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राजनांदगांव

मां बम्लेश्वरी की जय बोलने से रोकने वाले भाजपा नेता के खिलाफ भड़का लोगों का गुस्सा, जगह-जगह फूंके गए पुतले

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राजनांदगांव। मां बम्लेश्वरी की जय बोलने से रोकने वाले भाजपा नेता के खिलाफ आज डोंगरगढ़ और राजनांदगांव विधानसभा के लोगों ने जमकर विरोध किया है। डोंगरगढ़ विधानसभा के अलग-अलग इलाकों में जहां पर भाजपा नेता विनोद खांडेकर के पुतले फूंके गए हैं, वहीं राजनांदगांव में श्री राष्ट्रीय करणी सेना ने शहर के मानव मंदिर चौक में उनका पुतला फूंका हैण् इस दौरान धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने के लिए भाजपा नेता विनोद खांडेकर के खिलाफ एफआईआर की मांग भी की गई है।
डोंगरगढ़ विधानसभा में भाजपा अनुसूचित जाति की एक बैठक के दौरान भाजपा नेता विनोद खांडेकर ने मां बम्लेश्वरी के जयकारे पर रोक लगाया, जिसके चलते लोगों में काफी आक्रोश पनप रहा है। मामले से जुड़ा वीडियो वायरल होने के बाद अब लोगों में गुस्सा काफी बढ़ गया है।ञ मामले को लेकर के गुरुवार को डोंगरगढ़ विधानसभा के अलग-अलग इलाके में भाजपा नेता विनोद खांडेकर का पुतला फूंका गया है। वहीं राजनांदगांव विधानसभा में श्री राष्ट्रीय करणी सेवा ने मानव मंदिर चौक पर धार्मिक आस्था का केंद्र मां बमलेश्वरी के जयकारे से रोकने के मामले में उनका पुतला दहन किया है।
इस दौरान श्री राष्ट्रीय करणी सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष संजय बहादुर सिंह का कहना है कि जिले में हर समाज और हर वर्ग के लोग मां बम्लेश्वरी के प्रति अपनी आस्था रखते है। वहीं डोंगरगढ़ विधानसभा की पहचान भी मां बम्लेश्वरी मंदिर से ही है, ऐसे में विनोद खांडेकर जैसे नेता माता रानी के जयकारे से परहेज कर रहे हैं, यह कतई हिंदू समाज बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ऐसे प्रत्याशी को दावेदार के रूप में सामने ला रही है, यह भी सोचनीय है और आने वाले समय में जनता और समस्त हिंदू समाज इसका खुला विरोध करेगा।
बता दें कि कुछ दिन पूर्व भाजपा अनुसूचित जाति की एक बैठक डोंगरगढ़ स्थित बौद्ध विहार में रखी गई थी, जहां पर बैठक में उपस्थित नेता मां बम्लेश्वरी के जयकारे से अपने उद्बोधन की शुरुआत कर रहे थे। इस दौरान भाजपा नेता ने उन्हें बीच में ही रोक दिया इसके बाद बैठक में शामिल नेताओं को भी इस बात पर काफी आपत्ति हुई, देखते ही देखते यह वीडियो वायरल हो गया और आम लोगों में इस मामले को लेकर काफी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिलती रही।
विधानसभा चुनाव सिर पर है ऐसी स्थिति में डोंगरगढ़ विधानसभा से भाजपा के नेता विनोद खांडेकर का नाम दावेदार के रूप में सामने आया है। दावेदारों की एक सूची वायरल होने के बाद से भाजपा की किरकिरी हो रही है, वहीं अब वायरल वीडियो का मामला लोगों के सामने आने के बाद अब लोगों में तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है। माना जा रहा है कि वायरल वीडियो के बाद लोगों में खांडेकर के खिलाफ काफी गुस्सा पनप रहा है, ऐसी स्थिति में भाजपा को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। राजनीति से जुड़े लोगों की माने तो इस पूरे मामले में भाजपा की हिंदुत्व वाली छवि को गहरा आघात पहुंचा है, इसके चलते पार्टी की जबरदस्त किरकिरी हो रही है।

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राजनांदगांव

कबीर जयंती पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, सांसद संतोष पांडे और महापौर ने दी शुभकामनाएं

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राजनांदगांव। कबीर जयंती के अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधायक डॉ. रमन सिंह, सांसद संतोष पांडे और महापौर मधुसूदन यादव ने जिलेवासियों को शुभकामनाएं देते हुए संत कबीर के विचारों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संत कबीर केवल महान संत ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक और युग प्रवर्तक भी थे, जिनके विचार आज भी समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।

संयुक्त शुभकामना संदेश में उन्होंने कहा कि संत कबीर ने सत्य, अहिंसा, दया, करुणा, परोपकार और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करते हुए मानवता और समानता पर आधारित समाज की स्थापना का मार्ग दिखाया। उनके दोहे आज भी लोगों, विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।

उन्होंने कहा कि कबीरधाम से लेकर दामाखेड़ा तक उनके अनुयायी आज भी उनके विचारों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। संत कबीर की रचनाओं में कबीर अमृतवाणी विशेष रूप से लोकप्रिय है और उनके दोहे विश्वभर में प्रसिद्ध हैं।

इस अवसर पर निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा, निगम अध्यक्ष टोपेन्द्र सिंह पारस वर्मा, नेता प्रतिपक्ष संतोष पिल्ले, महापौर परिषद के सदस्य, वरिष्ठ एवं कनिष्ठ सभापति, अपील समिति के सदस्य तथा पार्षदों ने भी नागरिकों को कबीर जयंती की शुभकामनाएं दीं। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि संत कबीर ने कभी धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव का समर्थन नहीं किया और उनका जीवन मानवता, सद्भाव और सामाजिक एकता का संदेश देता है। उन्होंने नागरिकों से संत कबीर के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की अपील की।

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राजनांदगांव

365 दिन बिना छुट्टी कर रहे पशुधन विभाग के मैदानी कर्मचारी, साप्ताहिक अवकाश की मांग संघ ने मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन

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राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ पशुधन विकास विभाग के मैदानी अधिकारी-कर्मचारी वर्षों से बिना किसी साप्ताहिक अवकाश के लगातार 365 दिन सेवाएं दे रहे हैं। कर्मचारियों की शारीरिक एवं मानसिक थकान तथा सेवा गुणवत्ता पर पड़ रहे विपरीत प्रभाव को देखते हुए अनुसूचित जाति-जनजाति पशुचिकित्सा अधिकारी संघ ने माननीय मुख्यमंत्री एवं माननीय विधानसभा अध्यक्ष से भेंट कर ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में प्रमुख मांगें:
संघ ने ज्ञापन के माध्यम से विभाग के मैदानी अमले को सप्ताह में एक दिन का अनिवार्य साप्ताहिक अवकाश देने की मांग की है। एवं शासकीय अवकाश के दिनों में भी पशु चिकित्सालय सुबह 8 बजे से 10 बजे तक 2 घंटे के लिए खोले जाएं, जिससे गंभीर बीमार पशुओं को तत्काल उपचार मिल सके।

संघ का पक्ष:
ज्ञापन सौंपते हुए संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. रामचंद्र रामटेके ने कहा, “मैदानी स्तर पर हमारे अधिकारी-कर्मचारी बस्तर के घने जंगलों से लेकर सरगुजा की दुर्गम पहाड़ियों तक टीकाकरण, नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान एवं आपातकालीन उपचार का कार्य करते हैं। वर्षभर बिना किसी साप्ताहिक अवकाश के लगातार कार्य करने से स्टाफ में अत्यधिक शारीरिक एवं मानसिक थकान व्याप्त है। इसका सीधा असर फील्ड में दी जा रही सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।”

संवैधानिक एवं समानता का तर्क:
डॉ. रामटेके ने बताया कि साप्ताहिक अवकाश का प्रावधान भारतीय संविधान में भी उल्लेखित है। राज्य के लगभग सभी विभागों में कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश की सुविधा प्राप्त है। यहां तक कि स्वास्थ्य विभाग जैसे आपातकालीन सेवा वाले विभाग में भी साप्ताहिक अवकाश एवं रोस्टर प्रणाली लागू है। पशुधन विकास विभाग के कर्मचारी भी उसी तर्ज पर मानव संसाधन नीति के तहत अवकाश के हकदार हैं।

अन्य प्रमुख मांगें:
ज्ञापन में संघ ने विभाग में लंबे समय से रिक्त सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी के पदों पर तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी उठाई। इसके अलावा दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के बैकलॉग पदों पर भर्ती प्रक्रिया को भी प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने का आग्रह किया गया, ताकि विभाग को योग्य मानव संसाधन मिल सके और पशुपालकों को बेहतर सेवाएं मिलें।

ज्ञापन प्राप्त कर मुख्यमंत्री ने इस पर शीघ्र निर्णय लेते हुए विभाग को निर्देशित करने का आश्वासन दिया।

ज्ञापन सौंपने के दौरान उपस्थित:
प्रांताध्यक्ष डॉ. रामचंद्र रामटेके, प्रांतीय सचिव डॉ. तरुण रामटेके सहित संघ के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। संघ ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष कर्मचारियों की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लेंगे।

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राजनांदगांव

स्कूलों में गायत्री मंत्र-हनुमान चालीसा, सरकार का फैसला सराहनीय : दीपक सोनी

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राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ शासन के मंत्रिमंडल द्वारा प्रदेश के विद्यालयों में विद्यार्थियों को गायत्री मंत्र एवं हनुमान चालीसा का पाठ कराने संबंधी लिए गए निर्णय का विश्व हिंदू रक्षा संगठन ने जोरदार स्वागत करते हुए इसे भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं संस्कारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी पहल बताया है।
विश्व हिंदू रक्षा संगठन के जिला अध्यक्ष दीपक सोनी ने जारी अपने वक्तव्य में कहा कि यह निर्णय नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं एवं नैतिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण की आधारशिला भी होते हैं। ऐसे में गायत्री मंत्र एवं हनुमान चालीसा जैसे प्रेरणादायी स्त्रोतों का अध्ययन विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोचए राष्ट्रभक्ति एवं नैतिक चेतना का विकास करने में सहायक सिद्ध होगा।
आगे उन्होंने कहा कि, भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन एवं समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर है। नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। राज्य सरकार का यह निर्णय विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
श्री सोनी ने इस निर्णय के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं विशेष रूप से शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू रक्षा संगठन छत्तीसगढ़ शासन के इस निर्णय का पूर्ण समर्थन करता है तथा आशा व्यक्त करता है कि इससे विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं एवं सनातन जीवन मूल्यों के प्रति जागरूकता और सम्मान की भावना और अधिक सुदृढ़ होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल शिक्षा के साथ.साथ संस्कारयुक्त समाज निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा आने वाली पीढ़ियों को भारतीय सभ्यता एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

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