छत्तीसगढ़
*अंतरराष्ट्रीय बास्केटबाॅल प्रशिक्षक कालवा राजेश्वर राव ने वनांचल एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के रॉ टेलेंटेड बालिकाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया।*
राजनांदगांव को बास्केटबाॅल की नर्सरी बनाने में अहम भूमिका
एक ही स्थान पर 08 बास्केटबाॅल कोर्ट सहित शहर में 20 से अधिक कोर्ट बनवाने में अहम भूमिका।
राजनांदगांव में 2001 में साई ट्रेनिंग सेंटर राजनांदगांव की स्थापना की गई उस समय यहाँ साई का यह सेंटर हॉकी, कई आवासीय योजना एवं बास्केटबॉल एवं व्हॉलीबॉल की डे बोर्डिंग योजना संचालित थी। 2001 में यह केंद्र मुख्यतः हॉकी के लिए ही खोला गया था। इसके लिए स्थानीय दिग्विजय स्टेडियम में ग्रासी हॉकी मैदान एवं टुटा फुटा बास्केटबॉल मैदान उपलब्ध था। वालीबॉल के खिलाडी स्टेट स्कूल के मैदान पर अभ्यास करते थे।
मार्च 2001 में साई ट्रेनिंग सेंटर राजनांदगांव में बास्केटबाॅल प्रशिक्षक के तौर पर कालवा राजेश्वर राव की पोस्टिंग हुई। उस समय यहाँ बास्केटबॉल ना के बराबर था।
उन्होंने शूरूवाती समय में विभिन्न स्कूलों से संपर्क कर अलग अलग स्कूलों में जाकर रॉ टेलेंटेड बालक बालिकाओं को को चयनीत कर उनको सांईटिफिक ट्रेनिंग प्रदान करना शुरू किया। बास्केटबाॅल के लिए लम्बे कद के बच्चों की आवश्यकता होती है तो उन्होंने हाईट हॉट प्रोग्राम चलाकर लम्बे बच्चों की खोजकर तराशने का कार्य प्रारंभ किया। इन बच्चों को स्वयं के खर्च पर रखकर उन्हें ट्रेनिंग प्रदान की। साई में शुरुवात में आवासीय योजना में बास्केटबाॅल के 07 बालक खिलाडी थे जिसमें से एक टीम भी नही बन पाती थी। इसके पश्चात उन्होंने प्रतिष्ठित स्कूल युगांतर पब्लिक स्कूल राजनांदगांव के संचालक से मुलाकात करके वहां वनांचल एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों एवं एवं विभिन्न जिलों में रॉ टेलेंटेड खिलाड़ियों की खोजबीन शुरू की। एवं इन रॉ खिलाड़ियों को युगांतर पब्लिक स्कूल राजनांदगांव के हॉस्टल एवं स्वयं के घर पर रखकर बास्केटबॉल की ट्रेनिंग देना प्रारंभ किया। राजेश्वर राव द्वारा प्रदान की गई उच्च स्तरीय ट्रेनिंग का ही नतीजा है कि बास्केटबाॅल खेल में राजनांदगांव के खिलाड़ियों एवं टीमों ने कभी मुडकर नहीं देखा। छत्तीसगढ़ बनने के पश्चात राजनांदगांव के बास्केटबाॅल खिलाड़ियों ने पूर्व में दुर्ग जोन तत्पश्चात राजनांदगांव जोन एवं पूनः दुर्ग संभाग बनने के पश्चात मिनी, जुनियर एवं सिनियर सभी राज्य स्तरीय शालेय बास्केटबाॅल प्रतियोगिता में लगातार स्वर्ण पदक प्राप्त करने का गौरव प्राप्त किया एवं विभिन्न सी बी एस ई क्लस्टर एवं नेशनल बास्केटबॉल प्रतियोगिता मे स्वर्ण एवं रजत प्राप्त किया। विगत कई वर्षों से युगांतर पब्लिक स्कूल राजनांदगांव की टीम ने बास्केटबाॅल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है। राजनांदगांव के बालक बालिका बास्केटबाॅल खिलाड़ियों ने ना सिर्फ राज्य स्तरीय बल्कि विभिन्न राष्ट्रीय बास्केटबाॅल प्रतियोगिता में में देश में दबदबा कायम रखते हुए स्वर्ण रजत एवं कांस्य पदक प्राप्त किये साथ ही विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिताओं में भी श्री राजेश्वर राव के द्वारा प्रशिक्षित खिलाड़ियों ने विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व किया। राजनांदगांव में दिल्ली पब्लिक स्कूल की स्थापना के पश्चात श्री राव ने उनके संचालकों से भी मिलकर इस संबध में चर्चा की और उस स्कूल में भी इसी प्रकार के खिलाड़ियों को चयनीत कर उन्हें ट्रेनिंग देना प्रारंभ किया। इस प्रकार अब राजनांदगांव में साई के खिलाडी, युगांतर पब्लिक स्कूल के खिलाड़ी तथा दिल्ली पब्लिक स्कूल के खिलाड़ियों को निःशुल्क ट्रेनिंग प्रदान कर देश में बास्केटबॉल खेल में राजनांदगांव एवं छत्तीसगढ़ का दबदबा कायम किया एवं हॉकी की नर्सरी राजनांदगांव में बास्केटबाॅल की नर्सरी भी स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इसके पश्चात 2013 से उन्होंने एवं उनकी पत्नी कालवा राधा राव ने मिलकर विभिन्न नक्सल प्रभावित क्षेत्रों एवं वनांचल के आदिवासी बालिकाओं एवं अन्य गरीब तबकों की बालिकाओं में से रॉ टेलेंट को खोजकर तराशने का कार्य करना भी प्रारंभ किया और उन खिलाड़ियों को राज्य स्तरीय, राष्ट्रीय बास्केटबाॅल प्रतियोगिता में सहभागिता करा कर स्वर्ण रजत एवं कांस्य पदक दिलाया बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता में भी उन्हें पहुंचाकर वनांचल के रॉ टेलेंटेड खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया। एवं इन खिलाड़ियों के जीवन स्तर में बदलाव लाने का प्रयास किया।
इनके द्वारा प्रशिक्षित कई बालक बालिका खिलाड़ियों ने ना सिर्फ राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सहभागिता करायी बल्कि इनके द्वारा प्रशिक्षित कई खिलाड़ियों ने विभिन्न शासकीय संस्थानों में खेल कोटे से नौकरी भी पायी है इनमें से शांति खाखा, शबनम एक्का, निशा कश्यप, किरण यादव, प्रियंका अंबादे, मंदा मेश्राम, किरण प्रजापति, संध्या आर्य, राधा सोनी, विनिता शर्मा, रजत श्रीवास्तव, श्रवण बिश्नोई, मनोज सिंह, लुमेंद्र साहु, दोवल्लभी साहु, आशुतोष कुमार सिंह, राहुल रॉय, मौषम सिंह, नुपूर गोहिल, प्रिया गोस्वामी, वैशाली सिंह इत्यादि ऐसे कई खिलाड़ी हैं जिन्हे शासकीय विभागों में नौकरी दिलवाने में श्री राव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इनकी जिंदगी बना कर इनके जीवन के स्तर में परिवर्तन लाया हैं।
श्री राजेश्वर राव के प्रयासों का ही परिणाम है कि देश में राजनांदगांव एकमात्र जगह है जहाँ एक ही परिसर 08 बास्केटबॉल मैदान है और राजनांदगांव में उनके प्रयासों से 20 अधिक बास्केटबाॅल मैदान बनाये गयें है।
जब वे राजनांदगांव में पदस्थ हुए थे उस समय राजनांदगांव में सिर्फ एक टुटा फुटा मैदान दिग्विजय स्टेडियम में था। बास्केटबॉल खेल का इतना डेवलपमेंट देश में कहीं नहीं हुआ जितना राजनांदगांव में हुआ है।
उन्होंने अपनी पत्नी राधा राव के साथ मिलकर राजनांदगांव एवं छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों एवं वनांचल के रॉ टेलेंट को खोजकर तराशने का कार्य जिस प्रकार किया है उतना देश में किसी ने भी नहीं किया है। रॉ टेलेंट को खोजने के कार्य में उन्हे सरगुजा जिला बास्केटबाॅल संघ के सचिव राजेश प्रताप सिंह, श्री बाला जी स्कूल के श्री उमेश सिंह ठाकुर एवं विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों का भरपुर सहयोग मिला।
इन सभी के सहयोग से इन खिलाड़ियों को सर्व प्रथम उनके जिले में जाकर विभिन्न टेस्ट के माध्यम से इन खिलाड़ियों को चयनीत किया जाता है एवं उन्हें राजनांदगांव लाकर 15 दिन का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है और उक्त केम्प के पश्चात उनमें से सर्वश्रेष्ठ चयनीत खिलाड़ियों को युगांतर पब्लिक स्कूल राजनांदगांव, दिल्ली पब्लिक स्कूल राजनांदगांव एवं स्वयं के घर में रखा जाता था। स्कूल में रहने वाले खिलाड़ियों को समस्त व्यय स्कूल द्वारा वहन किया जाता है इन्हें ट्रेनिंग साई ट्रेनिंग सेंटर राजनांदगांव में निःशुल्क प्रदान की गई। इन खिलाड़ियों को साई के नार्मस पूर्ण करने पर साई ट्रेनिंग सेंटर राजनांदगांव में प्रवेश दिलाया जाता है कुछ टेलेंटेड खिलाड़ियों को साई मे सिधे प्रवेश दिलाया गया है।
श्री कालवा राजेश्वर राव द्वारा उनकी पत्नी कालवा राधा राव के साथ मिलकर खेल के द्वारा समाज सेवा का बीड़ा उठाकर कार्य किया जा रहा है।
वनांचल से चयनीत खिलाड़ियों में से सुलोचना तिग्गा, शबनम एक्का, अनुपा तिर्की, बबिता तिग्गा, निशा कश्यप, दिपशिखा एक्का, लक्षंतिन नेताम, रमोली नेताम, प्रति मिंज, अल्फा मिंज, पूर्णिमा मंडावी, अदिति कोडापे, अंजली कोडापे, मोनी अडला इत्यादि आदिवासी बहुल इलाके से कई रॉ खिलाड़ियों को चयनीत कर टेलेंटेड खिलाड़ियों को चयनीत कर उन्हें ट्रेनिंग प्रदान किया गया और इन सभी खिलाड़ियों ने विभिन्न राज्य स्तरीय, राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक प्राप्त करने एवं अंतर्राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता में सहभागिता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इनके जीवन को एक नया आयाम दिलाने में मदद की। वर्तमान में भी राजनांदगांव के नक्सल प्रभावित क्षेत्र जाब के कई खिलाड़ियों को युगांतर पब्लिक स्कूल राजनांदगांव एवं दिल्ली पब्लिक स्कूल राजनांदगांव में रखकर प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
साई ट्रेनिंग सेंटर राजनांदगांव के अंतरराष्ट्रीय बास्केटबाॅल प्रशिक्षक कालवा राजेश्वर राव के नाम की उपलब्धियां है:-
वे बास्केटबॉल खेल के हाई परफार्मेंस डायरेक्टर है इसके पूर्व वे हाई परफार्मेंस मेनेजर, खेलो इंड़िया की टेलेंट आइडेंटिफिकेशन एंड डेवलपमेंट समिति के सदस्य है, वे खेलों इंडिया के पश्चिमी क्षेत्र के राज्यों के भी टेलेंट आइडेंटिफिकेशन कमेटी के सदस्य रहे हैं, उन्होंने बुडापेस्ट हंगरी, इटली से कोचिंग का एडवांस कोर्स किया है, वे एन बी ए इंड़िया की टेलेंट सर्च कमेटी के सदस्य भी है,
श्री राजेश्वर राव वर्तमान में एशियन गेम्स मे भाग लेने जाने वाली भारतीय महिला बास्केटबाॅल टीम के प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षक है।
वे अलग अलग समय में सिनियर भारतीय मेंस टीम के केम्प में कोच, जुनियर महिला टीम के कोच, साबा क्वालिफायर जुनियर बास्केटबाॅल प्रतियोगिता में भारतीय जुनियर टीम के कोच एवं स्वर्ण पदक, भारतीय युवा बालक बालिका टीम के केम्प के हेड कोच, सब जुनियर भारतीय बास्केटबाॅल टीम के केम्प में हेड कोच, एशियन बास्केटबाॅल प्रतियोगिता में भारतीय महिला स्कूल टीम के कोच एवं लिमोजेस फ्रांस, क्रोएशिया, बेलगरेड सर्बिया, पेरिस फ्रांस में आयोजित विभिन्न विश्व स्कूल बास्केटबॉल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाली समस्त टीमों के कोच रहे है।
श्री कालवा राजेश्वर राव की अथक मेहनत काही परिणाम है कि राजनांदगांव को देश में बास्केटबॉल की नर्सरी के रूप में जाना जाता है।
उनकी एवं उनकी पत्नी कालवा राधा राव की मेहनत का ही नतीजा है कि राजनांदगांव के सैकड़ों बास्केटबाॅल खिलाड़ियों ने विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक प्राप्त किये हैं। इसके अतिरिक्त 75 से अधिक खिलाड़ियों ने र
विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया है। और कई खिलाड़ियों ने विभिन्न सरकारी संस्थाओं में खेल कोटे से नौकरी पाई है।
कालवा राजेश्वर राव की मेहनत का ही नतीजा है कि राजनांदगांव का साई का सेंटर देश का बास्केटबॉल का सर्वश्रेष्ठ सेंटर है
देश में वर्तमान में बास्केटबाॅल खेल में खेलों इंडिया की कुल 09 एकेड़मी है उनमें से खेलों इंडिया की दो बास्केटबाॅल एकेड़मी राजनांदगांव में स्वीकृत हुई है। यह राजनांदगांव ही नही छत्तीसगढ़ के लिए भी बहुत गर्व का विषय है।
इनकी मेहनत का ही परिणाम है कि राजनांदगांव बास्केटबाॅल के हब के रूप स्थापित किया है।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में पहली बार राज्य स्तरीय विश्व पशु चिकित्सा दिवस का भव्य आयोजन, अम्बिकापुर बना साक्षी : पशु चिकित्सकों को मिला सम्मान, “भोजन एवं स्वास्थ्य के संरक्षक” बताए गए
अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ राज्य के इतिहास में पहली बार विश्व पशु चिकित्सा दिवस का राज्य स्तरीय आयोजन राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय, अजिरमा अम्बिकापुर के सभागार में अभूतपूर्व उत्साह एवं गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। पशुधन विकास विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने प्रदेशभर के पशु चिकित्सकों, पैरा वेट एवं पशुपालकों को एक मंच पर लाकर “वन हेल्थ” की अवधारणा को साकार किया।
मुख्य अतिथि पर्यटन, संस्कृति एवं धार्मिक न्यास मंत्री राजेश अग्रवाल ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “पशु चिकित्सक केवल जानवरों का इलाज नहीं करते, बल्कि मानव स्वास्थ्य की प्रथम रक्षा पंक्ति हैं।” उन्होंने विश्व पशु चिकित्सा दिवस के चार प्रमुख उद्देश्यों पर जोर दिया – पशुओं के स्वास्थ्य और भलाई को बढ़ावा देना, पशु चिकित्सकों के कार्यों की सार्वजनिक सराहना, समाज में पशु संरक्षण के प्रति जागरूकता और पशु चिकित्सा विज्ञान में हो रहे नवीन शोध व नवाचारों को प्रोत्साहन।
कृषि, पशुधन विकास एवं मत्स्य पालन मंत्री रामविचार नेताम ने राजधानी रायपुर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभा को सम्बोधित किया। उन्होंने इस वर्ष 2026 की थीम “पशु चिकित्सक : भोजन एवं स्वास्थ्य के संरक्षक” पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि दूध, अंडा, मांस जैसे पशु उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा की जिम्मेदारी पशु चिकित्सकों के कंधों पर है। “एक स्वस्थ पशु ही सुरक्षित खाद्य श्रृंखला की गारंटी देता है”, उन्होंने जोड़ा। मंत्री ने प्रदेश के समस्त पशु चिकित्सकों को बधाई देते हुए विभागीय योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने का आह्वान किया।
लुण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज ने पशु चिकित्सा के सामाजिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि पशुओं का स्वास्थ्य सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कुपोषण उन्मूलन और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा है। उन्होंने “स्वस्थ पशु, स्वस्थ समाज” के नारे को दोहराया।
पशुधन विकास विभाग के संचालक आई.ए.एस. चन्द्रकांत वर्मा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि विश्व पशु चिकित्सा दिवस का मूल उद्देश्य पशु स्वास्थ्य देखभाल को जनांदोलन बनाना और पशु क्रूरता के विरुद्ध सामाजिक चेतना जागृत करना है। उन्होंने 2026 की थीम के तीनों आयामों – पशु स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और आम जनता के स्वास्थ्य – में पशु चिकित्सकों की भूमिका को निर्णायक बताया।
पशु चिकित्सकों का सम्मान : कार्यक्रम के सबसे भावुक क्षण में छ.ग. राज्य पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ संघ द्वारा प्रदेश में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले पशु चिकित्सकों को उत्कृष्टता प्रमाण पत्र एवं तीन दशक से अधिक सेवा दे चुके वरिष्ठ चिकित्सकों को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर चिकित्सकों की आंखें नम हो गईं।
संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार पटेल ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि “यह दिवस हमें पशुओं के प्रति करुणा और जिम्मेदारी का बोध कराता है। यह हमें याद दिलाता है कि पशुओं का स्वास्थ्य अंततः मनुष्यों के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। विश्व पशु चिकित्सा दिवस केवल सम्मान का दिन नहीं, बल्कि आत्ममंथन का दिन है।”
पुस्तिका विमोचन : समारोह में पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ संघ द्वारा प्रकाशित “पशुधन बटवार – स्वच्छ अऊ सुरक्षित पशु उत्पाद बर पशु चिकित्सा के महती उदिम” पुस्तिका का विमोचन माननीय अतिथियों के करकमलों से किया गया। यह पुस्तिका छत्तीसगढ़ी भाषा में है और पशुपालकों को जैव सुरक्षा व गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के गुर सिखाएगी।
विशिष्ट उपस्थिति : मंच पर महापौर मंजुषा भगत, हस्त शिल्प विकास बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अनिल सिंह मेजर, जिला पंचायत कृषि स्थायी समिति अध्यक्ष दिव्या सिंह सिसोदिया, कृषि मंत्री प्रतिनिधि रविन्द्र तिवारी, सीतापुर विधायक प्रतिनिधि राममणी पैंकरा, पार्षद श्वेता गुप्ता, शरद चन्द्र खरे, कुनाल सिंग सहित सरगुजा संभाग के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
प्रदेशभर से जुटे चिकित्सक : इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में सरगुजा संभाग के पशु चिकित्सकों के साथ-साथ डॉ.हितेन्द्र कुमार सोनी, डॉ.मोहन शेन्डे, डॉ.के.के.वर्मा, डॉ.अभिषेक मिश्रा एवं प्रदेश के कोने-कोने से आए सैकड़ों पशु चिकित्सक, पैरा वेट स्टाफ एवं प्रगतिशील पशुपालकों की महती भूमिका रही। सभागार में उपस्थित हर चेहरे पर गर्व का भाव स्पष्ट दिख रहा था।
छत्तीसगढ़
विश्व मलेरिया दिवस पर जिलेभर में विशेष जागरूकता अभियान, “शून्य मलेरिया – लक्ष्य” की ओर प्रशासन की पहल
खैरागढ़। विश्व मलेरिया दिवस 25 अप्रैल के अवसर पर जिला खैरागढ़–छुईखदान–गंडई के सभी विकासखंडों में व्यापक जागरूकता अभियान, संगोष्ठी और स्वास्थ्य गतिविधियां आयोजित की गईं। अभियान का संचालन कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल के निर्देशन एवं प्रभारी अधिकारी (स्वास्थ्य) सह मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रेम कुमार पटेल के मार्गदर्शन में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष शर्मा और जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विवेक बिसेन ने किया।
ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया रोको रैली के माध्यम से आमजन को मलेरिया से बचाव, समय पर जांच और शीघ्र उपचार के प्रति जागरूक किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि मलेरिया जानलेवा बीमारी है, लेकिन यह पूरी तरह रोकथाम योग्य और उपचार योग्य है। इसके उन्मूलन के लिए समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
इस वर्ष की थीम “Driven to End Malaria: Now We Can. Now We Must” के तहत मलेरिया मुक्त समाज के निर्माण पर जोर दिया गया। संगोष्ठियों में मलेरिया नियंत्रण, रोकथाम, प्रारंभिक पहचान और उपचार संबंधी विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
अभियान के दौरान स्वास्थ्य अमले ने घर-घर बुखार सर्वे किया, संभावित मरीजों की त्वरित जांच (RDT/स्लाइड) की और पॉजिटिव मरीजों का समयबद्ध उपचार सुनिश्चित किया। साथ ही जल जमाव को समाप्त कर मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने हेतु विशेष स्वच्छता अभियान भी चलाया गया।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के बुखार को नजरअंदाज न करें, तुरंत जांच कराएं और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखें। डॉ. आशीष शर्मा ने मच्छरदानी के नियमित उपयोग, साफ-सफाई और जल जमाव रोकने पर विशेष जोर दिया।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विवेक बिसेन ने बताया कि जिले के सभी ग्रामों में ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समितियों तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से समुदाय को मलेरिया से बचाव हेतु निरंतर जागरूक किया जा रहा है। उनका कहना है, “शून्य मलेरिया – स्वस्थ भारत, स्वस्थ केसीजी” का लक्ष्य केवल प्रशासन की कोशिशों से नहीं, बल्कि आमजन की सक्रिय भागीदारी से पूरा होगा।
अभियान के सफल संचालन में खंड चिकित्सा अधिकारी, खंड विस्तार एवं प्रशिक्षण अधिकारी, सेक्टर पर्यवेक्षक, मलेरिया टेक्निकल सुपरवाइजर विवेक मेश्राम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक, मितानिन और ग्रामवासियों का सराहनीय योगदान रहा।
छत्तीसगढ़
नवोदय विद्यालय सुकमा को सीआरपीएफ बटालियन 223 स्थापना दिवस में सम्मान
सुकमा। सीआरपीएफ बटालियन 223 के स्थापना दिवस के अवसर पर नवोदय विद्यालय सुकमा-1 को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। विद्यालय के संगीत शिक्षक वेद प्रकाश मिश्रा एवं छात्रों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया। छात्र-छात्राओं ने बस्तर के पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में सुकमा और कोंटा के विभिन्न बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर, द्वितीय कमांडिंग ऑफिसर और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के परिवारजन मौजूद थे। द्वितीय कमान अधिकारी सुखविंदर सिंह ने शिक्षक वेद प्रकाश मिश्रा और बॉयालाजी शिक्षिका पूजा गौतम को उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए पुरस्कार प्रदान किया। साथ ही कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।
विद्यालय के प्राचार्य संजय कुमार मंडल एवं श्रीमती मिनी मंडल को सामुदायिक सहभागिता और विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कमांडेंट 223 बटालियन नीरज सिंह राठौड़, सहायक कमान अधिकारी सुखविंदर सिंहए और अन्य बटालियन के अधिकारी एवं उनके परिवारजन उपस्थित रहे।
नवोदय परिवार ने सीआरपीएफ 223 बटालियन के सभी जवानों और अधिकारियों का धन्यवाद किया। सहायक कमान अधिकारी सुखविंदर सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने कमांडेंट नीरज सिंह राठौर के मार्गदर्शन में कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।
प्राचार्य संजय कुमार मंडल एवं नवोदय परिवार के सभी शिक्षकों ने कमांडिंग ऑफिसर नीरज सिंह राठौड़ एवं सहायक कमांडिंग ऑफिसर सुखविंदर सिंह एवं सभी जवानों का आभार व्यक्त किया।
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