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राजनांदगांव

बच्चों को बाद में दीजिए कार, पहले दीजिए संस्कार तो जीवन भर सुखी रहेगा घर परिवार : राष्ट्रसंत ललितप्रभजी

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राजनांदगांव। अच्छे संस्कार आदमी को कभी भी अंधेरे की ओर नहीं जाने देते, अच्छे संस्कार हमेशा आदमी को उजाले की तरफ लेकर जाते हैं। जिंदगी में जितनी जरूरत शिक्षा की होती है, उतनी ही जरूरत संस्कारों की हुआ करती है। हम सबने यह पढ़ा और जाना है कि राम-कृष्ण-महावीर बचपन में गुरुकुल जाया करते थे, वहां उन्हें शिक्षा और दीक्षा दोनों दी जाती थी। जीवन में शिक्षा के साथ दीक्षा अर्थात् संस्कारों की महती आवश्यकता होती है। संस्कार ही वो पूंजी होती है जो आदमी के बुढ़ापे तक काम आती है, संस्कार वो पूंजी होती है जो उसके दादा-दादी के, माता-पिता के काम आती है। संस्कार वो पूंजी होती है जो आदमी के पग-पग पर काम आती है।’’
ये प्रेरक उद्गार राष्ट्रसंत महोपाध्याय श्री ललितप्रभ सागरजी महाराज ने शुक्रवार को श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ द्वारा सदर बाजार स्थित जैन बगीचा प्रांगण में आयोजित तीन दिवसीय प्रवचन माला के समापन पर कैसे लाएं जीवन में संस्कार विषय पर व्यक्त किए।
संतश्री ने कहा कि जिंदगी तो सांप-सीढ़ी के खेल की तरह है। जीवन में हमेशा यह बोध हमेशा बनाए रखें कि संस्कार उस सांप-सीढ़ी के खेल के सीढ़ी की तरह है जो हमेशा ऊपर ले जाया करती है और गलत आदतें उस सांप की तरह है जो आदमी को हमेशा नीचे गर्त में ले जाया करता है। अंतिम चरण में जाकर भी यदि जीवन में गलत आदतों का सांप यदि पलता रहा तो आदमी ऊपर जाकर सीधा वापस धड़ाम से नीचे गिर जाता है। लिबास बदलोगे तो चेहरा सुंदर लगेगा और पसीना बहाओगे तो जिंदगी सुंदर हो जाएगी।
संस्कारों की जरूरत है जन्म से लेकर मृत्यु तक
संतप्रवर ने कहा कि संस्कारों की हमारे जिंदगी में पग-पग पर जरूरत है। हमारे यहां तो गर्भ को भी संस्कार माना गया। जन्म, विवाह और यहां तक कि मृत्यु को भी संस्कार माना गया। जन्म से लेकर मृत्यु तक आदमी को संस्कारों की जरूरत होती है। वे माता-पिता अधम होते हैं जो अपने बच्चों को जन्म देकर भाग्य के भरोसे छोड़ देते हैं, वे माता-पिता मध्यम होते हैं जो अपने बच्चों को जन्म से लेकर बहुत सारी सुविधाएं देते हैं। जितना आप बच्चों की शिक्षा और उनकी सुविधाओं के सजग हैं, उतने ही सजग उनमें संस्कारों के बीजारोपण के लिए सजग हो जाएं। ताकि बच्चे अपने अच्छे और नेक भविष्य का निर्माण कर सकें। बच्चों को संस्कारित करने के लिए बड़ों को घर का माहौल हमेशा अच्छा रखना चाहिए। बच्चे रौंधी हुई कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं। यह आपके हाथ में हैं, आप चाहे तो उस मिट्टी से मंगल कलश या ठंडा पानी देने वाली सुराही बना लें और चाहे तो जी का जंजाल पैदा करने वाली चिलम बना लें।
ससुराल भेजने से पहले बेटी को बनाएं परफेक्ट
संतश्री ने कहा कि हर महिला अपने जीवन में एक बात हमेशा याद रखे कि वह अपनी बहु के साथ हमेशा मां की भूमिका निभाए और अपनी बेटी के साथ हमेशा सास की भूमिका निभाए। यह बहुत गहराई की बात है, अगर आप चाहते हैं कि आपकी बेटी सुसराल जाकर यश और गौरव लेकर आए तो उसके सुसराल जाने से पांच साल पहले उसके साथ एक सास की भूमिका अदा कर दो, ताकि उसे आप ससुराल के लिए परफेक्ट तैयार कर सकें। अपनी बेटी के लिए इससे बड़ा दहेज और क्या हो सकता है कि आपने अपनी बेटी को उसके पांव पर खड़ा करके, परफेक्ट तैयार करके उसे ससुराल के लिए रवाना किया है। अमरीका के पूर्व राष्टÑपति अब्राहम लिंकन ने अपने बेटे के स्कूल शिक्षक को पत्र लिखकर यह कहा कि मैं चाहूता हूं कि आप मेरे बेटे को राष्टÑपति का बेटा न समझें, उसे एक सामान्य व्यक्ति का बच्चा मानें ताकि वह भी पूरे अनुशासन से गुजरे। उसे उस हर दुविधा से गुजारें जिससे कि हर गरीब का बच्चा गुजरता है ताकि वह अपने जीवन के लिए परफेक्ट तैयार हो सके।
बच्चों के मोह में धृतराष्ट्र न बन जाएं
संतश्री ने कहा कि अगर आप बच्चों के मोह में धृतराष्ट्र बन गए तो मानकर चलना एक दिन आपके बच्चों में से दुर्योधन और दु:शासन बाहर निकलकर आएंगे। याद रखें- दुनिया में जब भी किसी ने खोया है तो सोकर खोया है, और जब भी किसी ने पाया है तो जाग कर पाया है। नौ-नौ, दस-दस बजे तक घर पर बच्चे सोए हुए हैं, यह घर के लिए ज्यादा अच्छी बात नहीं है। ऐसा कर आप अपने बच्चों को अच्छे संस्कार नहीं दे रहे हैं। जरूरत पड़ने पर आप अपने बच्चों को बहुत लाड़ दीजिए पर जब बात अनुशासन की आए तो ये हाथ लाड़ करने के लिए भी है और वक्त पड़ने पर मारने के लिए भी है। इतने कमजोर पिता मत बनिए कि बोलने के पहले सोचना पड़े कि इसको बुरा तो नहीं लग जाएगा। आज उसको बुरा लग रहा है पर कल उसका भविष्य सुधर जाएगा। अगर आपने यह सोचकर कि इसको बुरा लगेगा और कुछ नहीं कह रहे हैं तो कल उसका भविष्य बुरा हो जाएगा।
अगर आप पिता हैं तो निभाएं कुम्हार की भूमिका
संतप्रवर ने कहा कि आपको अपने बच्चों को सुघढ़ बनाने, उन्हें संस्कारवान बनाने कुम्हार की भूमिका अदा करनी होगी, जैसे कुम्हार दो हाथों से घड़ा बनाता है, ऊपर से वह घड़े को ठोंकता भी है और भीतर उसे सहलाता भी है। हर अभिभावक को अपने घर में बच्चों के लिए कुम्हार की भूमिका अदा करनी ही चाहिए। ऐसा कभी न करना- केवल ठोकोगे तो घड़ा बिगड़ जाएगा और केवल सहलाओगे तो भी घड़ा बिगड़ जाएगा। अगर बच्चे में कोई गलत चीज आ गई है तो इसका जवाबदार केवल बच्चा नहीं है, उसके दादा-दादी, मम्मी-पापा, उसके बड़े भाई-बहन भी जवाबदार हैं क्योंकि समय रहते अगर उन्होंने उस बच्चे को ठीक कर दिया होता तो आज ये नौबत नहीं आती।
समय रहते आप अपने बच्चों में सही संस्कारों का बीजारोपण कर दें। अपने बच्चों को घर का गमला मत बनाओ कि रोज पानी दो तब ही वह अपने पांव पर खड़ा रहे, उसे रोज पानी देना पड़े, अगर बना सको तो अपने बच्चों को जंगल का पौधा बनाओ जिसे कोई पानी न दे तो भी वह अपने बलबूते खड़ा रहे। ये क्या पौधे आपने खड़े कर दिए कि गमले में एक दिन पानी न दिया तो पौधे मुरझा जाए। इसीलिए आज हम एक मानसिकता बनाते हैं कि हम अपने बच्चों को कार देने की योजना बाद में बनाएंगे, संस्कार देने की योजना पहले बनाएंगे। याद रखें अगर संस्कार दिए बगैर कार दे दी तो कार गलत रास्ते पर जाएगी, पर पहले दिए हैं संस्कार उसके बाद दी है कार तो वह कार सही दिशा में जाएगी। बच्चों को केवल चाँद-सितारे छूने की प्रेरणा मत दो, अगर दे सको तो उन्हें माँ-बाप और बड़ों चरण छूने के संस्कार दो। ताकि बुढ़ापे में आपके साथ, आपके पास रहकर सुख-दुख में आपके भागीदार बन सकें। 70 फीसदी माँ-बाप आज घर में अकेले पड़े हैं और बच्चे अपनी बीवीयों को साथ लेकर बाहर निकल गए हैं। अमरीका में रहने वाले बेटे को अपनी माँ की तब याद आती है जब उसकी पत्नी की डिलिवरी का समय आता है। यही आज अनेक परिवारों की कड़वी सच्चाई है। मैं ये नहीं कहता कि बच्चों का भविष्य ना संवारों। पह इतना जरूर कहुंगा कि उनका भविष्य संवारने की चक्कर में अपना भविष्य ना बिगाड़ लेना। उनको इस तरह लायक भी ना बना दें कि वे एक दिन आपको कुछ भी ना समझें। दुनिया में सबसे पहले प्यार आदमी को अपनी माँ से मिलता है, एकमात्र माँ है जिसका प्यार जन्म से पहले नौ महीने पहले ही मिलना शुरू हो जाता है। गर्भ धारण करने के समय से ही अपनी आने वाली संतान में शुभ संस्कारों के बीजारोपण के लिए अच्छे कार्य, सद्साहित्य का अध्ययन करें।
बच्चों के सामने घर पर ना बोलें झूठ
जितना आप अपने बच्चों को लाड़-प्यार, सुविधाएं देने के लिए सजग हैं, उतने ही सजग उनके संस्कार निर्माण के लिए हो जाएं। बच्चा बड़ा हो रहा है तो सावधान रहें, घर पर आपस में कभी भी उसके सामने झूठ ना बोलें। चाहे जैसी घर में बात बिगड़ जाए पर बच्चों के सामने पति, पत्नी से और पत्नी पति से झूठ ना बोलें।
संतान वो नहीं होती जो माँ-बाप के मरने के बाद उनका अग्नि संस्कार करने के लिए आती है और संपत्ति पर कब्जा करने के लिए आती है, संतान वो होती है जो माँ-बाप के जीतेजी और उनके बुढ़ापे में उनकी सेवा में लगी होती है। जिसने माँ-बाप की सेवा नहीं की, उसे माँ-बाप की संपत्ति लेने का भी हक नहीं।
बच्चों को संस्कारवान बनाने स्वयं में लाएं सुधार
बच्चों को संस्कारवान बनाने के लिए आप अपने जीवन में यह नियम बना लें कि मैं घर का माहौल हमेशा अच्छा बनाए रखुंगा। घर के सदस्यों से हमेशा सम्मान भरी भाषा ही बोलुंगा। क्योंकि बच्चे वो नहीं सीखते जो आप कहते हैं, बच्चे वो सीखते हैं जो आप करते हैं। दूसरा यह कि घर में केवल उपदेशक मत बनिए। बातों के बादशाह बनने की बजाय आचरण के महावीर बनना ज्यादा अच्छा है। अगर सिखा सको तो बच्चों को सद्गुण सिखाएं। अपने बच्चों के साथ रोज टाइम का इनवेस्टमैंट करिए। जीवन प्रबंधन का उन्हें गुर सिखाइए। यदि बच्चा संस्कारों से हटकर जी रहा है तो उसे नजरअंदाज मत करिए। संस्कारों के प्रति हमेशा सजग-सावधान रहिए।
बच्चों को दें ये सुसंस्कार
बच्चों को विनम्रता का और पहनावे का संस्कार दीजिए। उन्हें सम्मान, सहनशीलता, सेवा-सहयोग के सद्गुण, भाषा का संस्कार अर्थात् सम्मान की भाषा बोलना सिखाएं। दिव्य सत्संग के पूर्वार्ध में डॉ. मुनिश्री शांतिप्रिय सागरजी ने कहा कि आलस्य का त्याग करें जीवन में एक्टिव बने क्योंकि आज से कभी सुखी नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि विनम्रता यह सद्गुणों का राजा है। भगवान श्रीमहावीर ने यही संदेश दिया कि विनय गुण मोक्ष का द्वार है। जो विनयवान होता है वही देव-गुरु-धर्म की आराधना कर सकता है। देशणा देने से पूर्व भगवान भी पहले धर्म संघ को प्रणाम करते हैं उसके बाद पाट पर विराजित होते हैं। नमस्कार महामंत्र का पहला शब्द णमो है। जो नमता है, वही औरों के दिलों में राज करता है। झुकाने वाला कभी महान नहीं होता, जो झुका हुआ होता है वही सबसे महान हुआ करता है। हम न केवल स्वयं विनम्र बनें अपितु बच्चों को भी विनम्र बनने की प्रेरणा दें। विनय और मुस्कान ये डेबिट कार्ड की तरह होते हैं, पहले चुकाते रहो और फिर लाभ लेते चलो। अहंकार क्रेडिट कार्ड की तरह होता है जो पहले निकाल लो तो बाद में उसे ब्याज समेत चुकता करते रहो। बड़ों को भरपूर सम्मान देना और छोटों को भरपूर प्यार देना, इसी का नाम विनम्रता है। क्योंकि बड़ों में सद्गुण हमसे ज्यादा होते हैं और छोटों के गुनाह हम सबसे कम हुआ करते हैं। हमें मन, वचन और काया से विनयवान होना चाहिए। यदि विनय गुण को धारण करना है तो सबसे पहले अपने जीवन में प्लीज, थैंक्यू और सॉरी बोलना सीख जाएं। बड़ों की आज्ञा का पालन और उनका आदर-सम्मान करें। जब बड़े बैठे हों तो कभी-भी उनके सामने स्वयं ऊपर न बैठें। जब भी कोई आपसे मिले तो सबसे पहले उन्हें हाथ जोड़कर अभिवादन करें।
जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ के अध्यक्ष मनोज बैद ने गुरुजन और सफल समाज का आभार व्यक्त किया।
मीडिया प्रभारी आकाश चोपड़ा ने बताया कि राष्ट्र संतों ने राजनांदगांव से नागपुर की ओर विहार किया‌ वे रविवार को तुमडीबोर्ड पहुंचेंगे जहां जैन स्थानक में सुबह 9:00 से 11:00 बजे तक उनके दिव्य प्रवचन और सत्संग का आयोजन होगा।

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राहुल गांधी ने अल्पसंख्यक विभाग के पदाधिकारियों से किया संवाद, संघर्ष और संगठन मजबूती पर दिया जोर

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राजनांदगांव। कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नई दिल्ली स्थित एआईसीसी मुख्यालय इंदिरा भवन में कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के पदाधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष अल्पसंख्यक विभाग इमरान प्रतापगढ़ी सहित विभाग के विभिन्न राज्यों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में राहुल गांधी ने अल्पसंख्यक विभाग के जिला अध्यक्षों एवं पदाधिकारियों से संवाद करते हुए संगठन को मजबूत बनाने और जनहित के मुद्दों पर संघर्ष को तेज करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अन्याय, भेदभाव और दमन के खिलाफ कांग्रेस पार्टी लगातार संघर्ष करती रहेगी तथा हर कार्यकर्ता के साथ मजबूती से खड़ी है।
बैठक के दौरान राहुल गांधी ने पदाधिकारियों के सुझाव और विचार भी सुने। उन्होंने कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कर संगठनात्मक गतिविधियों को और प्रभावी बनाने पर चर्चा की। राहुल गांधी ने कहा कि पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत हैं और उनकी भूमिका संगठन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण है।
बैठक के समापन पर राहुल गांधी ने उपस्थित पदाधिकारियों के साथ आत्मीय माहौल में तस्वीरें खिंचवाईं और भविष्य में भी कार्यकर्ताओं के बीच आने का भरोसा दिलाया। उनके इस व्यवहार को कार्यकर्ताओं ने प्रेरणादायी और सम्मानजनक बताया।
मंच में राजस्थान-ओडिशा प्रदेश प्रभारी अब्दुल कलाम खान सहित 9 प्रदेश जिला अध्यक्ष को संबोधित किए।
कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के नेशनल कॉर्डिनेटर एवं राजस्थान-ओडिशा प्रभारी अब्दुल कलाम खान ने राहुल गांधी और इमरान प्रतापगढ़ी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं को मिला यह स्नेह और सम्मान संगठन को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

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नई दिल्ली में राहुल गांधी से मिले विशु अजमानी, जन्मदिन की दी बधाई

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राजनांदगांव। प्रदेश कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश सचिव विशु अजमानी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के जन्मदिन के अवसर पर नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय पहुंचकर उनसे आत्मीय मुलाकात की तथा जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी के स्वस्थ, सफल एवं दीर्घ जीवन की कामना की। जन्मदिन के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में सुबह से ही नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या मौजूद रही तथा पूरे परिसर में उत्साह का माहौल देखने को मिला।
विशु अजमानी ने कहा कि राहुल गांधी हमेशा युवाओं, किसानों, मजदूरों, महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाते रहे हैं। वे लगातार लोगों के बीच जाकर उनकी बात सुनते हैं और उनकी समस्याओं को सामने रखने का काम करते हैं। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं। आम जनता के लिए किए जा रहे उनके प्रयास कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी आगे बढ़कर काम करने की प्रेरणा देते हैं। राहुल गांधी का सरल स्वभाव और लोगों के बीच लगातार सक्रिय रहना उन्हें आम जनता से जोड़े रखता है। यही कारण है कि हर वर्ग के लोग उनके प्रति अपना विश्वास और समर्थन व्यक्त करते हैं।
राहुल गांधी के जन्मदिन के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में दिनभर लोगों का आना-जाना लगा रहा। पूरे परिसर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला और कार्यकर्ताओं में विशेष उत्साह नजर आया। बड़ी संख्या में मौजूद कांग्रेसजनों ने अपने नेता के प्रति स्नेह और सम्मान व्यक्त किया। इस अवसर पर विशु अजमानी ने राहुल गांधी के उज्ज्वल भविष्य, अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घ सार्वजनिक जीवन की कामना की।

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अवैध शराब बिक्री करते युवक गिरफ्तार, 35 हजार रुपये से अधिक का सामान जब्त

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राजनांदगांव। अवैध शराब बिक्री के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत चौकी चिखली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से देशी शराब, बिक्री रकम और शराब बिक्री में प्रयुक्त मोटरसाइकिल सहित कुल 35 हजार 20 रुपये का सामान जब्त किया है।
पुलिस के अनुसार पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर के मार्गदर्शन एवं नगर पुलिस अधीक्षक वैशाली जैन के पर्यवेक्षण में जिले में अवैध शराब बिक्री, मादक पदार्थों की तस्करी और असामाजिक गतिविधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
इसी क्रम में 19 जून को चौकी चिखली पुलिस को सूचना मिली कि ग्राम बोरी स्थित शीतला तालाब पार के पास एक युवक मोटरसाइकिल में शराब रखकर अवैध रूप से बिक्री कर रहा है। सूचना पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और आरोपी गुलशन ताम्रकर पिता शिवा ताम्रकर, उम्र-24 वर्ष, निवासी बोरी वार्ड क्रमांक 7 को शराब बेचते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।
तलाशी के दौरान आरोपी की पल्सर मोटरसाइकिल क्रमांक सीजी 14-एमआर 5313 की सीट के नीचे रखी हरे रंग की बोरी से 40 पौवा सुपर 36 देशी मदिरा और 15 पौवा शोले देशी मसाला शराब बरामद की गई। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 7.200 बल्क लीटर सुपर 36 देशी शराब (कीमत 3200 रुपये), 2.700 बल्क लीटर शोले देशी मसाला शराब (कीमत 1500 रुपये), बिक्री रकम 320 रुपये तथा शराब परिवहन में प्रयुक्त पल्सर मोटरसाइकिल (कीमत 30 हजार रुपये) जब्त की है।
आरोपी के खिलाफ चौकी चिखली में धारा 34 (2) आबकारी एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया। न्यायालय में पेश करने के बाद आदेशानुसार आरोपी को जेल भेज दिया गया।
पुलिस ने बताया कि आरोपी गुलशन ताम्रकर के खिलाफ पूर्व में भी आबकारी एक्ट, आर्म्स एक्ट, मारपीट और अन्य अपराधों के कई मामले दर्ज हैं। उसके खिलाफ वर्ष 2022 में आबकारी एक्ट व आर्म्स एक्ट, वर्ष 2024 और 2025 में मारपीट एवं अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं।
इस कार्रवाई में चौकी प्रभारी उप निरीक्षक कैलाश चन्द्र मरई, प्रधान आरक्षक अरुण नेताम, महिला प्रधान आरक्षक वंदन पटले, आरक्षक आदित्य सोलंकी, गोपाल पैकरा, सुनील बैरागी, चन्द्रकपूर आयाम सहित चौकी चिखली स्टाफ की सराहनीय भूमिका रही। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अवैध शराब बिक्री और असामाजिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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