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बालोद

थाना बालोद परिसर में बालोद पुलिस एवं जिला प्रशासन के द्वारा कानून व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिये माकड्रिल कराया गया

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आज दिनांक 09.02.2022 को श्रीमान पुलिस महानिदेशक महोदय व मुख्य सचिव के द्वारा कानून व्यवस्था के संबंध में वर्चुअल मीटिंग लिया गया जिसमें कि राज्य के सभी जिलो के पुलिस अधीक्षकों को कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित होने पर पुलिस द्वारा किये जाने वाले बलवा ड्रिल अभ्यास कराने आदेश दिया गया , जिसके तारतम्य में पुलिस अधीक्षक बालोद श्री सदानंद कुमार के मार्गदर्शन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमति प्रज्ञा मेश्राम की उपस्थिति में आज दिनांक 09.02.2022 को थाना बालोद परिसर में बालोद पुलिस एवं जिला प्रशासन के द्वारा कानून व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिये माकड्रिल कराया गया जिसे पुलिस की शब्दावली में बलवा ड्रिल भी कहा जाता है । जिसमें राजस्व के अनुविभागीय अधिकारी एवं बालोद पुलिस के सभी राजपत्रित अधिकारी , शहर के थाना प्रभारी , थानो , रक्षित केन्द्र एवं यातायात के पुलिस बल शामिल हुये । माकड्रिल में कानून व्यस्था की स्थिति में अश्रु गैस के उपयोग का भी अभ्यास कराया गया । माकड्रिल पश्चात अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बालोद द्वारा ब्रीफींग की गई । इस माकड्रिल में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्री गंगाधर वाहिले , अनुविभागीय पुलिस अधिकारी श्री प्रतीक चतुर्वेदी , तहसीलदार श्री पी.एल. मण्डावी , तहसीलदार सुश्री चांदनी देवांगन , श्री एस.एस. मौर्य , उप पुलिस अधीक्षक श्री बोनिफर एक्का , रक्षित निरीक्षक श्री मधुसूदन नाग , थाना प्रभारी बालोद श्री मनीष शर्मा , यातायात प्रभारी बालोद श्री नवल किशोर कश्यप , थाना प्रभारी गुण्डरदेही श्री भानुप्रताप साव , थाना प्रभारी देवरी श्री नवीन बोरकर , थाना प्रभारी गरूर श्री डिलेश्वर चन्द्रवंशी एवं जिला बालोद के पुलिस बल उपस्थित रहे।

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बालोद

बौद्धिक संपदा का ज्ञान सभी के लिए है जरूरी : डॉ. मोना पुरोहित

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बालोद। शासकीय घनश्याम सिंह गुप्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बालोद में विधि विभाग द्वारा एक सप्ताह का फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आभाषी मोड में दिनांक 19 फरवरी 2024 से प्रारंभ हुआ। दिनांक 23 फरवरी 2024 को कार्यक्रम का पांचवा दिन था, जिसमें मुख्य वक्ता प्रोफेसर डॉ. मोना पुरोहित (संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष विधि विभाग बरकतउल्ला विश्व विद्यालय) थी। उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकार के उभरते आयाम विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। प्रो. डा. मोना पुरोहित ने अपने व्याख्यान में कहा कि, बौद्धिक संपदा वर्तमान समय का बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है, उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकार को बहुत ही आसान एवं सरल शब्दों में समझाते हुए इसके उभरते बिंदुओं को विस्तार से बताया। उन्होंने कॉपीराइट एक्ट, पेटेंट एक्ट, ट्रेडमार्क एक्ट, ज्योग्राफीकल इंडिकेशन एक्ट पर भी विस्तार से अपने वक्तव्य रखें। उन्होंने शोधार्थियों और प्रतिभागियों से आह्वान किया कि, बौद्धिक संपदा का ज्ञान शोध की प्रासंगिकता को गति देता है। अतः बौद्धिक संपदा का ज्ञान सभी शोधार्थियों के लिए बेहद आवश्यक है। डॉ. पुरोहित द्वारा सभी प्रतिभागियों के प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर दिया गया। इस कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राघवेश पांडेय ने अपने गुरु का स्वागत करते हुए कहा कि, बौद्धिक संपदा अधिकार का ज्ञान सभी के लिए बेहद जरूरी है। साथ ही इस व्याख्यान का लाभ निश्चित ही सभी को मिलेगा। मुख्य वक्ता का स्वागत विधि विभाग की सहायक प्राध्यापिका श्रीमती स्वाति वैष्णव ने किया। अंत में आभार प्रदर्शन डॉ. जेके पटेल ने किया। इस अवसर पर आयोजन समिति के सदस्य प्रो. सीडी मानिकपुरी, अतिथि प्राध्यापक पूनम चंद्र गुप्ता एवं सुब्रत मंडल उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सुश्री पूजा ठाकुर द्वारा बहुत ही आदर्श रूप में किया गया। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने ऑन-लाइन व्याख्यान का लाभ उठाया।

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बालोद

देश की प्रगति के लिए लैंगिक समानता जरूरी : डॉ. शशिकांत त्रिपाठी

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बालोद। शासकीय घनश्याम सिंह गुप्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बालोद के विधि विभाग एवं आईक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वन वीक फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के चौथे दिन, मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. शशिकांत त्रिपाठी, एसोसिएट प्रोफेसर छत्रपति शाहू जी महाराज कानपुर विश्व विद्यालय एवं अटल बिहारी वाजपेई स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज थे। उन्होंने लैंगिक संवेदीकरण विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि, भारत में नारियों की पूजा की जाती है, हमारे धर्म शास्त्रों में भी इसका उल्लेख देखने को मिलता है, लेकिन व्यवहारिक रूप से देखा जाये तो समाज में ऐसा बिल्कुल नहीं है। हमारा प्रयास यही होना चाहिए कि, हम मानव समाज में बदलाव कैसे लाएं कि, समाज भी नारी और पुरुष को एक समान दृष्टि से देखने लगे। वही समाज संसार में प्रगति कर सकता है, जो लैंगिक समानता को प्राथमिकता देता है, किन्तु विडंबना है कि, आज भी लैंगिक भेदभाव जारी है, इसलिए हम सभी को इस मुद्दे पर बात करने की आवश्यकता पड़ रही है, वरना अगर यह प्रचलन में नहीं होता तो इस विषय में बात करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। आज महिलाएं हवाई जहाज उड़ा रही है, बड़े-बड़े जहाज चला रही है, लड़ाकू विमान उड़ा रही है, डॉक्टर है, टीचर है, नर्स है, प्रत्येक क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसलिए आज पुरानी दकियासुनी मान्यताओं को तोड़ते हुए महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर देने की जरूरत है, ताकि वह नई ऊंचाइयों में पहुंचकर अपना खुद का मुकाम बना सके। व्याख्यान के पूर्व कार्यक्रम के संयोजक एवं विधि विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राघवेश पांडे ने उक्त कार्यक्रम को महत्त्वकांक्षी बताते हुए कहा कि, निश्चित ही आज का विषय, समाज के दृष्टिकोण को बदलने में सहायक होंगी और देश के विकास और प्रगति को नया आयाम देगी। लैंगिक असमानता आज की ज्वलंत समस्या है, और इसे समाजिक जागरूकता से ही दूर किया जा सकता है। महाविद्यालय के अतिथि प्राध्यापक पूनम चंद गुप्ता ने व्याख्यान से पूर्व, आज के अतिथि और मुख्य वक्ता डॉ. शशिकांत त्रिपाठी का परिचय कराया। कार्यक्रम का सफल संचालन सुश्री पूजा ठाकुर ने किया और आभार प्रदर्शन सुब्रत मंडल अतिथि प्राध्यापक ने किया। इस अवसर पर आयोजन समिति के सदस्य प्रो. सीडी मानिकपुरी, प्रो. स्वाति वैष्णव सहायक प्राध्यापक विधि, कार्यक्रम के सह संयोजक डॉ. जैनेंद्र कुमार पटेल सहायक प्राध्यापक विधि एवं कार्यक्रम संचालन समिति के सदस्य पूनम चंद गुप्ता ने सक्रिय रूप से अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।

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फैकेल्टी प्रोग्राम से नवाचार को मिलता है बढ़ावा : डॉ. अरुणा पलटा

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बालोद। शासकीय घनश्याम सिंह गुप्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय बालोद में विधि विभाग द्वारा एक सप्ताह का फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आभाषी मोड में दिनांक 19 फरवरी 2024 से प्रारंभ हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हेमचंद यादव विश्व विद्यालय दुर्ग के कुलपति डॉ. अरुणा पलटा, विशिष्ट अतिथि कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप एवं आज के तकनीकी सेशन के मुख्य वक्ता दिल्ली विश्व विद्यालय के प्रध्यापक डॉ. नरेश महिपाल थे। साथ ही कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. जेके खलखो प्राचार्य शासकीय घनश्याम सिंह गुप्त महाविद्यालय बालोद ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए पहले दिन के इस आयोजन में मुख्य अतिथि डॉ. अरुणा पलटा ने इस कार्यक्रम की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए अपने शुभकामना संदेश में कहा कि, वर्तमान समय में शिक्षा के उत्तरोत्तर प्रगति के लिए फैकेल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम से शिक्षकों में एक नई ऊर्जा का संचार होता है और जब बहू विषयी विषयों पर इस प्रकार के कार्यक्रम होते हैं तब विभिन्न विषयों का ज्ञान भी होता है। आगे उन्होंने कहा कि, यह कार्यक्रम सफलता के नये आयाम गढ़ेगी। विशिष्ट अतिथि भूपेंद्र कुलदीप ने कहा कि, यह बड़े ही गौरव का क्षण है कि, हमारे सबसे बड़े महाविद्यालय में यह कार्यक्रम आयोजित हो रहा है, इस कार्यक्रम के द्वारा शिक्षकों को एक नया आयाम मिलेगा और शिक्षकों के व्यक्तिगत विकास में भी यह उतना ही सहायक होगा। आज के विषय विशेषज्ञ डॉ. नरेश महिपाल ने घरेलू हिंसा और न्यायिक सक्रियता पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने घरेलू हिंसा विधि और न्यायपालिका के द्वारा दिए गए निर्णय को सारगर्भित रूप से बताया और प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर दिया। इस कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राधवेश पांडे ने अपने स्वागत भाषण में अवगत कराया कि, यहां पहला अवसर है कि, विधि विभाग द्वारा फैकेल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम महाविद्यालय में आयोजित किया गया है। इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के विधि विभाग की प्राध्यापिका सुश्री पूजा ठाकुर द्वारा बहुत ही आदर्श रूप में किया गया। अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एचएल मानकर द्वारा तथा रिसोर्स पर्सन का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दीपाली राव के द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रो. सीडी मानिकपुरी, प्रो. एलके गवेल, डॉ. जेके पटेल, पूनमचंद गुप्ता, सुब्रत मंडल आदि प्राध्यापक उपस्थित थे।

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