राजनांदगांव
आंखों का इलाज कराने के बाद अब मासूम काव्या भी देखने लगी है अपनी दुनिया
राजनांदगांव। स्वास्थ्य सेवा के लिए समर्पित विभिन्न सरकारी योजनाओं व डॉक्टरों की संवेदनशीलता से जुड़ा एक ऐसा प्रेरक उदाहरण सामने आया है, जिसके परिणामस्वरूप जन्म के समय से ही रेटिनोपैथी नामक विकृति से पीड़ित एक बच्ची की दुनिया अब रोशनी से जगमगा उठी है। यानी काव्या की भी आंखें अब वह सारा कुछ देखने लगी हैं जो सामान्य और स्वस्थ आंखों को दिखाई देता है। बच्ची के पूरे उपचार में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) योजना और स्टेट नोडल एजेंसी काफी मददगार साबित हुई है।
बमुश्किल चार महीने की आयु में एक दुर्लभ श्रेणी के ऑपरेशन के दौर से गुजरने के बाद बच्ची अब स्वस्थ है। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता मिलने के बारे में नोडल अधिकारी डॉ. बीएल तुलावी ने बतायाः जिले डोंगरगढ़ विकासखंड के रीवागहन निवासी मंडावी परिवार की चार महीने की बेटी काव्या (परिवर्तित नाम) जन्म के समय से ही आंखों की बीमारी का शिकार हो गई। आंखों की बीमारी की चपेट में आने की वजह से वह कुछ भी देख पाने में असमर्थ थी। यह पता लगने पर परिजन ने उसके इलाज का प्रयास शुरू किया। सबसे पहले जिला मुख्यालय के ही सरकारी अस्पतालों में जाकर आंख के डॉक्टरों से जांच कराई गई, लेकिन परेशानी जटिल होने के कारण स्थानीय स्तर पर उसका इलाज संभव नहीं हुआ। इसके बाद बच्ची को राजधानी रायपुर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां जांच करने पर पता लगा कि काव्या की आंखों की बीमारी को ठीक करने के लिए एक ऑपरेशन आवश्यक है, लेकिन वह ऑपरेशन आंबेडकर अस्पताल में कर पाना संभव नहीं है, बल्कि ऑपरेशन हैदराबाद स्थित एलवी प्रसाद इंस्टीट्यूट में कराया जा सकता है। आंबेडकर अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञों की इस राय पर काव्या को ऑपरेशन के लिए हैदराबाद ले जाने की तैयारी शुरू की गई। एलवी प्रसाद इंस्टीट्यूट में भर्ती व इलाज से संबंधित विभिन्न औपचारिकता व प्रक्रिया पूरी करने के बाद राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) की टीम और स्टेट नोडल एजेंसी के माध्यम से राज्य शासन के द्वारा एलवी प्रसाद इंस्टीट्यूट में काव्या के इलाज के खर्च की पूरी राशि जमा कराई गई और काव्या का ऑपरेशन कराया गया जो सफल रहा। परिजनों के लिए यह किसी उत्सव से कम नहीं है कि सफलतापूर्वक ऑपरेशन होने के पश्चात काव्या अब स्वस्थ है और उसकी आंखें सब कुछ देख पा रही हैं।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी ने बतायाः लोगों को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवा व सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कलेक्टर डोमन सिंह के दिशा-निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लागातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी दौरान चार महीने की एक बच्ची की भी आंखों का सफलतापूर्वक ऑपरेशन कराया गया है। पीड़ित बच्ची जन्म के समय से ही रेटिनोपैथी ऑफ प्री मैच्योरिटी की चपेट में आ गई थी, लेकिन समुचित उपचार होने के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ है, जिससे परिजन प्रसन्न हैं। बच्ची के उपचार में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चिरायु की टीम और स्टेट नोडल एजेंसी ने सराहनीय भूमिका निभाई है।
रेटिनोपैथी ऑफ प्री मैच्योरिटी (आरओपी), आंखों से जुड़ा एक विकार है जिसमें देखने की क्षमता में कमी आ सकती है। मुख्य रूप से यह समस्या 1,250 ग्राम या इससे कम वजन वाले प्री मैच्योर शिशुओं को प्रभावित करती है जो 31 सप्ताह के गर्भ से पहले पैदा होते हैं। वहीं पूर्ण गर्भावस्था की अवधि 38 से 42 सप्ताह की होती है। आरओपी से ग्रस्त शिशुओं में दोनों आंखों की रेटिना पर असामान्य रूप से रक्त वाहिकाएं विकसित हो जाती हैं। रेटिना ऊतक की परत होती है जो आंख के पिछले हिस्से में मौजूद होती है और इसी की मदद से देखना संभव हो पाता है।
राजनांदगांव
गायत्री मंत्र की अनिवार्यता पर ईसाई समाज मुखर, सचिव को पत्र सौंप जताई कड़ी आपत्ति
राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में गायत्री मंत्र की अनिवार्यता के फैसले पर विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार द्वारा 16 जून से सभी शासकीय स्कूलों में सुबह और शाम की प्रार्थना के दौरान गायत्री मंत्र सहित विभिन्न मंत्रों के उच्चारण को अनिवार्य किए जाने के आदेश का ईसाई समाज ने कड़ा विरोध किया है। समाज ने इस नियम को अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों और शिक्षकों पर थोपने को गलत बताते हुए इसे स्वैच्छिक रखने की मांग की है।
इस संबंध में ईसाई समाज के अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने राज्य के मुख्य सचिव को एक आधिकारिक पत्र सौंपकर अपनी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उन्होंने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
संविधान के अनुच्छेदों का दिया हवाला
मुख्य सचिव को लिखे पत्र में ईसाई समाज के अध्यक्ष ने देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे और संवैधानिक अधिकारों की याद दिलाई है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है। संविधान का अनुच्छेद 25 और 28 साफ तौर पर यह प्रावधान करता है कि शासकीय या सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में किसी भी छात्र या शिक्षक को किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान या प्रार्थना के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। सरकार का यह नया नियम सीधे तौर पर संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
धार्मिक आस्था और अंतःकरण की स्वतंत्रता पर चोट
श्री पॉल ने स्पष्ट किया कि गायत्री मंत्र हिंदू सनातन धर्म की आस्था और पवित्रता का एक अत्यंत आदरणीय प्रतीक है, और समाज इसका पूरा सम्मान करता है। लेकिन, ईसाई समुदाय के बच्चों और शासकीय सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए इसका उच्चारण अनिवार्य करना उनकी अपनी धार्मिक मान्यताओं और अंतःकरण की स्वतंत्रता के विपरीत है। किसी पर भी उसकी इच्छा के विरुद्ध कोई धार्मिक आचरण नहीं थोपा जाना चाहिए।
स्कूलों के समावेशी माहौल को खतरा
ईसाई समाज ने चिंता जताते हुए कहा कि स्कूलों का वातावरण हमेशा से सर्वधर्म समभाव और समावेशी रहा है, जहां हर वर्ग के बच्चे एक साथ पढ़ते हैं। किसी भी एक धार्मिक विचार या मंत्र को अनिवार्य करने से अल्पसंख्यक समुदाय के मासूम बच्चों में असहजता और अलगाव की भावना पैदा हो सकती है, जो उनके मानसिक और शैक्षणिक विकास के लिए कतई उचित नहीं है।
यह है प्रमुख मांग:
ईसाई समुदाय के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के लिए गायत्री मंत्र का उच्चारण पूरी तरह स्वैच्छिक किया जाए। उन्हें अपनी धार्मिक आस्था के अनुरूप इस प्रार्थना में सम्मिलित होने या न होने का अधिकार और संरक्षण दिया जाए।
ईसाई समाज ने उम्मीद जताई है कि सरकार लोकतंत्र, संवैधानिक अधिकारों और अल्पसंख्यक समाज की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए इस नियम में तत्काल आवश्यक संशोधन करेगी।
अपराध
घर में अकेली पाकर नाबालिग से दुष्कर्म, तुमडीबोड़ पुलिस ने चंद घंटों में आरोपी को दबोचा
राजनांदगांव। महिला एवं बाल अपराधों के खिलाफ राजनांदगांव पुलिस द्वारा चलाए जा रहे कड़े अभियान के तहत तुमडीबोड़ पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई की है। घर में अकेली पाकर 17 वर्षीय एक नाबालिग बालिका के साथ जबरदस्ती दुष्कर्म करने वाले शातिर आरोपी को पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चंद घंटों के भीतर ही गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपी के खिलाफ पुलिस ने विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
सूने मकान का आरोपी ने उठाया फायदा
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मामला तुमडीबोड़ चौकी क्षेत्र के ग्राम धौराभाठा का है। पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर एवं नगर पुलिस अधीक्षक श्रीमती वैशाली जैन के पर्यवेक्षण में महिला और बालकों से जुड़े अपराधों पर पुलिस लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। इसी कड़ी में 14 जून को पीड़िता की मां ने तुमडीबोड़ चौकी पहुंचकर आपबीती सुनाई और लिखित आवेदन देकर रिपोर्ट दर्ज कराई।
शिकायत के मुताबिक, रविवार को प्रार्थिया अपने पति के साथ किसी काम से राजनांदगांव गई हुई थी। घर पर उनकी 17 वर्षीय बेटी अकेली थी। इसी दौरान सूनेपन का फायदा उठाकर पड़ोस में रहने वाला आरोपी कुणाल जोशी (20 वर्ष) उनके घर में जबरन दाखिल हो गया।
पड़ोसियों ने दी सूचना, कूलर के पीछे छिपा मिला आरोपी
दोपहर करीब 1:00 बजे जब पड़ोसियों को कुछ आहट हुई और घर में किसी अज्ञात व्यक्ति के घुसने का शक हुआ, तो उन्होंने तत्काल फोन पर इसकी सूचना पीड़िता के माता-पिता को दी। सूचना मिलते ही दंपती दोपहर करीब 2:00 बजे आनन-फानन में अपने घर वापस लौटे।
दरवाजा खुलते ही भागा आरोपी
जब माता-पिता घर पहुंचे तो अंदर का दरवाजा बंद था। काफी आवाज देने और खटखटाने के बाद जब दरवाजा खुला, तो भीतर का नजारा देख उनके होश उड़ गए। संदेह के आधार पर जब घर की तलाशी ली गई, तो आरोपी कुणाल जोशी कमरे में रखे कूलर के पीछे छिपा हुआ पाया गया। जैसे ही माता-पिता ने शोर मचाकर पड़ोसियों को एकत्र किया, आरोपी मौका पाकर वहां से भाग निकला। इसके बाद जब मां ने डरी-सहमी बेटी से पूछताछ की, तो पीड़िता ने रोते हुए आपबीती सुनाई और बताया कि आरोपी ने उसके साथ जबरदस्ती अनाचार किया है।
बीएनएस और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज
मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए तुमडीबोड़ चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक धनीराम नारंगे ने वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में तत्काल टीम गठित की। पुलिस ने आरोपी कुणाल जोशी के खिलाफ अपराध क्रमांक 258/26, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 331(4), 64 तथा धारा 04 पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पुलिस की मुस्तैदी के कारण घेराबंदी कर आरोपी को चंद घंटों के भीतर ही उसके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया गया। वैधानिक कार्रवाई पूरी होने के बाद सोमवार को आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से माननीय न्यायालय के आदेश पर उसे जेल दाखिल कर दिया गया है।
सराहनीय भूमिका: इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई में चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक धनीराम नारंगे, सहायक उपनिरीक्षक चुन्नीलाल साहू, आरक्षक लोकेश कुमार साहू, महिला आरक्षक रानी साहू, महिला आरक्षक पूनम बैस तथा तुमडीबोड़ चौकी स्टाफ की मुख्य और सराहनीय भूमिका रही।
राजनांदगांव
नीट (यूजी) पुनर्परीक्षा की तैयारियां तेज, 21 जून को होगी परीक्षा, 6 केंद्रों में 1982 परीक्षार्थी शामिल होंगे
राजनांदगांव। जिले में नीट (यूजी) 2026 पुनर्परीक्षा के सफल एवं शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसी कड़ी में कलेक्टोरेट सभाकक्ष में केंद्राध्यक्षों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर परीक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
बैठक में बताया गया कि नीट (यूजी) 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून 2026 को आयोजित होगी। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5.15 बजे तक संपन्न होगी, जबकि परीक्षार्थियों को सुबह 11 बजे से परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिया जाएगा। जिले में कुल 6 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें 1982 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे।
परीक्षा की तैयारियों को परखने के लिए 20 जून को सभी परीक्षा केंद्रों में मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इसमें प्रवेश प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, तकनीकी व्यवस्थाओं और परीक्षा संचालन से जुड़े सभी प्रोटोकॉल का परीक्षण किया जाएगा।
अधिकारियों ने केंद्राध्यक्षों को एनटीए द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही परीक्षा की गोपनीयता, पारदर्शिता एवं निष्पक्षता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। परीक्षा सामग्री के सुरक्षित संधारण, पहचान सत्यापन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया।
बैठक में सभी केंद्राध्यक्षों से आपसी समन्वय के साथ परीक्षा को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में सहयोग करने की अपील की गई। इस अवसर पर संबंधित विभागों के अधिकारी एवं सभी परीक्षा केंद्रों के केंद्राध्यक्ष उपस्थित रहे।
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