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छत्तीसगढ़

बीएनसी मिल शुरु करने को लेकर भाजपा ने किया प्रदर्शन, वरिष्‍ठ भाजपा नेता व भाजपा पार्षद दल ने किया प्रदर्शन, ज्ञापन भी सौंपा

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राजनांदगांव : बीएनसी मिल शुरु करने सहित कई और वायदों को लेकर वरिष्‍ठ भाजपा नेता व भाजपा पार्षद दल की मौजूदगी में भाजपा ने गंज चौक में उग्र प्रदर्शन किया। 8 नवंबर 2018 में राजनांदगांव प्रवास के दौरान कांग्रेस के पूर्व राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस का चुनावी जनघोषणा पत्र जारी करते हुए बीएनसी मिल दोबारा शुरु करने सहित 36 वायदे किए थे। इसे लेकर गुरुवार को राहुल गांधी के राजधानी प्रवास के दौरान भाजपा ने प्रदर्शन करते हुए कहा कि, न्‍याय की बात करने वाले राहुल खुद ही फरेब की मूरत बन चुके हैं। उन्‍होंने संस्‍कारधानी को अपने झूठ से छला है। राहुल गांधी के वायदों को याद दिलाने के लिए भाजपा चरणबद्ध आंदोलन करेगी। प्रदर्शन के बाद भाजपा ने जिला कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन भी सौंपा।

इस दौरान वरिष्‍ठ भाजपा नेता खूबचंद पारख ने कांग्रेस सरकार और राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि, कांग्रेस हमेशा ही झूठ बोलने में पारंगत रही है। देश को आर्थिक रुप से खोखला करने और युवाओं को रोजगार के मसले पर कांग्रेस ने कभी कुछ नहीं किया। बेरोजगारों को भत्‍ता देने से सरकार पीछे हट रही है। बीते तीन साल से प्रदेश के युवा सरकार के इस वायदे की राह तक रहे हैं। बोनस, किस्‍तों में भुगतान, फसल का रकबा कम करने जैसे कई गंभीर मसलों पर इस सरकार ने किसानों को ठग लिया। राहुल-प्रियंका के बोलने पर लखीमपुर जाकर परिवारों को 50 लाख की सहायता देने वाले इसी कांग्रेस सरकार के मुख्‍यमंत्री ने अपने ही कार्यकाल में आत्‍महत्‍या कर चुके 550 किसानों की सुध तक लेना उचित नहीं समझा।

जिला भाजपा अध्‍यक्ष मधुसूदन यादव ने कहा कि, कांग्रेस हमेशा ही लोगों को गुमराह करती रही है। राहुल गांधी स्‍वयं जानते हैं कि बीएनसी मिल कभी शुरु नहीं की जा सकती। कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री स्‍व. नरसिम्‍हा राव के कार्यकाल में ही उनके तत्‍कालीन वित्‍तमंत्री व पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने देश के सैकड़ा भर उद्योगों को बीमारु घोषित करने हुए बंद करने की कवायद शुरु की थी जिसमें बीएनसी मिल भी शामिल था। छत्‍तीसगढ़ में कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार के मुख्‍यमंत्री रहे स्‍व. अजीत जोगी ने ही बीनएसी मिल का बकाया बिजली बिल भुगतान करने से इंकार कर दिया था। जाहिर है कि, इतने कर्ज तले दबे बीएनसी मिल की नीवें कांग्रेस सरकारों ने ही ध्‍वस्‍त कर रख दी। राहुल यहां आए और वायदा कर चले गए क्‍यूंकि उन्‍हें पता था कि बीएनसी मिल शुरु नहीं होने वाली।

गुरुवार को गंज चौक में किए गए इस प्रदर्शन के दौरान नेता प्रतिपक्ष किशुन यदु ने कहा कि इसी जगह पर तीन वर्ष पहले स्‍वयं राहुल गांधी ने संस्‍कारधानी से बीएनसी मिल दोबारा शुरु करने का वायदा किया था। लेकिन ये वायदे महज छल साबित हुए। कांग्रेस की सरकार तो बन गई लेकिन अपने ही वरिष्‍ठ नेता राहुल गांधी के किए गए वायदों को कांग्रेस की भूपेश सरकार ने किनारे लगा दिया। जबकि उस उस दौरान मौजूदा मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल सहित कई अन्‍य मौजूदा मंत्री रैली में शामिल थे। संस्‍कारधानी में ही 36 वायदों को जनघोषणा पत्र जारी करने वाले राहुल और प्रदेश कांग्रेस सरकार न जाने किस बिनाह पर न्‍याय की बात करती जबकि प्रदेश के साथ लगातार अन्‍याय ही किया जा रहा है। बीएनसी मिल, बेरोजगारी भत्‍ता, रोजागार जैसे कई मसलों पर कांग्रेस झूठ ही बोलती रही है।

प्रदर्शन के दौरान कोमलसिंह राजपूत, तरुण लहरवानी, सुमित सिंह भाटिया, कमलेश सूर्यवंशी, विजय राय, मधु बैद, मनोज बैद, खेमिन यादव, अजय छैदेया, कमलेश प्रजापति, सुमित आजमानी, आदित्‍य पराते ने भी संबोधित करते हुए कांग्रेस को बीएनसी मिल सहित कई अन्‍य मसलों पर घेरा।

इस दौरान सुरेश डुलानी, राजेंद्र गोलछा, सचिन बघेल, नीलू शर्मा, रमेश पटेल, अतुल रायजादा, प्रखर श्रीवास्तव, आशीष जैन, राजू वर्मा, हर्ष रामटेके, रानू जैन, त्रिगुण टांक, बंटी भाटिया, कमलेश बंधे, मोंटू यादव, पारस वर्मा, शरद सिन्‍हा, उत्‍तरा अरुण दामले, गप्‍पू सोनकर, आशीष डोंगरे, अरुण साहू, अरुण देवांगन, राजेश यादव, गगन आईच, गीतेश गुप्‍ता, सुभाष हरिहारनो, अशोक निर्मलकर, आदित्‍य साहू, अमितेश झा, पवन निर्मलकर, पंकज कुरेंजकर, उज्‍जवल कसेर, सोहन साहू, मुकेश ध्रुव, सेवक उईके, अर्जुन पुरोहित, ताराचंद साहू, सतीष धीवर, नितेश नायक, कृष्‍णा नायक, धीरज घोड़ेसवार, असलम खान, मनोहर साहू, जीवन चुतुर्वेदी, प्रहलाद सिन्‍हा, अभिषेक पांडेय, प्रवीण शुक्‍ला, रोहित सिन्‍हा, अर्जुन पुरोहित, विजेंद्र प्रताप, महेश राव सहारे, राजेश बिसेन, कन्‍हैया सुनील साहू, रवि बंजारे, मनीष वर्मा, अभिषेक यादव, चंद्रभान जंघेल, कमलेश लहरे, प्रज्‍जवल गुप्‍ता, दामन पदम, विकास साहू, संगीमा मिश्रा, रेणु सूर्यवंशी, नारायणा राजपूत, शिवम लोढ़ा, जैनम बैद, सत्‍यम मिश्रा, जय शर्मा समेत अन्य लोग शामिल थे।

 

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छत्तीसगढ़

बिरसा मुंडा जयंती पर युवाओं को मिला समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का संदेश

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रायपुर। महान स्वतंत्रता सेनानी और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर मंगलवार को ऑल वॉलंटरी एसोसिएशन फाउंडेशन द्वारा विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में युवाओं और आदिवासी समाज से भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों को अपनाकर समाज व राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के निदेशक डॉ. हेमशंकर जेठमल साहू ने की। शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर संस्था के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएं, युवा एवं विभिन्न आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

डॉ. साहू ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने अपने जीवन में शोषण और अन्याय के खिलाफ संघर्ष करते हुए आदिवासी समाज को नई दिशा दी। उन्होंने कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनका जीवन साहस, आत्मसम्मान और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

उन्होंने युवाओं से शिक्षा, संगठन और आत्मविश्वास के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया। कहा कि युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और यदि वह सही दिशा में आगे बढ़े तो समाज में व्यापक परिवर्तन संभव है।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज में जागरूकता फैलाने, सामाजिक कुरीतियों को दूर करने और लोगों को उनके अधिकारों के प्रति सजग बनाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके नेतृत्व में चला जनआंदोलन आज भी सामाजिक न्याय और स्वाभिमान की प्रेरणा देता है।

इस दौरान संस्था के सदस्यों ने आदिवासी समाज के उत्थान, शिक्षा के प्रसार, युवाओं के कौशल विकास और सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। संस्था ने भविष्य में भी भगवान बिरसा मुंडा के विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता अभियान और संगोष्ठियों के आयोजन की घोषणा की।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने भगवान बिरसा मुंडा के बताए मार्ग पर चलने तथा समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कार्य करने की शपथ ली। साथ ही उनके विचारों और योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प भी दोहराया।

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छत्तीसगढ़

पहाड़ी गांवों में टूटी माहवारी पर चुप्पी, ‘आओ सहेली चुप्पी तोड़ें’ अभियान से जगी नई उम्मीद

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मोहला/मानपुर। वनांचल और पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी माहवारी (पीरियड्स) को लेकर समाज में एक अजीब सी झिझक और चुप्पी देखने को मिलती है। इसी रूढ़िवादिता और चुप्पी को तोड़ने के लिए विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस के अवसर पर मानपुर विकासखंड के सुदूर वनांचल ग्रामों में एक अनूठी और सराहनीय पहल की गई। जन कल्याण सामाजिक संस्थान एवं प्रोजेक्ट बाला के संयुक्त तत्वावधान में आओ सहेली चुप्पी तोड़ें अभियान के अंतर्गत ग्राम बुकमरका, कामखेड़ा, कोराचा एवं चावरगांव में विशेष जागरूकता, संवाद और सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस दौरान समाज में एक सकारात्मक संदेश देते हुए पहली बार पीरियड्स से गुजर रहीं किशोरी बालिकाओं का सम्मान किया गया, जिससे उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास जागा।
पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र में बसे ग्राम बुकमरका में इतिहास में पहली बार ऐसा नजारा देखने को मिला, जहां माहवारी जैसे संवेदनशील विषय पर खुलकर बात करने के लिए महिलाएं, पुरुष और किशोरी बालिकाएं एक साथ शामिल हुईं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य माहवारी को लेकर समाज में व्याप्त शर्म, भ्रांतियों और वर्जनाओं को खत्म कर स्वच्छता व स्वास्थ्य के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करना था।
संवाद के दौरान ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों ने अपनी जमीनी समस्याओं को खुलकर साझा किया। उन्होंने बताया कि गांवों में सेनेटरी पैड की उपलब्धता न होने के कारण मजबूरी में वे पुराने कपड़ों का इस्तेमाल करती थीं। पैड खरीदने के लिए उन्हें 10 से 12 किलोमीटर दूर तक का सफर तय करना पड़ता था, जिससे स्वास्थ्य संबंधी कई बीमारियां और असुविधाएं होती थीं।
ग्रामीण महिलाओं की इस बड़ी समस्या का समाधान करते हुए संस्था द्वारा कार्यक्रम में 120 किशोरी बालिकाओं को रीयूजेबल सेनेटरी पैड मुफ्त वितरित किए गए। पहली बार पर्यावरण के अनुकूल और बार-बार उपयोग में आने वाले पैड पाकर बालिकाओं के चेहरों पर खुशी और सुरक्षा का भाव साफ नजर आया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा माहवारी स्वच्छता, संक्रमण से बचाव और इन रीयूजेबल पैडों के सुरक्षित उपयोग व रख-रखाव की विस्तृत जानकारी दी गई।
वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि माहवारी कोई बीमारी या शर्म की बात नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के जीवन की एक बेहद सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसके प्रति पूरे समाज को अपनी सोच बदलने की जरूरत है।
इस गरिमामयी कार्यक्रम में गांवों के पटेल, मितानिन दीदी, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्य, बड़ी संख्या में ग्रामीणजन और जन कल्याण सामाजिक संस्थान के कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे ग्रामीण अंचलों में माहवारी स्वच्छता को लेकर अलख जगाते रहेंगे और किशोरियों को स्वास्थ्य संसाधन उपलब्ध कराने में लगातार सहयोग करेंगे। यह आयोजन केवल एक दिवसीय कार्यक्रम न बनकर पहाड़ी गांवों की महिलाओं के लिए सम्मान और सशक्तिकरण की एक नई सुबह साबित हुआ।

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कोंडागांव

खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ें, सालभर मिलेगी आय : विवेक ठाकुर

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रायपुर/कोंडागांव। कृषि क्षेत्र में किसानों की आय को दोगुना करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अब पारंपरिक ढर्रे से बाहर निकलना होगा। किसानों को आधुनिक तकनीक, बहुफसली खेती और बाजार आधारित उत्पादन प्रणाली को अपनाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यह बात राज्यसभा सांसद श्रीमती फूलोदेवी नेताम के प्रतिनिधि विवेक ठाकुर ने किसानों से किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और किसान उत्पादक कंपनियों से जुड़कर सामूहिक रूप से कार्य करने का आह्वान करते हुए कही।

श्री ठाकुर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा छोटे और सीमांत किसानों का है। अकेले खेती करने के कारण इन किसानों को उन्नत बीज, खाद, उर्वरक, सिंचाई के साधन और सबसे बढ़कर उपज का उचित मूल्य (विपणन) पाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यदि यही किसान एफपीओ या किसान उत्पादक कंपनी के रूप में संगठित होकर काम करें, तो उन्हें सरकारी योजनाओं, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बड़े बाजारों तक पहुंच आसानी से मिल सकती है। इससे न सिर्फ खेती की लागत घटेगी, बल्कि उत्पादन और मुनाफे में भी बड़ी वृद्धि होगी।

सांसद प्रतिनिधि ने फसल विविधीकरण पर जोर देते हुए कहा कि किसानों को केवल एक ही फसल (धान) पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन, सब्जी, फल, मक्का और छत्तीसगढ़ के पारंपरिक मिलेट्स जैसे कोदो-कुटकी व अन्य नकदी फसलों की खेती की जानी चाहिए। बहुफसली खेती से जहां एक ओर भूमि की उर्वरा शक्ति सुरक्षित रहती है, वहीं दूसरी ओर किसानों को साल के बार Belonging महीने आय के स्रोत मिलते रहते हैं। उन्होंने प्राकृतिक और जैविक खेती को अपनाने की भी वकालत की।

विवेक ठाकुर ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ FPO के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारा जा सकता है।

उन्होंने बताया कि किसान उत्पादक कंपनियां किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने, उनके उत्पादों की ब्रांडिंग करने और बिचौलियों से मुक्त कर बेहतर मूल्य दिलाने में सेतु का काम कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योग, प्रसंस्करण इकाइयां (प्रोसेसिंग यूनिट) और वैल्यू एडिशन (मूल्य संवर्धन) गतिविधियों को बढ़ावा देने की सख्त जरूरत है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा होगा। उन्होंने क्षेत्र के युवाओं और महिलाओं को भी कृषि आधारित स्टार्टअप और उद्यमों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

श्री ठाकुर ने अंत में अपील की कि यदि छत्तीसगढ़ के किसान संगठित होकर आधुनिक कृषि मॉडल को अपनाते हैं, तो आने वाले समय में हमारा प्रदेश कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में देश के भीतर एक नई और अनूठी पहचान स्थापित करेगा।

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