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ऑटिज्म के लक्षण, कारण व उपाय बताने अस्पतालों में लगाए पोस्टर, वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे पर किया जनजागरूकता का प्रयास

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ऑटिज्म के लक्षण, कारण व उपाय बताने अस्पतालों में लगाए पोस्टर, वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे पर किया जनजागरूकता का प्रयास
राजनांदगांव। तीन साल से कम उम्र के बच्चे में यदि आंख से संपर्क की कमी, रुचियों की संकीर्ण श्रेणी या कुछ विषयों में गहन रुचि, किसी हरकत को कई बार दोहराना अथवा शब्दों या वाक्यांशों का दोहराना जैसे लक्षण दिखें तो यह संबंधित बच्चे की असामान्य स्थिति के कारण भी हो सकते हैं जिसे विकार की श्रेणी में शामिल किया गया है। इस बारे में जन-जागरूकता के लिए मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल में प्रेरक बैनर व पोस्टर लगाए गए। साथ ही विभिन्न माध्यमों से लोगों को ऑटिज्म के लक्षण, कारण व इससे बचाव संबंधी उपायों की जानकारी दी गई।
ऑटिज्म को ऑटिज्म स्पैक्ट्रम नाम से भी जाना जाता है। यह विकार हालांकि लाइलाज है, लेकिन इस दिशा में जन-जागरूकता के प्रयास हर साल किए जाते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ऑटिज्म स्पैक्ट्रम एक जीवन पर्यंत होने वाला तंत्रिका संबंधी विकार होता है जो लोगों को बचपन के शुरूआती दौर में ही हो जाता है। इस विकार की वजह से पीड़ित को बहुत सी समस्याएं होने लगती हैं। इसके बारे में लोगों को जागरूकता की बेहद जरूरत होती है। संयुक्त राष्ट्र के द्वारा मनाया जाने वाला विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस भी जन-जागरुकता के लिए प्रयासों का ही एक हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने साल 2007 में 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के रूप में घोषित किया था। इसके बाद साल 2008 से 2 अप्रैल को पूरे विश्व में ऑटिज्म जागरूता दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि दुनिया भर में आम लोगों को ऑटिज्म के बारे में अधिक से अधिक जागरूक बनाया जा सके।
ऑटिज्म के बारे में बात करते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी ने बतायाः ऑटिज्म का कोई प्रमाणिक इलाज अब तक नहीं है, लेकिन चिकित्सक इस विकार के प्रभाव को कम करने का प्रयास जरूर करते हैं और कई बार उसमें काफी हद तक सफल भी होते हैं। यह पहले से नहीं बताया जा सकता कि इस रोग को कितना कम किया जा सकता है। विश्व ऑटिज्म डे के अवसर पर इस रोग के प्रति जन-जागरुकता के लिए मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल में कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें लोगों को ऑटिज्म से संबंधित विभिन्न जानकारी दी गई।

ऑटिज्म के प्रमुख लक्षण
ऑटिज्म के साथ एक विशेष बात ये है कि इसके लक्षण शुरू से ही दिखने लगते हैं, लेकिन इस विकार के होने का पता काफी समय बाद चलता है। ऑटिज्म से पीड़ित लोगों को संचार में परेशानी होती है। उन्हें यह समझने में परेशानी होती है कि दूसरे लोग क्या सोचते और महसूस करते हैं। इससे उनके लिए शब्दों या इशारों, चेहरे के भाव और स्पर्श के माध्यम से खुद को व्यक्त करना मुश्किल हो जाता है। ऑटिज्म से पीड़ित लोगों को सीखने में समस्या हो सकती है। उनके कौशल भी असमान रूप से विकसित हो सकते हैं। इसी तरह यह एक ऐसा मनोविकार है जिसे ग्रसित व्यक्ति या बच्चा दूसरों के साथ विचार-व्यवहार करने में असमर्थ रहता है। पीड़ित का मस्तिष्क विभिन्न क्षेत्रों में एक साथ कार्य नहीं कर सकता है।

नियंत्रण के सामान्य उपाय
० बच्चे को डांटने की बजाय मित्र की तरह व्यवहार करें।
० बच्चे की जिद को सहजता से नियंत्रित करें।
० दूसरे बच्चे कैसा बर्ताव करते हैंए यह उसे दिखाएं।
० एक समय में एक ही चीज पर फोकस करें।

इस तरह होता है नियंत्रण का प्रयास
आमतौर पर कई तरह की थेरपी को मिलाकर बच्चे को सामान्य स्थिति में लाने का प्रयास किया जाता है इसलिए विशेषज्ञों की एक टीम मिलकर काम करती है। अगर बच्चा हाइपर सक्रिय है या सोने में दिक्कत है तो उसके लिए मेडिसिन दी जाती है। बोलना सिखाने के लिए स्पीच और लैंग्वेज थेरपी दी जाती है। इसके अलावा बिहेवियरल और ऑक्युपेशनल थेरपी यानी अपने आसपास के माहौल और चीजों से तालमेल बिठाने की थेरपी दी जाती है। इसी तरह बच्चे को रुटीन काम करना सिखाना, सही तरीके से बैठना-उठनाए लोगों से मिलना आदि सिखाया जाता है।

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जिला साहू संघ चुनाव : उपाध्यक्ष प्रत्याशी ओमप्रकाश साहू ने मांगा आशीर्वाद, संगठन-अनुभव और समाजसेवा को लेकर उतरेंगे मैदान में

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राजनांदगांव। जिला साहू संघ के आगामी त्रिवार्षिक चुनाव को लेकर समाज में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। इसी कड़ी में उपाध्यक्ष पद के मजबूत दावेदार ओमप्रकाश साहू (ग्राम एवं परिक्षेत्र पदुमतरा) ने समाज के मतदाताओं से संपर्क साधते हुए समर्थन और आशीर्वाद की अपील की है। लंबे समय से सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहने के कारण समाज के विभिन्न वर्गों में उनके प्रति सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है।

श्री साहू के पास राष्ट्रीय से लेकर स्थानीय स्तर तक काम करने का लंबा अनुभव है। वे वर्तमान में अखिल भारतीय तैलिक साहू महासभा (युवा प्रकोष्ठ), नई दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हैं।

दो बार संभाल चुके हैं प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष का जिम्मा
ओमप्रकाश साहू का संगठनात्मक ट्रैक रिकॉर्ड काफी मजबूत रहा है। वे दो बार प्रदेश साहू संघ (युवा प्रकोष्ठ), रायपुर में कार्यकारी अध्यक्ष का दायित्व निभा चुके हैं। इसके अलावा जिला साहू संघ राजनांदगांव के युवा प्रकोष्ठ में भी कार्यकारी अध्यक्ष सहित विभिन्न पदों पर रहकर उन्होंने युवाओं को संगठन से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है।

जनप्रतिनिधि और धार्मिक क्षेत्र का भी अनुभव
पूर्व जनपद सभापति: सामाजिक कार्यों के साथ-साथ उन्हें प्रशासनिक और जनप्रतिनिधि के रूप में भी काम का अच्छा अनुभव है। वे पूर्व में जनपद पंचायत राजनांदगांव के सभापति रह चुके हैं।

राम मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष: धार्मिक क्षेत्र में सक्रियता दिखाते हुए वे वर्तमान में श्री राम मंदिर ट्रस्ट समिति, पदुमतरा के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जहां वे सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं।

समाज की एकता और युवाओं की शिक्षा पर फोकस
ओमप्रकाश साहू का विजन: उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी ओमप्रकाश साहू का कहना है कि यदि समाज उन्हें अवसर देता है, तो वे समाज की एकजुटता, युवाओं के विकास, शिक्षा के प्रोत्साहन और संगठन को और अधिक पारदर्शी व सशक्त बनाने के लिए पूरी निष्ठा से काम करेंगे। उनका मुख्य लक्ष्य समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर संगठन को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

14 जून को क्रमांक (4) पर मुहर लगाने की अपील
श्री साहू ने जिला साहू संघ के सभी सम्मानित मतदाताओं से विनम्र निवेदन किया है कि आगामी 14 जून को होने वाले चुनाव में उपाध्यक्ष पद के लिए क्रमांक (4) पर मुहर लगाकर उन्हें विजयी बनाएं। उन्होंने भरोसा जताया कि समाज उनके अनुभव और सेवा भाव को देखते हुए अपना अमूल्य वोट जरूर देगा।

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किराए के मकान की घुटन से मिली मुक्ति, पीएम आवास ने संवारा ऑटो मैकेनिक का आशियाना

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राजनांदगांव। “किराए के घर को कितना भी संवारो या सजाओ, वह हमेशा पराया ही रहता है। जब बारिश होती थी, तो मकान मालिक हमें कपड़े सुखाने तक की जगह नहीं देते थे। बच्चों के खेलने पर पाबंदी थी और हर छोटी बात पर विवाद होता था। उमस भरे उस छोटे से कमरे में पूरा परिवार घुट-घुट कर जीता था। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना ने हमारी जिंदगी बदल दी और आज हमारा स्वयं का सुंदर आशियाना है।” यह भावुक कर देने वाले बोल शंकरपुर निवासी श्रीमती आशा पराते के हैं, जिनका परिवार अब अपने खुद के पक्के मकान में सुकून की जिंदगी बसर कर रहा है।

दरअसल, आशा के पति संतोष कुमार पराते पेशे से ऑटो मैकेनिक हैं। कम आय होने के कारण पत्नी और तीन बच्चों के इस छोटे से परिवार के लिए खुद का मकान बनाना एक बेहद चुनौतीपूर्ण सपना था।

खर्चों में कटौती कर खरीदी जमीन, फिर योजना से मिली मदद
संतोष पराते ने विपरीत परिस्थितियों के बीच हार नहीं मानी। अपने छोटे बेटे ऋषभ के जन्म के बाद उन्होंने और उनकी पत्नी ने पेट काटकर, अपने दैनिक खर्चों में भारी कटौती की। बूंद-बूंद से घड़ा भरने की तर्ज पर उन्होंने पैसे जोड़े और साल 2023 में एक छोटा सा जमीन का टुकड़ा खरीदा। जमीन खरीदने के बाद पक्का मकान बनाने के लिए उन्होंने नगर पालिक निगम में आवेदन किया। कुछ ही दिनों के भीतर उन्हें ‘प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0’ (शहरी) के तहत मकान बनाने की शासकीय स्वीकृति मिल गई। किस्तों में मिली राशि और खुद की जमापूंजी से आज उनका सर्वसुविधायुक्त पक्का मकान बनकर तैयार है, जिसमें टाइल्स वाले कमरे, सुंदर आंगन और व्यवस्थित किचन है।

राजनांदगांव में तेजी से स्वीकृत हो रहे आवास
योजना की प्रगति: राजनांदगांव शहर में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 शहरी के माध्यम से अब तक कुल 869 आवासों की स्वीकृति बी.एल.सी. (हितग्राही द्वारा स्वयं निर्माण) घटक के तहत शासन से प्राप्त हो चुकी है।

निर्माणाधीन मकान: महापौर श्री मधुसूदन यादव एवं निगम आयुक्त श्री अतुल विश्वकर्मा के कुशल मार्गदर्शन में नगर निगम की टीम तेजी से काम कर रही है। अब तक शहर के विभिन्न वार्डों में 54 आवासों का निर्माण पूरी तरह से संपन्न हो चुका है, जबकि 520 आवास निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं।

पूरे परिवार ने जताया प्रशासन का आभार:
अब मानसून की आहट के बीच संतोष पराते का परिवार बेहद खुश है। अब उन्हें बारिश में छत टपकने या मकान मालिक की प्रताड़ना का कोई डर नहीं है। अपनी खुशियों को साझा करते हुए मैकेनिक संतोष और उनकी पत्नी आशा ने देश के नेतृत्व और नगर निगम की पूरी टीम को सहृदय धन्यवाद दिया है, जिनकी वजह से आज उनके बच्चों को अपने घर के आंगन में खुलकर हंसने और खेलने का अधिकार मिला है।

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खेल

महक नरवासे बनीं भारतीय अंडर-19 टीम की उपकप्तान, कलेक्टर ने दी बधाई

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राजनांदगांव। जिले की प्रतिभाशाली क्रिकेटर महक नरवासे को भारतीय अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। उन्हें टी-20 और वनडे दोनों प्रारूपों में टीम का उपकप्तान नियुक्त किया गया है।

इस उपलब्धि पर कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव एवं वनमंडलाधिकारी श्री आयुष जैन ने महक नरवासे को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। अधिकारियों ने कहा कि महक ने अपनी मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण से जिले, प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है।

कलेक्टर ने इसे जिले के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि महक की यह सफलता युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि निरंतर अभ्यास और लगन से किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

उल्लेखनीय है कि भारत और श्रीलंका के बीच अंडर-19 महिला टीम की टी-20 श्रृंखला 22 जून से शुरू होगी, जिसके बाद वनडे मुकाबले खेले जाएंगे। महक नरवासे दोनों प्रारूपों में उपकप्तान की भूमिका निभाएंगी।

महक की इस उपलब्धि से जिले में खेल प्रेमियों और नागरिकों में उत्साह का माहौल है तथा उन्हें लगातार बधाइयां मिल रही हैं।

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