशिक्षित कई खिलाड़ियों ने विभिन्न शासकीय संस्थानों में खेल कोटे से नौकरी भी पायी है इनमें से शांति खाखा, शबनम एक्का, निशा कश्यप, किरण यादव, प्रियंका अंबादे, मंदा मेश्राम, किरण प्रजापति, संध्या आर्य, राधा सोनी, विनिता शर्मा, रजत श्रीवास्तव, श्रवण बिश्नोई, मनोज सिंह, लुमेंद्र साहु, दोवल्लभी साहु, आशुतोष कुमार सिंह, राहुल रॉय, मौषम सिंह, नुपूर गोहिल, प्रिया गोस्वामी, वैशाली सिंह इत्यादि ऐसे कई खिलाड़ी हैं जिन्हे शासकीय विभागों में नौकरी दिलवाने में श्री राव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इनकी जिंदगी बना कर इनके जीवन के स्तर में परिवर्तन लाया हैं।
श्री राजेश्वर राव के प्रयासों का ही परिणाम है कि देश में राजनांदगांव एकमात्र जगह है जहाँ एक ही परिसर 08 बास्केटबॉल मैदान है और राजनांदगांव में उनके प्रयासों से 20 अधिक बास्केटबाॅल मैदान बनाये गयें है।
जब वे राजनांदगांव में पदस्थ हुए थे उस समय राजनांदगांव में सिर्फ एक टुटा फुटा मैदान दिग्विजय स्टेडियम में था। बास्केटबॉल खेल का इतना डेवलपमेंट देश में कहीं नहीं हुआ जितना राजनांदगांव में हुआ है।

उन्होंने अपनी पत्नी राधा राव के साथ मिलकर राजनांदगांव एवं छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों एवं वनांचल के रॉ टेलेंट को खोजकर तराशने का कार्य जिस प्रकार किया है उतना देश में किसी ने भी नहीं किया है। रॉ टेलेंट को खोजने के कार्य में उन्हे सरगुजा जिला बास्केटबाॅल संघ के सचिव राजेश प्रताप सिंह, श्री बाला जी स्कूल के श्री उमेश सिंह ठाकुर एवं विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों का भरपुर सहयोग मिला।
इन सभी के सहयोग से इन खिलाड़ियों को सर्व प्रथम उनके जिले में जाकर विभिन्न टेस्ट के माध्यम से इन खिलाड़ियों को चयनीत किया जाता है एवं उन्हें राजनांदगांव लाकर 15 दिन का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है और उक्त केम्प के पश्चात उनमें से सर्वश्रेष्ठ चयनीत खिलाड़ियों को युगांतर पब्लिक स्कूल राजनांदगांव, दिल्ली पब्लिक स्कूल राजनांदगांव एवं स्वयं के घर में रखा जाता था। स्कूल में रहने वाले खिलाड़ियों को समस्त व्यय स्कूल द्वारा वहन किया जाता है इन्हें ट्रेनिंग साई ट्रेनिंग सेंटर राजनांदगांव में निःशुल्क प्रदान की गई। इन खिलाड़ियों को साई के नार्मस पूर्ण करने पर साई ट्रेनिंग सेंटर राजनांदगांव में प्रवेश दिलाया जाता है कुछ टेलेंटेड खिलाड़ियों को साई मे सिधे प्रवेश दिलाया गया है।
श्री कालवा राजेश्वर राव द्वारा उनकी पत्नी कालवा राधा राव के साथ मिलकर खेल के द्वारा समाज सेवा का बीड़ा उठाकर कार्य किया जा रहा है।
वनांचल से चयनीत खिलाड़ियों में से सुलोचना तिग्गा, शबनम एक्का, अनुपा तिर्की, बबिता तिग्गा, निशा कश्यप, दिपशिखा एक्का, लक्षंतिन नेताम, रमोली नेताम, प्रति मिंज, अल्फा मिंज, पूर्णिमा मंडावी, अदिति कोडापे, अंजली कोडापे, मोनी अडला इत्यादि आदिवासी बहुल इलाके से कई रॉ खिलाड़ियों को चयनीत कर टेलेंटेड खिलाड़ियों को चयनीत कर उन्हें ट्रेनिंग प्रदान किया गया और इन सभी खिलाड़ियों ने विभिन्न राज्य स्तरीय, राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक प्राप्त करने एवं अंतर्राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता में सहभागिता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इनके जीवन को एक नया आयाम दिलाने में मदद की। वर्तमान में भी राजनांदगांव के नक्सल प्रभावित क्षेत्र जाब के कई खिलाड़ियों को युगांतर पब्लिक स्कूल राजनांदगांव एवं दिल्ली पब्लिक स्कूल राजनांदगांव में रखकर प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

साई ट्रेनिंग सेंटर राजनांदगांव के अंतरराष्ट्रीय बास्केटबाॅल प्रशिक्षक कालवा राजेश्वर राव के नाम की उपलब्धियां है:-
वे बास्केटबॉल खेल के हाई परफार्मेंस डायरेक्टर है इसके पूर्व वे हाई परफार्मेंस मेनेजर, खेलो इंड़िया की टेलेंट आइडेंटिफिकेशन एंड डेवलपमेंट समिति के सदस्य है, वे खेलों इंडिया के पश्चिमी क्षेत्र के राज्यों के भी टेलेंट आइडेंटिफिकेशन कमेटी के सदस्य रहे हैं, उन्होंने बुडापेस्ट हंगरी, इटली से कोचिंग का एडवांस कोर्स किया है, वे एन बी ए इंड़िया की टेलेंट सर्च कमेटी के सदस्य भी है,
श्री राजेश्वर राव वर्तमान में एशियन गेम्स मे भाग लेने जाने वाली भारतीय महिला बास्केटबाॅल टीम के प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षक है।
वे अलग अलग समय में सिनियर भारतीय मेंस टीम के केम्प में कोच, जुनियर महिला टीम के कोच, साबा क्वालिफायर जुनियर बास्केटबाॅल प्रतियोगिता में भारतीय जुनियर टीम के कोच एवं स्वर्ण पदक, भारतीय युवा बालक बालिका टीम के केम्प के हेड कोच, सब जुनियर भारतीय बास्केटबाॅल टीम के केम्प में हेड कोच, एशियन बास्केटबाॅल प्रतियोगिता में भारतीय महिला स्कूल टीम के कोच एवं लिमोजेस फ्रांस, क्रोएशिया, बेलगरेड सर्बिया, पेरिस फ्रांस में आयोजित विभिन्न विश्व स्कूल बास्केटबॉल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाली समस्त टीमों के कोच रहे है।

श्री कालवा राजेश्वर राव की अथक मेहनत काही परिणाम है कि राजनांदगांव को देश में बास्केटबॉल की नर्सरी के रूप में जाना जाता है।

उनकी एवं उनकी पत्नी कालवा राधा राव की मेहनत का ही नतीजा है कि राजनांदगांव के सैकड़ों बास्केटबाॅल खिलाड़ियों ने विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक प्राप्त किये हैं। इसके अतिरिक्त 75 से अधिक खिलाड़ियों ने र
विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया है। और कई खिलाड़ियों ने विभिन्न सरकारी संस्थाओं में खेल कोटे से नौकरी पाई है।

कालवा राजेश्वर राव की मेहनत का ही नतीजा है कि राजनांदगांव का साई का सेंटर देश का बास्केटबॉल का सर्वश्रेष्ठ सेंटर है
देश में वर्तमान में बास्केटबाॅल खेल में खेलों इंडिया की कुल 09 एकेड़मी है उनमें से खेलों इंडिया की दो बास्केटबाॅल एकेड़मी राजनांदगांव में स्वीकृत हुई है। यह राजनांदगांव ही नही छत्तीसगढ़ के लिए भी बहुत गर्व का विषय है।
इनकी मेहनत का ही परिणाम है कि राजनांदगांव बास्केटबाॅल के हब के रूप स्थापित किया है।

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छत्तीसगढ़

जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का शुभारंभ, 63 हजार से अधिक लोगों की होगी घर-घर जांच

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खैरागढ़-छुईखदान-गंडई। प्रदेशव्यापी मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के अंतर्गत जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में आज 15 जून को अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर श्री इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रेम कुमार पटेल ने स्वास्थ्य विभाग के सर्वे दलों को मलेरिया जांच किट प्रदान कर अभियान की शुरुआत की।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष शर्मा ने बताया कि 15 जून से 14 जुलाई तक संचालित होने वाले इस विशेष अभियान के तहत जिले के 116 ग्रामों में स्थित 12,739 परिवारों के लगभग 63,747 व्यक्तियों का घर-घर जाकर मलेरिया सर्वेक्षण एवं जांच की जाएगी। अभियान के दौरान बुखार अथवा मलेरिया के लक्षण वाले व्यक्तियों की तत्काल जांच की जाएगी तथा संदिग्ध व्यक्तियों के रक्त नमूने लेकर परीक्षण किया जाएगा।

जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विवेक बिसेन ने बताया कि जांच में मलेरिया पॉजिटिव पाए जाने वाले सभी मरीजों को तत्काल निःशुल्क दवा उपलब्ध कराकर उपचार प्रारंभ किया जाएगा। मरीज की स्थिति एवं रोग की गंभीरता के अनुसार आवश्यक होने पर उसे निकटस्थ स्वास्थ्य केंद्र अथवा चिकित्सालय में भर्ती कर समुचित उपचार भी प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समय पर जांच एवं उपचार से मलेरिया के गंभीर दुष्प्रभावों को रोका जा सकता है तथा संक्रमण के प्रसार पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

अभियान का मुख्य उद्देश्य मलेरिया रोगियों की शीघ्र पहचान, समय पर उपचार एवं संक्रमण के प्रसार को रोकना है। साथ ही ग्रामीणों को मच्छरजनित रोगों से बचाव, मच्छरदानी के नियमित उपयोग, स्वच्छता एवं जलभराव रोकने के उपायों के संबंध में जागरूक किया जाएगा।

कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने जिलेवासियों से अभियान में सहयोग करने तथा सर्वे दलों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की, ताकि जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई को मलेरिया मुक्त बनाने के लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त किया जा सके।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, मलेरिया कार्यक्रम से जुड़े अधिकारी, पर्यवेक्षक एवं मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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छत्तीसगढ़

तंबाकू नियंत्रण, पल्स पोलियो एवं मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान की तैयारियों की कलेक्टर ने की समीक्षा

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खैरागढ़। कलेक्टर एवं जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल की अध्यक्षता में मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी), राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस (पल्स पोलियो अभियान) तथा मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के अंतर्गत जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में तीनों महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रमों की तैयारियों एवं प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिले में संचालित जनजागरूकता, प्रवर्तन एवं तंबाकू मुक्त वातावरण निर्माण संबंधी गतिविधियों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध, तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन एवं प्रचार पर प्रतिबंध तथा 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक संबंधी प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन तथा नियमित निरीक्षण एवं चालानी कार्रवाई करने पर विशेष जोर दिया।
कलेक्टर श्री चंद्रवाल ने चयनित ग्राम पंचायतों में जनप्रतिनिधियों, महिला स्व-सहायता समूहों, शिक्षकों, युवाओं तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की सहभागिता से तंबाकू मुक्त वातावरण विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्राम स्तर पर शपथ कार्यक्रम, जनजागरूकता अभियान, चेतावनी बोर्ड स्थापना तथा तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता पर निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता बताई, ताकि चयनित ग्राम पंचायतों को आदर्श तंबाकू मुक्त ग्राम के रूप में विकसित किया जा सके।
बैठक में मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के 14 वें चरण की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ समय-सीमा में शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के निर्देश दिए।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विवेक बिसेन ने बताया कि अभियान जिले के 116 ग्रामों में संचालित किया जाएगा, जिसमें लगभग 64 हजार आबादी को शामिल किया गया है। अभियान के सफल संचालन के लिए 216 सर्वे दल एवं 12 सुपरवाइजर नियुक्त किए गए हैं। प्रत्येक दल में आरएचओ (महिला/पुरुष) अथवा सीएचओ के साथ एक मितानिन को शामिल किया गया है।
अभियान के दौरान घर-घर पहुंचकर आरडी किट के माध्यम से मलेरिया की जांच की जाएगी। मलेरिया पॉजिटिव मरीजों का तत्काल उपचार सुनिश्चित करने के साथ उपचार पूर्ण होने के बाद फॉलोअप स्लाइड भी तैयार की जाएगी। इसके अलावा सोर्स नियंत्रण गतिविधियां, मच्छरदानी के उपयोग के प्रति जागरूकता एवं जनसंपर्क अभियान भी चलाए जाएंगे। सभी चयनित ग्रामों में मितानिनों द्वारा रैलियां निकाली जाएंगी तथा प्रतिदिन शाम 7 बजे सीटी एवं घंटी बजाकर मच्छरदानी उपयोग के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। दीवार लेखन, पोस्टर एवं बैनर के माध्यम से भी व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
बैठक में राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस (पल्स पोलियो अभियान) की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। यह अभियान 28 जून से 30 जून 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिसके अंतर्गत 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी। अभियान के प्रथम दिन 28 जून को निर्धारित बूथों पर बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाई जाएगी, जबकि 29 एवं 30 जून को स्वास्थ्य दल घर-घर पहुंचकर बच्चों को दवा पिलाएंगे। कलेक्टर ने अभियान के प्रभावी संचालन के लिए सूक्ष्म कार्ययोजना, प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं आवश्यक संसाधनों की समीक्षा करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग को समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश दिए।
बैठक में जिला पंचायत सीईओ प्रेमकुमार पटेल, अपर कलेक्टर सुरेन्द्र ठाकुर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष शर्मा, जिला कार्यक्रम प्रबंधक सोनल धु्रव, जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विवेक बिसेन, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. बोधन परते, वीबीडी सुपरवाइजर विवेक मेश्राम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

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छत्तीसगढ़

बिरसा मुंडा जयंती पर युवाओं को मिला समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का संदेश

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रायपुर। महान स्वतंत्रता सेनानी और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर मंगलवार को ऑल वॉलंटरी एसोसिएशन फाउंडेशन द्वारा विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में युवाओं और आदिवासी समाज से भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों को अपनाकर समाज व राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के निदेशक डॉ. हेमशंकर जेठमल साहू ने की। शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर संस्था के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएं, युवा एवं विभिन्न आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

डॉ. साहू ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने अपने जीवन में शोषण और अन्याय के खिलाफ संघर्ष करते हुए आदिवासी समाज को नई दिशा दी। उन्होंने कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनका जीवन साहस, आत्मसम्मान और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

उन्होंने युवाओं से शिक्षा, संगठन और आत्मविश्वास के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया। कहा कि युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और यदि वह सही दिशा में आगे बढ़े तो समाज में व्यापक परिवर्तन संभव है।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज में जागरूकता फैलाने, सामाजिक कुरीतियों को दूर करने और लोगों को उनके अधिकारों के प्रति सजग बनाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके नेतृत्व में चला जनआंदोलन आज भी सामाजिक न्याय और स्वाभिमान की प्रेरणा देता है।

इस दौरान संस्था के सदस्यों ने आदिवासी समाज के उत्थान, शिक्षा के प्रसार, युवाओं के कौशल विकास और सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। संस्था ने भविष्य में भी भगवान बिरसा मुंडा के विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता अभियान और संगोष्ठियों के आयोजन की घोषणा की।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने भगवान बिरसा मुंडा के बताए मार्ग पर चलने तथा समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कार्य करने की शपथ ली। साथ ही उनके विचारों और योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प भी दोहराया।

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