रायपुर
विश्व पशु चिकित्सा दिवस पर रायपुर में वार्षिक अधिवेशन सम्पन्न, पशु चिकित्सकों की भूमिका पर जोर
रायपुर। विश्व पशु चिकित्सा दिवस के अवसर पर नवीन विश्राम गृह, रायपुर में एक दिवसीय वार्षिक अधिवेशन का आयोजन किया गया। इस वर्ष का थीम ‘पशु चिकित्सक : भोजन और स्वास्थ्य के संरक्षक’ रखा गया, जो खाद्य सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति, जन स्वास्थ्य और पशु स्वास्थ्य की रक्षा में पशु चिकित्सा सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है। खेत से लेकर थाली तक, पशु चिकित्सक यह सुनिश्चित करने में अग्रणी भूमिका निभाते हैं कि हमारा भोजन सुरक्षित और स्वस्थ रहे।
यह कार्यक्रम पशु चिकित्सा अधिकारी संघ (अनु. जाति-जन जाति) द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कृषि मंत्री रामविचार नेताम, पूर्व मंत्री एवं सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक नीलकंठ टेकाम, छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक एवं पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ के पूर्व प्रांताध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार सिरमौर तथा पशु चिकित्सा अधिकारी संघ (अनु. जाति-जन जाति) के प्रांताध्यक्ष डॉ. शंकरलाल उइके सहित पूरी कार्यकारिणी उपस्थित रही। कार्यकारिणी में प्रांतीय सचिव डॉ. रामचंद्र रामटेके, कोषाध्यक्ष डॉ. पवन साहनी, डॉ. पराग बनसोड, डॉ. केएल राम एवं डॉ. किरण चौधरी प्रमुख रूप से शामिल थे। इसके अलावा राज्य के विभिन्न जिलों से 20 प्रगतिशील पशुपालक, कामधेनु विश्व विद्यालय के प्राध्यापक, विभागीय अधिकारी और छात्र-छात्राएं भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि एवं पशुपालन मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि पशु चिकित्सक केवल पशुओं के उपचार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे भोजन और स्वास्थ्य के संरक्षक की भूमिका भी निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पशुधन के स्वास्थ्य से ही किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है। शिक्षा के बढ़ने के साथ पशुपालन के क्षेत्र में लोगों की रुचि भी बढ़ रही है। पहले जो सामाजिक बंधन थे, अब वे नहीं रहे। पशुधन आधारित आजीविका को बढ़ाने, नस्ल सुधार एवं नियमित टीकाकरण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि यह कार्यक्रम पशु चिकित्सकों के प्रति हमारी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करने का एक सुंदर अवसर है। अक्सर वे अपने कर्तव्य से भी बढ़कर काम करते हैं और जानवरों के साथ गहरा रिश्ता बना लेते हैं। उनकी लगन उनके लंबे कार्य समय, जटिल मामलों को संभालने की क्षमता और कठिन समय में पशु मालिकों को दिए जाने वाले करुणा एवं समर्थन में स्पष्ट रूप से झलकती है। उन्होंने सभी पशु चिकित्सकों को इस आयोजन के लिए बधाई दी।
पशु चिकित्सा अधिकारी संघ (अनु. जाति-जन जाति) के प्रांताध्यक्ष डॉ. शंकरलाल उइके ने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना है, जिसका सीधा संबंध मानव कल्याण से है। हम न केवल बीमार और घायल पशुओं का उपचार करते हैं, बल्कि उन बीमारियों के प्रकोप को रोकने में भी अहम भूमिका निभाते हैं जो पशु और मानव दोनों को प्रभावित कर सकती हैं।
उन्होंने पशु चिकित्सकों की लंबित मांगों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि राज्य बनने के बाद से पद संरचना पुनरीक्षित नहीं हुई है, 2020 के बाद भर्ती पशु चिकित्सकों की परिवीक्षा अवधि अभी तक क्लियर नहीं हुई है, 8 वर्ष एवं 16 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके पशु चिकित्सकों को समयमान वेतनमान का लाभ नहीं मिला है, तथा सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती, विश्व विद्यालय में सहायक प्राध्यापक एवं विभाग में पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ के पदों पर भर्ती तथा विभागीय सेट-अप में सुधार की तत्काल आवश्यकता है। इन कारणों से पशु चिकित्सकों में काफी रोष व्याप्त है। उन्होंने मंत्री से इन मांगों को शीघ्र पूरा करने का अनुरोध किया।
छत्तीसगढ़
बिरसा मुंडा जयंती पर युवाओं को मिला समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का संदेश
रायपुर। महान स्वतंत्रता सेनानी और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर मंगलवार को ऑल वॉलंटरी एसोसिएशन फाउंडेशन द्वारा विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में युवाओं और आदिवासी समाज से भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों को अपनाकर समाज व राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के निदेशक डॉ. हेमशंकर जेठमल साहू ने की। शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर संस्था के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएं, युवा एवं विभिन्न आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
डॉ. साहू ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने अपने जीवन में शोषण और अन्याय के खिलाफ संघर्ष करते हुए आदिवासी समाज को नई दिशा दी। उन्होंने कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनका जीवन साहस, आत्मसम्मान और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
उन्होंने युवाओं से शिक्षा, संगठन और आत्मविश्वास के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया। कहा कि युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और यदि वह सही दिशा में आगे बढ़े तो समाज में व्यापक परिवर्तन संभव है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज में जागरूकता फैलाने, सामाजिक कुरीतियों को दूर करने और लोगों को उनके अधिकारों के प्रति सजग बनाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके नेतृत्व में चला जनआंदोलन आज भी सामाजिक न्याय और स्वाभिमान की प्रेरणा देता है।
इस दौरान संस्था के सदस्यों ने आदिवासी समाज के उत्थान, शिक्षा के प्रसार, युवाओं के कौशल विकास और सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। संस्था ने भविष्य में भी भगवान बिरसा मुंडा के विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता अभियान और संगोष्ठियों के आयोजन की घोषणा की।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने भगवान बिरसा मुंडा के बताए मार्ग पर चलने तथा समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कार्य करने की शपथ ली। साथ ही उनके विचारों और योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प भी दोहराया।
कोंडागांव
खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ें, सालभर मिलेगी आय : विवेक ठाकुर
रायपुर/कोंडागांव। कृषि क्षेत्र में किसानों की आय को दोगुना करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अब पारंपरिक ढर्रे से बाहर निकलना होगा। किसानों को आधुनिक तकनीक, बहुफसली खेती और बाजार आधारित उत्पादन प्रणाली को अपनाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यह बात राज्यसभा सांसद श्रीमती फूलोदेवी नेताम के प्रतिनिधि विवेक ठाकुर ने किसानों से किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और किसान उत्पादक कंपनियों से जुड़कर सामूहिक रूप से कार्य करने का आह्वान करते हुए कही।
श्री ठाकुर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा छोटे और सीमांत किसानों का है। अकेले खेती करने के कारण इन किसानों को उन्नत बीज, खाद, उर्वरक, सिंचाई के साधन और सबसे बढ़कर उपज का उचित मूल्य (विपणन) पाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यदि यही किसान एफपीओ या किसान उत्पादक कंपनी के रूप में संगठित होकर काम करें, तो उन्हें सरकारी योजनाओं, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बड़े बाजारों तक पहुंच आसानी से मिल सकती है। इससे न सिर्फ खेती की लागत घटेगी, बल्कि उत्पादन और मुनाफे में भी बड़ी वृद्धि होगी।
सांसद प्रतिनिधि ने फसल विविधीकरण पर जोर देते हुए कहा कि किसानों को केवल एक ही फसल (धान) पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन, सब्जी, फल, मक्का और छत्तीसगढ़ के पारंपरिक मिलेट्स जैसे कोदो-कुटकी व अन्य नकदी फसलों की खेती की जानी चाहिए। बहुफसली खेती से जहां एक ओर भूमि की उर्वरा शक्ति सुरक्षित रहती है, वहीं दूसरी ओर किसानों को साल के बार Belonging महीने आय के स्रोत मिलते रहते हैं। उन्होंने प्राकृतिक और जैविक खेती को अपनाने की भी वकालत की।
विवेक ठाकुर ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ FPO के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि किसान उत्पादक कंपनियां किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने, उनके उत्पादों की ब्रांडिंग करने और बिचौलियों से मुक्त कर बेहतर मूल्य दिलाने में सेतु का काम कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योग, प्रसंस्करण इकाइयां (प्रोसेसिंग यूनिट) और वैल्यू एडिशन (मूल्य संवर्धन) गतिविधियों को बढ़ावा देने की सख्त जरूरत है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा होगा। उन्होंने क्षेत्र के युवाओं और महिलाओं को भी कृषि आधारित स्टार्टअप और उद्यमों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
श्री ठाकुर ने अंत में अपील की कि यदि छत्तीसगढ़ के किसान संगठित होकर आधुनिक कृषि मॉडल को अपनाते हैं, तो आने वाले समय में हमारा प्रदेश कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में देश के भीतर एक नई और अनूठी पहचान स्थापित करेगा।
रायपुर
मदर्स डे पर सौगात : रायपुर महिला जेल में वीडियो कॉलिंग सिस्टम का शुभारंभ
रायपुर। आज मदर्स डे के ममतामयी अवसर पर रायपुर की महिला जेल में बंदिनियों के लिए खुशियों की एक नई किरण जगी है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की घोषणा के अनुरूप, जेल प्रशासन ने महिला बंदिनियों को प्रिजन इनमेट वीडियो कॉलिंग सिस्टम का बहुप्रतीक्षित तोहफा दिया है।
अपनों से दूरी होगी कम
वीडियो कॉलिंग की सुविधा से जेल विभाग और बीएसएनएल के बीच हुए अनुबंध के तहत इस सिस्टम को स्थापित किया गया है। अब महिला बंदी अपने परिजनों और अधिवक्ताओं से सीधे वीडियो कॉल के जरिए संवाद कर सकेंगी, जिससे उनके मानसिक संबल और कानूनी विमर्श में मदद मिलेगी।
हुनर को मिला सम्मान
निश्चय कार्यक्रम के अंतर्गत कौशल विकास का प्रशिक्षण पूर्ण करने वाली 38 महिला बंदिनियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह उनके पुनर्वास और भविष्य में स्वावलंबन की दिशा में एक बड़ा कदम है।
जेल में अपनी माताओं के साथ रह रहे 14 मासूम बच्चों को विभाग की ओर से विशेष उपहार वितरित किए गए, जिससे बच्चों के चेहरे पर खिली मुस्कान खिल गया और जेल परिसर का माहौल उत्सवमय हो गया। इस संवेनदनशील पहल के शुभारंभ अवसर पर जेल और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से श्री हिमांशु गुप्ता (डीजी, जेल), श्री योगेश सिंह क्षत्री (जेल अधीक्षक), श्री विजय छबलानी (प्रतिनिधि, ठैछस्), सुश्री गरिमा पांडेय (प्रभारी, महिला जेल) एवं समस्त जेल स्टाफ, संबंधित महिला बंदिनी उपस्थित रहे। यह पहल न केवल बंदिनियों को उनके मानवाधिकारों और परिवार से जोड़ने का माध्यम बनेगी, बल्कि जेल सुधार की दिशा में तकनीकी समावेश का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी पेश करेगी।
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