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छत्तीसगढ़

जनपद पंचायत छुईखदान में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला : नियमों की अनदेखी पर सभापति का तीखा प्रहार, उच्च स्तरीय जांच और निलंबन की मांग तेज

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छुईखदान। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के जनपद पंचायत छुईखदान में वित्तीय प्रशासन और बजट निर्माण प्रक्रिया को लेकर एक गंभीर एवं व्यापक विवाद सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था, वित्तीय अनुशासन और वैधानिक प्रक्रियाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। जनपद पंचायत के सभापति सुधीर गोलछा द्वारा उपसंचालक पंचायत को भेजे गए विस्तृत और कठोर शब्दों में लिखित शिकायत पत्र ने इस पूरे मामले को प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बना दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सभापति ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि जनपद पंचायत छुईखदान में एक अराजपत्रित तृतीय श्रेणी कर्मचारी को न केवल प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में पदस्थ किया गया है, बल्कि उसे नियमों के विपरीत आहरण एवं संवितरण अधिकारी का वित्तीय प्रभार भी सौंप दिया गया है। यह व्यवस्था न केवल छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के विपरीत बताई जा रही है, बल्कि जनपद पंचायत लेखा नियम, 1997 तथा शासन के वित्तीय दिशा-निर्देशों का भी प्रत्यक्ष उल्लंघन मानी जा रही है।
सभापति ने इस पूरे प्रकरण को अधिकार क्षेत्र से परे निर्णय करार देते हुए कहा है कि एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी को इस प्रकार का वित्तीय अधिकार प्रदान करना प्रशासनिक पदानुक्रम और वित्तीय नियंत्रण तंत्र दोनों के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की नियुक्ति और प्रभार सौंपना शासन की स्वीकृत प्रक्रिया को दरकिनार कर मनमाने तरीके से किया गया है, जिससे वित्तीय अनियमितताओं की आशंका और अधिक प्रबल हो जाती है।
मामले को और गंभीर बनाते हुए सभापति ने आरोप लगाया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के वार्षिक बजट अनुमानों को कार्योत्तर स्वीकृति दिलाने के नाम पर सामान्य प्रशासन समिति एवं सामान्य सभा को गुमराह करने का प्रयास किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंचायत राज अधिनियम या संबंधित लेखा नियमों में ऐसी किसी कार्योत्तर स्वीकृति की व्यवस्था का कोई प्रावधान नहीं है। इस प्रकार की कार्यवाही को उन्होंने विधिक दृष्टि से शून्य और प्रशासनिक दृष्टि से भ्रामक बताया है।
इसके अतिरिक्त, वर्ष 2026-27 के वार्षिक बजट अनुमान को लेकर भी गंभीर आपत्तियां सामने आई हैं। सभापति का आरोप है कि बजट का निर्माण बिना किसी विधिसम्मत प्रक्रिया, बिना प्रमाणित और सत्यापित वित्तीय आंकड़ों तथा बिना निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की सहभागिता के किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह न केवल लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण की मूल भावना के विरुद्ध है, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और सहभागी शासन के सिद्धांतों का भी खुला उल्लंघन है।
शिकायत पत्र में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि बजट निर्माण एवं अनुमोदन प्रक्रिया में भ्रामक, अप्रमाणिक तथा संभावित रूप से कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग किया जा रहा हैए जिससे वित्तीय निर्णयों को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। यदि ये आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह न केवल प्रशासनिक दुराचार बल्कि वित्तीय कदाचार, कूटरचना और भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आएंगे, जो भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत दंडनीय अपराध हैं।
सभापति ने अपने पत्र में उपसंचालक पंचायत से अत्यंत स्पष्ट और कठोर शब्दों में मांग की है कि संबंधित कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से आहरण एवं संवितरण अधिकारी के प्रभार से मुक्त किया जाए। साथ ही, वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 की कथित कार्योत्तर स्वीकृति की प्रक्रिया को तत्काल निरस्त किया जाए और वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
उन्होंने यह भी मांग की है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, जिसमें किसी वरिष्ठ अधिकारी अथवा डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में जांच दल गठित किया जाए। जांच में दोष सिद्ध होने पर संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध निलंबन सहित विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारंभ करने की भी मांग की गई है।
सभापति ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि इस गंभीर प्रकरण में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वे बाध्य होकर लोकायुक्त, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो तथा अन्य सक्षम एजेंसियों के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि आवश्यक होने पर वे माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेकर रिट याचिका दायर करेंगे, जिससे इस पूरे मामले की न्यायिक जांच सुनिश्चित हो सके।
इस पूरे घटनाक्रम की प्रतिलिपि पंचायत संचालनालय, नवा रायपुर, आयुक्त दुर्ग संभाग, कलेक्टर खैरागढ़-छुईखदान-गंडई तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भी भेजी गई है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर इस प्रकरण की गंभीरता को रेखांकित किया जा सके और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित हो।
प्रशासनिक एवं राजनीतिक हलकों में इस मामले को अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि यह केवल एक जनपद पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और विधिक प्रक्रियाओं के पालन से जुड़ा व्यापक मुद्दा बन चुका है। यदि समय रहते इस पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो यह मामला राज्य स्तर पर एक बड़े प्रशासनिक विवाद का रूप ले सकता है।
फिलहाल सभी की निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं, जिनसे यह अपेक्षा की जा रही है कि वे इस प्रकरण में निष्पक्षता, पारदर्शिता और विधि सम्मत दृष्टिकोण अपनाते हुए आवश्यक कदम उठाएंगे, ताकि जनहित एवं शासकीय वित्तीय अनुशासन की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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छत्तीसगढ़

‘आदि अमितान’ अभियान : पीएम जनमन यूनिवर्सल हेल्थ स्क्रीनिंग अभियान के तहत घर-घर पहुंच रही स्वास्थ्य सेवाएं

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खैरागढ़। कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रेम कुमार पटेल के निर्देशन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष शर्मा के मार्गदर्शन में छुईखदान विकासखंड नोडल अधिकारी डॉ. मनीष बघेल एवं बीपीएम बृजेश ताम्रकार के नेतृत्व में जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में विशेष पिछड़ी जनजाति (पीव्हीटीजी) बैगा समुदाय के लिए संचालित आदि अमितान पीएम जनमन यूनिवर्सल हेल्थ स्क्रीनिंग अभियान प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है।
विकासखंड छुईखदान के 38 ग्रामों में निवासरत 4,819 बैगा जनजाति के प्रत्येक परिवार तक आदि अमितान एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही है। अभियान का उद्देश्य बैगा समुदाय के प्रत्येक व्यक्ति की समय पर स्वास्थ्य जांच कर गंभीर बीमारियों की प्रारंभिक पहचान एवं उपचार सुनिश्चित करना है।
अभियान के अंतर्गत प्रत्येक हितग्राही का व्यक्तिगत स्वास्थ्य प्रोफाइल तैयार किया जा रहा है। साथ ही मधुमेह, उच्च रक्तचाप, सिकल सेल रोग, एनीमिया, स्तन एवं सर्वाइकल कैंसर, मोतियाबिंद, टीबी, मलेरिया, कुष्ठ रोग सहित अन्य बीमारियों की स्क्रीनिंग की जा रही है। आवश्यकता अनुसार मरीजों को तत्काल उपचार एवं उच्च स्वास्थ्य संस्थाओं के लिए रेफर किया जा रहा है।
आदि अमितान द्वारा यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी 0 से 2 वर्ष का बच्चा अथवा गर्भवती महिला स्वास्थ्य सेवाओं एवं टीकाकरण से वंचित न रहे। एवं प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य जांच स्क्रीनिंग की जा रही है। स्क्रीनिंग के दौरान छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण तथा गर्भवती महिलाओं की जांच भी की जा रही है।
गंभीर स्वास्थ्य समस्या वाले हितग्राहियों को जिला प्रशासन द्वारा संचालित निःशुल्क आदि आरोग्य रथ के माध्यम से उच्च स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाकर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
अब तक अभियान के अंतर्गत 1,109 बैगा हितग्राहियों की स्वास्थ्य जांच कर उनका व्यक्तिगत स्वास्थ्य प्रोफाइल तैयार किया जा चुका है। इनमें से 27 मरीजों को उच्च उपचार हेतु रेफर किया गया, जिनमें 18 उच्च रक्तचाप के मरीज, 1 पीएफ मलेरिया का मरीज तथा 8 एनीमिक गर्भवती महिलाएं शामिल हैंए जिन्हें समय पर भर्ती कर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया।
आदि अमितान पहल के माध्यम से दूरस्थ बैगा बस्तियों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ रही है तथा विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों को उनके घर के निकट ही समयबद्ध जांच, परामर्श, उपचार एवं रेफरल सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

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पीसीसी चीफ की दौड़ में गुंडरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद का नाम उभरा, सादगी और संगठनात्मक अनुभव बन सकता है प्लस पॉइंट

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रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के नए अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर चल रही सियासी कवायद के बीच अब एक नया नाम तेजी से चर्चा में आया है। गुंडरदेही विधानसभा क्षेत्र के विधायक और वरिष्ठ नेता कुंवर सिंह निषाद को संगठन के मुखिया पद के लिए एक मजबूत, अनुभवी और जमीनी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि ओबीसी (OBC) वर्ग में मजबूत पकड़ और निर्विवाद छवि के कारण निषाद के नाम पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है।

जिम्मेदारी मिली तो बूथ स्तर तक करेंगे काम: निषाद
नई जिम्मेदारी की चर्चाओं के बीच विधायक कुंवर सिंह निषाद ने भी अपनी मंशा साफ कर दी है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस हाईकमान और शीर्ष नेतृत्व उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपता है, तो वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ काम करेंगे। उनका मुख्य फोकस संगठन को बूथ स्तर पर और अधिक सक्रिय व मजबूत करना होगा। निषाद ने जोर देकर कहा कि वे कार्यकर्ताओं को पूरा सम्मान व अवसर देंगे और कांग्रेस की मूल विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास करेंगे।

तीन दशक का सफर: युवा कांग्रेस से की थी शुरुआत
कुंवर सिंह निषाद का राजनीतिक सफर काफी लंबा और जमीनी रहा है। वे वर्ष 1995 से कांग्रेस संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

शुरुआती सफर: उन्होंने जिला युवा कांग्रेस से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी।

संगठनात्मक अनुभव: वे प्रदेश कांग्रेस के प्रतिनिधि, आधिकारिक प्रवक्ता और विधानसभा की प्राक्कलन समिति के सदस्य जैसी विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ संभाल चुके हैं।

सामाजिक नेतृत्व: निषाद वर्तमान में विधायक होने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ निषाद केवट समाज के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं, जिससे उनकी सामाजिक स्वीकार्यता काफी व्यापक है।

क्यों मजबूत माना जा रहा है दावा?
राजनैतिक विश्लेषकों और पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि कुंवर सिंह निषाद की सबसे बड़ी खूबी उनकी सादगी, सहजता और सबको साथ लेकर चलने वाली कार्यशैली है। संगठन और समाज, दोनों ही मोर्चों पर उनका बेहतरीन समन्वय है। ऐसे समय में जब कांग्रेस को एक ऐसे चेहरे की तलाश है जो गुटबाजी से दूर रहकर कार्यकर्ताओं में जोश भर सके, निषाद का नाम एक मजबूत और उपयुक्त विकल्प के रूप में उभरा है। अब अंतिम फैसला आलाकमान के पाले में है।

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छत्तीसगढ़

तोमर ने सिंधी समाज को चालीहा महोत्सव की दी बधाई

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रायपुर. क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष भाई वीरेन्द्र सिंह तोमर ने सिंधी भाई – बहनों को चालीहा महोत्सव की बधाई दी है. उन्होंने अपने बधाई सँदेश में कहा है कि चालीसा दिनों तक तप – तपस्या – भक्तिभाव सँग की जाने वाली आराधना शाँति और सुकून प्रदान करेगी.

ज्ञात हो कि चालीहा महोत्सव का शुभारँभ 16 जुलाई, दिन गुरुवार को हुआ है. महोत्सव के प्रारँभ होते ही रायपुर सहित देश विदेश में सिंधी समाज से जुडे़ सभी भाई बहन विशेष पूजापाठ में जुट गए हैं.

क्षत्रिय करणी सेना के राज्य के मुखिया तोमर ने चालीहा महोत्सव के दौरान किए जाने वाले व्रत की बात करते हुए कहा है कि तमाम तरह के व्यसनों से मुक्ति का मार्ग यह पर्व दिखाता है. छोटी बडी़ सभी नदियों के सँरक्षण सहित उन्हें पूजे जाने का भी सँदेश यह त्यौहार देता है.

0 क्या है महोत्सव?

उल्लेखनीय है कि इस महोत्सव के दौरान इसे मानने वाले न तो अपने बालों में कँघी करते हैं और न ही दाढ़ी – बाल कटवाते हैं. जूते चप्पल त्यागने के साथ ही जमीन पर सोते हैं.

चालीहा महोत्सव के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन किया जाता है. इस अवधि में शुरुआत के पहले नौ दिन अथवा महोत्सव के अँतिम नौ दिन व्रत रखने की भी परँपरा है. व्रती दिन में केवल एक समय सात्विक भोजन का प्रसाद ग्रहण करते हैं.

0 क्यों मनाते हैं महोत्सव?

चालीहा महोत्सव से जुडी़ हुई
पौराणिक कथा पर प्रकाश डालते हुए जानकार बताते हैं कि सिंधु प्राँत में आज से करीब एक हजार साल पहले मिरख बादशाह का शासन हुआ करता था. वह बेहद अत्याचारी था.

उसके अत्याचार से पीडित प्रभावित श्रद्धालुओं ने सिंधु नदी के किनारे 40 दिनों तक भगवान वरुण की प्रार्थना की थी. इसके ही फलस्वरूप तब नदी से ही एक विशिष्ट बालक के अवतरित होने की आकाशवाणी हुई थी.

मान्यता है कि वरूण देवता स्वयँ मछली पर सवार होकर अवतरित हुए थे. उन्होंने व्रतियों से कहा था कि ” चिंता न करो मैं बहुत जल्द रतन राय के घर जन्म लूँगा और तुम्हारे दुखों का अंत करूँगा. ”

भविष्यवाणी मुताबिक वर्ष 991 में सिंध प्राँत के नसरपुर नगर में रतन राय के घर चैत्र शुक्ल तृतीया को एक बालक का जन्म हुआ. इसका नामकरण उदय चँद के रूप में हुआ.

आगे चलकर इसी ने
मिरख बादशाह का अँत सिंधी समाज के भाई बहनों की पीडा़ हर ली थी. तब से ही यह पर्व मनाया जाता है.

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