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राजनांदगांव

मन के गोठ ऑनलाइन वेबीनार में महिलाओं ने जाना मानसिक रूप से स्वस्थ्य रहने का गुर

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राजनांदगांव। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और उनके निवारण के लिए महिलाओं और किशोरियों को जागरूक रहने की बहुत जरूरत है। इसी के मद्देनजर स्कूल, कॉलेज की छात्राओं और महिलाओं के लिए राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मेंटल वेल बीइंग वेबीनार मन के गोठ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय के सहयोग से आयोजित ऑनलाइन वेबीनार में देशभर के मनोचिकित्सक विशेषज्ञों ने हिस्सा लेकर महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी, साथ ही महिलाओं को मानसिक रूप से स्वस्थ्य रहने के गुर भी बताए।
इस मौके पर विशेषज्ञों ने समुदाय स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के निदान के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी हासिल की। साथ ही महिलाओं और किशोरियों के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और उनकी मानसिक स्वास्थ्य जिज्ञासाओं को शांत भी किया। इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में सहायता पहुंचाने के लिए नई दिल्ली पीएस, डिवीजन, पुणे स्थित सीडेक एवं निम्हांस बैंगलुरू द्वारा तैयार किया गया मानस एप्लीकेशन के बारे में भी बताया गया। वेबीनार के माध्यम से विशेषज्ञों ने अपने अनुभवों को साझा कर मानसिक रूप से स्वस्थ्य रहने के उपाय भी बताए।
महिलाओं को मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं ज्यादा-वेबीनार में मुख्य रूप से साइंटिस्ट एफ, पीएस, ऑफिस, भारत सरकार डॉ. केतकी बापट ने कहा कोविड महामारी के समय में मानसिक सुदृढ़ता की बहुत जरूरत है। विशेषकर महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को समझना और उसका निदान करना अहम है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए सरकार द्वारा कई तरह की सुविधाएं एवं सहायता प्रदान की जा रही हैं। फिर भी महिलाओं और किशोरियों की मानसिक समस्याओं को समय पर पहचानकर उसका निराकरण करना आज सबकी महत्ती जिम्मेदारी है, क्योंकि महिला ही परिवार की धुरी है और मानसिक रूप से वह स्वस्थ्य और खुशहाल रहेगी तो परिवार और समाज स्वस्थ्य और खुशहाल रहेगा। इस दौरान डॉ. केतकी ने मानसिक स्वास्थ्य के लिए छत्तीसगढ़ में किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की। साथ ही मितानिनों को सकारात्मक सोच को रखते हुए मानसिक रोगी को पहचानकर उसका शीघ्र इलाज कराने का आह्वान किया।
वेबीनार में उप संचालक राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम डॉ. महेन्द्र सिंह ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ्य रहने के प्रति जागरूक करने की आज जरूरत है। जन जागरूकता के जरिए ही शारीरिक समस्या के समान ही मानसिक समस्या को समझकर उसका निदान किया जा सकता है।
कार्यक्रम में कार्यकारी संचालक सीडेक, बेंगलुरू के डॉ. एसडी सुदर्शन ने मानसिक स्वास्थ्य के लिए किए जा रहे कार्यों और मानस ऐप के बारे में प्रकाश डाला। वहीं नेशनल प्रोफेशनल ऑफिस, मेंटल हेल्थ से डॉ. आत्रेई गांगुली ने छत्तीसगढ़ में मितानिनों द्वारा मानसिक स्वास्थ्य की जागरूकता के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा-मितानिनों ने समाज में फैले रूढ़िवादी नजरिए कि मानसिक रोग नहीं ऊपरी बाधा है को तोड़कर मानसिक रोग भी अन्य सामान्य रोग जैसा ही एक रोग है, इस धारणा को अपनाने पर मजबूर किया, इसलिए वह तारीफ की पात्र हैं। डॉ. गांगूली ने महिलाओं एवं किशोरियों से अपनी इच्छाओं, सपनों को साकार करने में संकोच नहीं करने और कोई परेशानी हो तो साकारात्मक सोच के साथ उस संबंध में चर्चा करने की अपील की। निम्हांस बेंगलुरू की प्रोफेसर डॉ. प्रभा चंद्रा ने महिलाओं को मानसिक स्वास्थ्य एवं मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से उबरने के उपायों की जानकारी देते हुए गर्भावस्था और प्रसव के दौरान और बाद में विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा-गंभीर मानसिक समस्याएं या मानसिक रोग का पता तो चल जाता है मगर सरल मानसिक रोग या समस्याएं जैसे तनाव, अवसाद एंग्जाइटी की पहचान कर उसका निदान करने की बहुत आवश्यकता है।

मितानिन ने साझा की सफलता की कहानी
छत्तीसगढ़ के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य कर रही मितानिन ने अपनी सफलता की कहानी लोगों से साझा की। मितानिन ट्रेनर इंदू साकरे, मितानिन नैन साहूए अमरीका वर्मा, पद्मा कौशिक, लक्ष्मी साहू और पूर्णिमा साहू ने मानसिक रूप से अस्वस्थ्य महिला पुरूषों को पहचानकर इलाज कराने संबंधी जानकारीए सफलता की कहानी साझा कर दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुमी जैन ने किया। वेबीनार में महिलाओं , छात्राओं के अलावा मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत पदस्थ प्रशिक्षित चिकित्सा अधिकारी, क्लिनिकल साइक्रेट्रिक, सोशल वर्कर, साइकेट्रिक नर्स एवं कम्युनिटी नर्स शामिल हुए।

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खेल

युगांतर पब्लिक स्कूल ने फिर दिखाया दम, सीबीएसई क्लस्टर बास्केटबॉल में अंडर-19 टीम बनी चैंपियन

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राजनांदगांव। पिछले वर्षों की विजेता युगांतर पब्लिक स्कूल, राजनांदगांव की अंडर-19 बालक बास्केटबॉल टीम ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए सीबीएसई क्लस्टर बास्केटबॉल प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। फाइनल मुकाबले में टीम ने श्री श्री अकादमी, सिलीगुड़ी को 49-18 अंकों से हराकर खिताब पर कब्जा जमाया।
सर्वज्ञ राव बास्केटबॉल अकादमी के खिलाड़ियों से सुसज्जित युगांतर की टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार खेल दिखाया। मर्टर फाइनल में मेजबान बुरनपुर रिवरसाइड स्कूल को 44-6 अंकों से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। इसके बाद ज्ञान विकास इंग्लिश मीडियम स्कूल को हराकर फाइनल का टिकट कटाया और खिताबी मुकाबले में सिलीगुड़ी की टीम को एकतरफा अंदाज में शिकस्त दी।
विद्यालय के प्राचार्य मधुसूदन नायर ने बताया कि युगांतर पब्लिक स्कूल की टीम लगातार क्लस्टर और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही है। खिलाड़ियों की मेहनत और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन से विद्यालय ने एक बार फिर स्वर्ण पदक जीतकर राजनांदगांव का गौरव बढ़ाया।
विजेता टीम में कप्तान शुभम सिंह, हिमांशु सिंह, कालवा सर्वज्ञा राव, रूहान, कालवा अथर्व राव, अथर्व प्रताप सिंह, चिराग चंदेल, धर्मवीर सिंह, सुजल प्रजापत, वी. यशवंत, ज्ञानेश्वर वी. और युवान सारड़ा शामिल रहे। टीम को अंतरराष्ट्रीय कोच कालवा राजेश्वर राव तथा सहायक कोच नवनीत द्विवेदी ने प्रशिक्षण दिया।

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राजनांदगांव

उद्योगों को कलेक्टर का अल्टीमेटम : एक माह में अपनाएं सोलर ऊर्जा, सीएसआर से गांवों के विकास में दें योगदान

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राजनांदगांव। जिले में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कलेक्टर जितेंद्र यादव ने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों की बैठक ली। उन्होंने सभी उद्योगों को एक माह के भीतर सोलर ऊर्जा अपनाने की दिशा में ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही सीएसआर के तहत स्थानीय समुदायों के हित में अधिक से अधिक कार्य करने की अपील की।

बैठक में कलेक्टर ने उद्योग प्रतिनिधियों से उनकी बिजली खपत और ऊर्जा जरूरतों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को देखते हुए उद्योगों को स्थानीय स्तर पर सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन बढ़ाना चाहिए। इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और संचालन लागत में भी कमी आएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोलर संयंत्र लगाने में तकनीकी या प्रशासनिक परेशानी आने पर जिला प्रशासन हरसंभव सहयोग करेगा।

कलेक्टर ने कहा कि उद्योग अपने परिसरों, कर्मचारियों के आवासीय क्षेत्रों और अन्य भवनों में रूफटॉप सोलर प्लांट लगाएं तथा वर्चुअल नेट मीटरिंग जैसी सुविधाओं का भी लाभ लें। जिन उद्योगों में पहले से सोलर संयंत्र स्थापित हैं, वे अन्य उद्योगों को भी हरित ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित करें।

बैठक में सीएसआर गतिविधियों पर भी जोर दिया गया। कलेक्टर ने कहा कि उद्योगों के सबसे बड़े हितधारक आसपास के ग्रामीण और स्थानीय नागरिक हैं। इसलिए सीएसआर के तहत ऐसे कार्य किए जाएं, जिनका सीधा लाभ स्थानीय समुदाय को मिले और उद्योगों व समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो।

उद्योग प्रतिनिधियों ने बैठक में अपने संस्थानों में संचालित सोलर परियोजनाओं, ऊर्जा उत्पादन की वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। कई उद्योगों ने सोलर क्षमता विस्तार और रूफटॉप सोलर परियोजनाओं पर कार्य शुरू करने की बात कही, जबकि कुछ ने सर्वेक्षण पूरा होने के बाद जल्द काम शुरू करने की जानकारी दी।

बैठक में अपर कलेक्टर प्रेमप्रकाश शर्मा, सहायक श्रमायुक्त समीर मिश्रा सहित जिले के विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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राजनांदगांव

स्कूलों में यातायात जागरूकता अभियान, विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा नियमों की दी जानकारी

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राजनांदगांव। सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से यातायात पुलिस ने शहर के विभिन्न विद्यालयों में विशेष जागरूकता अभियान चलाया। इस दौरान विद्यार्थियों को सुरक्षित यातायात के नियमों की जानकारी देने के साथ उनका पालन करने का संकल्प भी दिलाया गया।

पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री कीर्तन राठौर के मार्गदर्शन में यातायात शाखा की टीम ने रॉयल किड्स कॉन्वेंट स्कूल, बाल भारती पब्लिक स्कूल, गुरु नानक स्कूल, पदुमलाल पुन्नालाल बक्शी स्कूल, वेसलियन स्कूल, वाइडनियर स्कूल तथा जेएमजे स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए।

यातायात अधिकारी सहायक उप निरीक्षक कुंज लाल साहू, शरद मसीह, प्रधान आरक्षक खम्हन सिन्हा तथा आरक्षक सोमेश सिंह, रविकांत देवांगन और संदीप कुर्रे ने विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा के महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी दी। उन्होंने दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनने, चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाने, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने तथा बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन नहीं चलाने की समझाइश दी।

इसके अलावा विद्यार्थियों को सड़क पार करते समय ज़ेब्रा क्रॉसिंग का उपयोग करने, यातायात संकेतों और सिग्नलों का पालन करने तथा अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम के अंत में यातायात पुलिस ने विद्यार्थियों से स्वयं यातायात नियमों का पालन करने और सुरक्षित एवं अनुशासित यातायात व्यवस्था के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।

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