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रायपुर

कांग्रेस प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने स्काईवॉक के भ्रष्टाचार की जांच की मांग मुख्यमंत्री से किया

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रायपुर। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने स्काईवॉक में भ्रष्टाचार की जांच की मांग के लिये मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि इस शिकायत पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान राजधानी रायपुर में तत्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल में स्काईवॉक प्रोजेक्ट के संबंध में की गई अनियमितता और भ्रष्टाचार के संबंध में आकर्षित करना चाहता हूँ।
तत्कालीन भाजपा सरकार के लोक निर्माण मंत्री श्री राजेश मूणत द्वारा बिना किसी आवश्यकता के रायपुर शहर में एक स्काई वॉक बनाने का प्रोजेक्ट अपने रसूख का प्रयोग करके पास करवा दिया जिसका कोई औचित्य या आवश्यकता ही नहीं थी ।
जनता द्वारा भी स्काई वॉक निर्माण के प्रोजेक्ट को लेकर तत्कालीन सरकार का विरोध किया गया था तथा मंत्री श्री मूणत जी के मंसूबों को लेकर प्रश्न चिन्ह लगाया गया था। उक्त प्रोजेक्ट तत्कालीन भाजपा सरकार और लोक निर्माण विभाग के मंत्री रहे राजेश मूणत के भ्रष्टाचार के जीते जागते उदाहरण के रूप में रायपुर में मौजूद है।
मैं आपके संज्ञान में स्काईवॉक प्रोजेक्ट के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य लाना चाहता हूँ, मुझे उम्मीद है कि यदि इन तथ्यों की जांच की जाये तो इससे इस प्रोजेक्ट हुए घोटाले, अनियमितता, भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया जा सकेगा।
1. 50 करोड़ रूपये से अधिक लागत के किसी भी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिये राज्य शासन के आदेशानुसार पी.एफ.आई.सी. (PFIC ) की स्वीकृति के उपरांत ही किसी भी विभाग द्वारा निर्मित किया जा सकता है। रायपुर में स्काई वॉक निर्माण से संबंधित प्रोजेक्ट को वर्ष 2017 के माह मार्च में ( जानबूझकर ) रू. 49.08 करोड़ का बनाकर लोक निर्माण विभाग द्वारा स्वीकृति जारी की गई। इस प्रोजेक्ट की लागत जानबूझकर 50 करोड़ रूपये से कम रखी गई ताकि पीएफआईसी की स्वीकृति न लेनी पड़े।
2. जल्द ही दिसंबर 2017 में इस प्रोजेक्ट की तकनीकी कीमत को बढ़ाकर विभाग द्वारा 81. 69 करोड़ रूपये करने का प्रस्ताव वित्त विभाग को दिया गया। पी.एफ.आई.सी. (PFIC ) की कमेटी के अध्यक्ष मुख्य सचिव होते हैं तथा अन्य विभागों के सचिव इसके सदस्य होते हैं। इस कमेटी में अन्य बातों के अलावा इस बात का भी परीक्षण किया जाता है कि इतनी बड़ी धनराशि की अधोसंरचना परियोजना वास्तव में पर्याप्त जनोपयोगी की है भी या नहीं।
3. यह ध्यान देने योग्य बात यह है कि Revised Technical Estimate (संशोधित तकनीकी प्राक्कलन) में Escalation clause का प्रावधान कर 5.83 करोड़ किया गया, जबकि यह प्रावधान मूल प्राक्कलन में ही रखा जाना चाहिए था। इसी प्रकार Utility Shifting में मूल प्रावधान मात्र रू. 90 लाख रखा गया, जबकि माह दिसंबर तक इस पर रू. 5.94 करोड़ व्यय कर दिये गये थे। इससे स्पष्ट होता है कि ऐसी सामान्य सी चीजें मूल प्राक्कलन में सिर्फ इसलिये नहीं रखी गयी थी ताकि प्रस्ताव 50 करोड़ रूपये से कम का बने व विभाग को यह प्रस्ताव पी.एफ.आई.सी में ना लाना पड़े, जहां इस प्रकार के अतिरंजित अपव्यय से संबंधित अधोसंरचना प्रस्तावों को रोका जा सकता था। यह इस प्रोजेक्ट के पीछे की आपराधिक मानसिकता को दर्शाता है।
4. ध्यान देने योग्य बात यह है कि लोक निर्माण विभाग ने दिनांक 04.02.2017 को मूल टेंडर जारी किया, दिनांक 20.02.2017 को निविदा प्राप्त कर ली, जबकि प्रकरण की तकनीकी व शासकीय प्रशासकीय स्वीकृति दिनांक 08.03.2017 को जारी की गई। इससे स्पष्ट है विभागीय मंत्री के दबाव में, अधिकारी बिना नियमों का पालन किये कार्य कर रहे थे।
5. यह अत्यन्त गंभीर विषय है कि मंत्री राजेश मूणत ने दिनांक 23.04.2018 को अचानक स्काई वॉक के Architectural View में सुधार करने हेतु 12 परिवर्तन के निर्देश दिये जिनका कोई Technical Justification पूरे प्रस्ताव में कहीं नजर नहीं आता है। अकेले सिविल कार्य ही रू. 15.69 करोड़ से बढ़ा दिया गया। प्रोजेक्ट की कीमत बढ़ने के कारणों में अन्य कारणों के अलावा
1. ACP Wall cladding को सम्मानित किया गया, जो गैर जरूरी था।
2. 8 स्थानों पर दुकानों का निर्माण सम्मिलित किया गया, जो गैर जरूरी था।
3. Chequered Tiles के स्थान पर Vitrified Tiles का प्रावधान सम्मिलित किया गया, जो गैर जरूरी था।
इससे यह प्रतीत होता है कि तत्कालीन मंत्री राजेश मूणत, संबंधित ठेकेदार को अधिक भुगतान कराना चाहते थे।
6. यह टेंडर From अर्थात Item rate का Tander था इस प्रकार के टेंडर में यदि Quantity 25 प्रतिशत से अधिक बढ़ती है तो प्रत्येक Item का मार्केट रेट Analysisकर ही नया Estimate बनाया जाता है। लोक निर्माण विभाग तथा वित्त विभाग ने बिना यह किये ठेकेदार को अनुचित फायदा पहुचाने हेतु पुनरीक्षित स्वीकृति जारी की।
7. राजेश मूणत ने आपराधिक षडयंत्र करते हुये माह दिसंबर 2018 में प्रक्रिया का पालन न करते हुये बड़ी अधोसंरचना परियोजना, बिना पी.एफ.आई.सी के अनुमति के रू. 77.01 करोड़ की प्राशसकीय स्वीकृति जारी की। तत्कालीन वित्त सचिव तथा तत्कालीन वित्त मंत्री मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी इसमें गंभीर अनियमितताएं करते हुए तथा प्रक्रियाओं का पालन किये बिना इसकी वित्तीय सहमति/ अनुमति जारी की।
8. तीसरी अत्यंत गंभीर अनियमितता यह पाई गई कि दिनांक 05.12.2018 को जब चुनाव आचरण संहिता लागू थी तथा प्रदेश में विधानसभा के चुनाव हो चुके थे, तब विभागीय सचिव ने ताबड़तोड़ Revised Administrative Approvel हेतु वित्त विभाग को प्रस्ताव भेजा तथा तत्कालीन वित्त मंत्री व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी ताबड़तोड़ स्वीकृति प्रदान कर दी, जबकि चुनाव हो चुका था व Model code of conduct के हिसाब से ऐसा करना अपवर्जित था। वित्त विभाग ने 11 दिसंबर 2018 को सुविधा की स्वीकृति जारी की। इससे प्रतीत होता है कि इस प्रकरण में अपराधिक षडयंत्र कर स्वीकृति जारी की गई जो पूर्णता गलत मंशा से की गई है।
भारतीय जनता पार्टी द्वारा अपने 15 वर्ष शासन काल में जिस प्रकार से शासकीय धन का दुर्विनियोजन किया, भ्रष्टाचार किया उसका एक बहुत छोटा सा उदाहरण स्काईवॉक प्रोजेक्ट है जो दिन प्रतिदिन रायपुर की जनता को उनके साथ हुये विश्वघात, उपेक्षा और धोखाधड़ी की याद दिलाता है।
जनता को राहत तभी मिलेगी जब इस मामले की गंभीरता से जांच की जायेगी तथा जनता के असली दोषियों को जनता के सामने पेश किया जायेगा। अतः आपसे निवेदन है कि कृपया स्काईवॉक प्रोजेक्ट के संबंध में किये गये भ्रष्टाचार, घोटाले अनियमितता की जांच करके जनता को न्याय दिलाने की कृपा करें।

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छत्तीसगढ़

बिरसा मुंडा जयंती पर युवाओं को मिला समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का संदेश

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रायपुर। महान स्वतंत्रता सेनानी और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर मंगलवार को ऑल वॉलंटरी एसोसिएशन फाउंडेशन द्वारा विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में युवाओं और आदिवासी समाज से भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों को अपनाकर समाज व राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के निदेशक डॉ. हेमशंकर जेठमल साहू ने की। शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर संस्था के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएं, युवा एवं विभिन्न आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

डॉ. साहू ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने अपने जीवन में शोषण और अन्याय के खिलाफ संघर्ष करते हुए आदिवासी समाज को नई दिशा दी। उन्होंने कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनका जीवन साहस, आत्मसम्मान और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

उन्होंने युवाओं से शिक्षा, संगठन और आत्मविश्वास के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया। कहा कि युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और यदि वह सही दिशा में आगे बढ़े तो समाज में व्यापक परिवर्तन संभव है।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज में जागरूकता फैलाने, सामाजिक कुरीतियों को दूर करने और लोगों को उनके अधिकारों के प्रति सजग बनाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके नेतृत्व में चला जनआंदोलन आज भी सामाजिक न्याय और स्वाभिमान की प्रेरणा देता है।

इस दौरान संस्था के सदस्यों ने आदिवासी समाज के उत्थान, शिक्षा के प्रसार, युवाओं के कौशल विकास और सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। संस्था ने भविष्य में भी भगवान बिरसा मुंडा के विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता अभियान और संगोष्ठियों के आयोजन की घोषणा की।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने भगवान बिरसा मुंडा के बताए मार्ग पर चलने तथा समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कार्य करने की शपथ ली। साथ ही उनके विचारों और योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प भी दोहराया।

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कोंडागांव

खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ें, सालभर मिलेगी आय : विवेक ठाकुर

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रायपुर/कोंडागांव। कृषि क्षेत्र में किसानों की आय को दोगुना करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अब पारंपरिक ढर्रे से बाहर निकलना होगा। किसानों को आधुनिक तकनीक, बहुफसली खेती और बाजार आधारित उत्पादन प्रणाली को अपनाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यह बात राज्यसभा सांसद श्रीमती फूलोदेवी नेताम के प्रतिनिधि विवेक ठाकुर ने किसानों से किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और किसान उत्पादक कंपनियों से जुड़कर सामूहिक रूप से कार्य करने का आह्वान करते हुए कही।

श्री ठाकुर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा छोटे और सीमांत किसानों का है। अकेले खेती करने के कारण इन किसानों को उन्नत बीज, खाद, उर्वरक, सिंचाई के साधन और सबसे बढ़कर उपज का उचित मूल्य (विपणन) पाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यदि यही किसान एफपीओ या किसान उत्पादक कंपनी के रूप में संगठित होकर काम करें, तो उन्हें सरकारी योजनाओं, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बड़े बाजारों तक पहुंच आसानी से मिल सकती है। इससे न सिर्फ खेती की लागत घटेगी, बल्कि उत्पादन और मुनाफे में भी बड़ी वृद्धि होगी।

सांसद प्रतिनिधि ने फसल विविधीकरण पर जोर देते हुए कहा कि किसानों को केवल एक ही फसल (धान) पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन, सब्जी, फल, मक्का और छत्तीसगढ़ के पारंपरिक मिलेट्स जैसे कोदो-कुटकी व अन्य नकदी फसलों की खेती की जानी चाहिए। बहुफसली खेती से जहां एक ओर भूमि की उर्वरा शक्ति सुरक्षित रहती है, वहीं दूसरी ओर किसानों को साल के बार Belonging महीने आय के स्रोत मिलते रहते हैं। उन्होंने प्राकृतिक और जैविक खेती को अपनाने की भी वकालत की।

विवेक ठाकुर ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ FPO के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारा जा सकता है।

उन्होंने बताया कि किसान उत्पादक कंपनियां किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने, उनके उत्पादों की ब्रांडिंग करने और बिचौलियों से मुक्त कर बेहतर मूल्य दिलाने में सेतु का काम कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योग, प्रसंस्करण इकाइयां (प्रोसेसिंग यूनिट) और वैल्यू एडिशन (मूल्य संवर्धन) गतिविधियों को बढ़ावा देने की सख्त जरूरत है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा होगा। उन्होंने क्षेत्र के युवाओं और महिलाओं को भी कृषि आधारित स्टार्टअप और उद्यमों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

श्री ठाकुर ने अंत में अपील की कि यदि छत्तीसगढ़ के किसान संगठित होकर आधुनिक कृषि मॉडल को अपनाते हैं, तो आने वाले समय में हमारा प्रदेश कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में देश के भीतर एक नई और अनूठी पहचान स्थापित करेगा।

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रायपुर

मदर्स डे पर सौगात : रायपुर महिला जेल में वीडियो कॉलिंग सिस्टम का शुभारंभ

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रायपुर। आज मदर्स डे के ममतामयी अवसर पर रायपुर की महिला जेल में बंदिनियों के लिए खुशियों की एक नई किरण जगी है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की घोषणा के अनुरूप, जेल प्रशासन ने महिला बंदिनियों को प्रिजन इनमेट वीडियो कॉलिंग सिस्टम का बहुप्रतीक्षित तोहफा दिया है।

अपनों से दूरी होगी कम

वीडियो कॉलिंग की सुविधा से जेल विभाग और बीएसएनएल के बीच हुए अनुबंध के तहत इस सिस्टम को स्थापित किया गया है। अब महिला बंदी अपने परिजनों और अधिवक्ताओं से सीधे वीडियो कॉल के जरिए संवाद कर सकेंगी, जिससे उनके मानसिक संबल और कानूनी विमर्श में मदद मिलेगी।

हुनर को मिला सम्मान

निश्चय कार्यक्रम के अंतर्गत कौशल विकास का प्रशिक्षण पूर्ण करने वाली 38 महिला बंदिनियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह उनके पुनर्वास और भविष्य में स्वावलंबन की दिशा में एक बड़ा कदम है।

जेल में अपनी माताओं के साथ रह रहे 14 मासूम बच्चों को विभाग की ओर से विशेष उपहार वितरित किए गए, जिससे बच्चों के चेहरे पर खिली मुस्कान खिल गया और जेल परिसर का माहौल उत्सवमय हो गया। इस संवेनदनशील पहल के शुभारंभ अवसर पर जेल और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से श्री हिमांशु गुप्ता (डीजी, जेल), श्री योगेश सिंह क्षत्री (जेल अधीक्षक), श्री विजय छबलानी (प्रतिनिधि, ठैछस्), सुश्री गरिमा पांडेय (प्रभारी, महिला जेल) एवं समस्त जेल स्टाफ, संबंधित महिला बंदिनी उपस्थित रहे। यह पहल न केवल बंदिनियों को उनके मानवाधिकारों और परिवार से जोड़ने का माध्यम बनेगी, बल्कि जेल सुधार की दिशा में तकनीकी समावेश का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी पेश करेगी।

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