छत्तीसगढ़
केंद्रीय बजट 2026-27 विकसित भारत की दिशा में ठोस और संतुलित कदम : मधुसूदन यादव
राजनांदगांव। नई दिल्ली में प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 को देश के समग्र विकास, सामाजिक न्याय और आर्थिक मजबूती की दिशा में एक दूरदर्शी तथा जनकल्याणकारी बजट बताते हुए महापौर मधुसूदन यादव ने केंद्र सरकार की सराहना की है।
श्री यादव ने कहा कि यह बजट गरीब, किसान, महिला, युवा और मध्यम वर्ग सभी को साथ लेकर चलने वाला बजट है, जो विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने की मजबूत नींव रखता है। बजट में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विशेष प्राथमिकता दी गई है। किसानों की आय बढ़ाने, कृषि अवसंरचना को सुदृढ़ करने, सिंचाई, भंडारण एवं वैल्यू-एडिशन को बढ़ावा देने हेतु किए गए प्रावधान सराहनीय हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर बजट में किए गए प्रावधानों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए श्री यादव ने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमिता, पोषण, स्वास्थ्य एवं कौशल विकास से जुड़े उपाय महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होंगे।
युवाओं और रोजगार के विषय में उन्होंने कहा कि बजट में कौशल विकास, स्टार्टअप्स, तकनीकी शिक्षा, डिजिटल इकोनॉमी और नए रोजगार सृजन पर जो फोकस किया गया है, उससे देश के युवाओं को नए अवसर प्राप्त होंगे। यह बजट युवाओं की आकांक्षाओं के अनुरूप है।
महापौर ने दावा किया है कि बुनियादी ढांचे जैसे सड़क, रेल, आवास, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी में निरंतर निवेश से आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और राज्यों को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
महापौर ने बजट की विशेषताओं को रेखांकित करते हुए कहा है कि सुरक्षा बजट में वृद्धि की गई है, जो स्वदेशी तकनीक और शोध पर खर्च होंगे। उसी प्रकार कैंसर और मधुमेह जैसी जानलेवा बिमारियों की 17 दवाईयों का सस्ता किया जाना, आयुर्वेदिक एम्स की संख्या दो से बढ़ाकर 5 करना स्वास्थ्य सुविधा में वृद्धि का परिचायक है। उल्लेखनीय है कि आयुर्वेद चिकित्सा में भारत अग्रणी देश है, जिसका सीधा लाभ स्वदेशी उत्पादकों को होने के साथ ही रोजगार में वृद्धि होना तयशुदा है। इसके अतिरिक्त रेयर अर्थ के परिष्करण और परिवहन के लिये केरल, तमिलनाडू, उड़ीसा कॉरिडोर को समर्थन देने से से, सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रानिक्स के क्षेत्र में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 लॉच होने से विदेशों पर निर्भरता खत्म होने के साथ ही स्वदेशी छात्रों और प्रतिभाओं को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। प्रत्येक जिले में महिला हॉस्टल की स्थापना एक दूरगामी क्रांतिकारी निर्णय है। उसी प्रकार पर्यटन के क्षेत्र में बजट वद्धि का उद्देश्य विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि करना है, इसके साथ ही खेलो इंडिया में बजट वृद्धि से भविष्य में ओलंपिक खेलों के आयोजन से भारत को विश्व पर्यटन के मानचित्र पर उकेरने का सराहनीय कदम है। 7 हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की स्वीकृति ना सिर्फ आवागमन वरन अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के निवेश में वृद्धि करेगी। इसी प्रकार किसानों के विकास और प्रगति के लिये केसीसी ऋण की सीमा 3 से 5 लाख करना, उसी प्रकार सूखे मेवे के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये नवीन योजनाओं से अन्नदाताओं के ना सिर्फ जीवन स्तर वरन उनकी आय में भी वद्धि होगी।
पूर्व सांसद मधुसूदन यादव ने कहा कि यह बजट वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास को गति देने वाला है, जो आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प को और मजबूत करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं वित्त मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट देश के भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाने वाला है।
छत्तीसगढ़
बिरसा मुंडा जयंती पर युवाओं को मिला समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का संदेश
रायपुर। महान स्वतंत्रता सेनानी और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर मंगलवार को ऑल वॉलंटरी एसोसिएशन फाउंडेशन द्वारा विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में युवाओं और आदिवासी समाज से भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों को अपनाकर समाज व राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के निदेशक डॉ. हेमशंकर जेठमल साहू ने की। शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर संस्था के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएं, युवा एवं विभिन्न आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
डॉ. साहू ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने अपने जीवन में शोषण और अन्याय के खिलाफ संघर्ष करते हुए आदिवासी समाज को नई दिशा दी। उन्होंने कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनका जीवन साहस, आत्मसम्मान और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
उन्होंने युवाओं से शिक्षा, संगठन और आत्मविश्वास के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया। कहा कि युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और यदि वह सही दिशा में आगे बढ़े तो समाज में व्यापक परिवर्तन संभव है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज में जागरूकता फैलाने, सामाजिक कुरीतियों को दूर करने और लोगों को उनके अधिकारों के प्रति सजग बनाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके नेतृत्व में चला जनआंदोलन आज भी सामाजिक न्याय और स्वाभिमान की प्रेरणा देता है।
इस दौरान संस्था के सदस्यों ने आदिवासी समाज के उत्थान, शिक्षा के प्रसार, युवाओं के कौशल विकास और सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। संस्था ने भविष्य में भी भगवान बिरसा मुंडा के विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता अभियान और संगोष्ठियों के आयोजन की घोषणा की।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने भगवान बिरसा मुंडा के बताए मार्ग पर चलने तथा समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कार्य करने की शपथ ली। साथ ही उनके विचारों और योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प भी दोहराया।
छत्तीसगढ़
पहाड़ी गांवों में टूटी माहवारी पर चुप्पी, ‘आओ सहेली चुप्पी तोड़ें’ अभियान से जगी नई उम्मीद
मोहला/मानपुर। वनांचल और पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी माहवारी (पीरियड्स) को लेकर समाज में एक अजीब सी झिझक और चुप्पी देखने को मिलती है। इसी रूढ़िवादिता और चुप्पी को तोड़ने के लिए विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस के अवसर पर मानपुर विकासखंड के सुदूर वनांचल ग्रामों में एक अनूठी और सराहनीय पहल की गई। जन कल्याण सामाजिक संस्थान एवं प्रोजेक्ट बाला के संयुक्त तत्वावधान में आओ सहेली चुप्पी तोड़ें अभियान के अंतर्गत ग्राम बुकमरका, कामखेड़ा, कोराचा एवं चावरगांव में विशेष जागरूकता, संवाद और सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस दौरान समाज में एक सकारात्मक संदेश देते हुए पहली बार पीरियड्स से गुजर रहीं किशोरी बालिकाओं का सम्मान किया गया, जिससे उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास जागा।
पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र में बसे ग्राम बुकमरका में इतिहास में पहली बार ऐसा नजारा देखने को मिला, जहां माहवारी जैसे संवेदनशील विषय पर खुलकर बात करने के लिए महिलाएं, पुरुष और किशोरी बालिकाएं एक साथ शामिल हुईं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य माहवारी को लेकर समाज में व्याप्त शर्म, भ्रांतियों और वर्जनाओं को खत्म कर स्वच्छता व स्वास्थ्य के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करना था।
संवाद के दौरान ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों ने अपनी जमीनी समस्याओं को खुलकर साझा किया। उन्होंने बताया कि गांवों में सेनेटरी पैड की उपलब्धता न होने के कारण मजबूरी में वे पुराने कपड़ों का इस्तेमाल करती थीं। पैड खरीदने के लिए उन्हें 10 से 12 किलोमीटर दूर तक का सफर तय करना पड़ता था, जिससे स्वास्थ्य संबंधी कई बीमारियां और असुविधाएं होती थीं।
ग्रामीण महिलाओं की इस बड़ी समस्या का समाधान करते हुए संस्था द्वारा कार्यक्रम में 120 किशोरी बालिकाओं को रीयूजेबल सेनेटरी पैड मुफ्त वितरित किए गए। पहली बार पर्यावरण के अनुकूल और बार-बार उपयोग में आने वाले पैड पाकर बालिकाओं के चेहरों पर खुशी और सुरक्षा का भाव साफ नजर आया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा माहवारी स्वच्छता, संक्रमण से बचाव और इन रीयूजेबल पैडों के सुरक्षित उपयोग व रख-रखाव की विस्तृत जानकारी दी गई।
वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि माहवारी कोई बीमारी या शर्म की बात नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के जीवन की एक बेहद सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसके प्रति पूरे समाज को अपनी सोच बदलने की जरूरत है।
इस गरिमामयी कार्यक्रम में गांवों के पटेल, मितानिन दीदी, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्य, बड़ी संख्या में ग्रामीणजन और जन कल्याण सामाजिक संस्थान के कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे ग्रामीण अंचलों में माहवारी स्वच्छता को लेकर अलख जगाते रहेंगे और किशोरियों को स्वास्थ्य संसाधन उपलब्ध कराने में लगातार सहयोग करेंगे। यह आयोजन केवल एक दिवसीय कार्यक्रम न बनकर पहाड़ी गांवों की महिलाओं के लिए सम्मान और सशक्तिकरण की एक नई सुबह साबित हुआ।
कोंडागांव
खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ें, सालभर मिलेगी आय : विवेक ठाकुर
रायपुर/कोंडागांव। कृषि क्षेत्र में किसानों की आय को दोगुना करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अब पारंपरिक ढर्रे से बाहर निकलना होगा। किसानों को आधुनिक तकनीक, बहुफसली खेती और बाजार आधारित उत्पादन प्रणाली को अपनाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यह बात राज्यसभा सांसद श्रीमती फूलोदेवी नेताम के प्रतिनिधि विवेक ठाकुर ने किसानों से किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और किसान उत्पादक कंपनियों से जुड़कर सामूहिक रूप से कार्य करने का आह्वान करते हुए कही।
श्री ठाकुर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा छोटे और सीमांत किसानों का है। अकेले खेती करने के कारण इन किसानों को उन्नत बीज, खाद, उर्वरक, सिंचाई के साधन और सबसे बढ़कर उपज का उचित मूल्य (विपणन) पाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यदि यही किसान एफपीओ या किसान उत्पादक कंपनी के रूप में संगठित होकर काम करें, तो उन्हें सरकारी योजनाओं, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बड़े बाजारों तक पहुंच आसानी से मिल सकती है। इससे न सिर्फ खेती की लागत घटेगी, बल्कि उत्पादन और मुनाफे में भी बड़ी वृद्धि होगी।
सांसद प्रतिनिधि ने फसल विविधीकरण पर जोर देते हुए कहा कि किसानों को केवल एक ही फसल (धान) पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन, सब्जी, फल, मक्का और छत्तीसगढ़ के पारंपरिक मिलेट्स जैसे कोदो-कुटकी व अन्य नकदी फसलों की खेती की जानी चाहिए। बहुफसली खेती से जहां एक ओर भूमि की उर्वरा शक्ति सुरक्षित रहती है, वहीं दूसरी ओर किसानों को साल के बार Belonging महीने आय के स्रोत मिलते रहते हैं। उन्होंने प्राकृतिक और जैविक खेती को अपनाने की भी वकालत की।
विवेक ठाकुर ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ FPO के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि किसान उत्पादक कंपनियां किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने, उनके उत्पादों की ब्रांडिंग करने और बिचौलियों से मुक्त कर बेहतर मूल्य दिलाने में सेतु का काम कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योग, प्रसंस्करण इकाइयां (प्रोसेसिंग यूनिट) और वैल्यू एडिशन (मूल्य संवर्धन) गतिविधियों को बढ़ावा देने की सख्त जरूरत है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा होगा। उन्होंने क्षेत्र के युवाओं और महिलाओं को भी कृषि आधारित स्टार्टअप और उद्यमों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
श्री ठाकुर ने अंत में अपील की कि यदि छत्तीसगढ़ के किसान संगठित होकर आधुनिक कृषि मॉडल को अपनाते हैं, तो आने वाले समय में हमारा प्रदेश कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में देश के भीतर एक नई और अनूठी पहचान स्थापित करेगा।
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राजनांदगांव4 years ago
ब्रेकिंग न्यूज़ राजनांदगांव। धारा 144 लागू किसी प्रकार के आयोजन, रैली, सामाजिक तथा अन्य आयोजन प्रतिन्धित
