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राजनांदगांव

पर्यावरण संरक्षण : झिल्ली-पन्नी का उपयोग न करने निगम की समझाइश, नंदई और निगम कार्यालय के सामने कार्रवाई

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राजनांदगांव। पर्यावरण संरक्षण और मानव जीवन व मवेशियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाना बेहद जरूरी हो गया है। झिल्ली-पन्नी न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि नालियों में फंसकर जलभराव और गंदगी का सबसे बड़ा कारण बन रही है। वर्तमान में नगर निगम द्वारा वर्षा पूर्व बड़े नाले-नालियों की सफाई कराई जा रही है, जिसमें सबसे ज्यादा प्लास्टिक कचरा ही निकल रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए निगम प्रशासन ने अब सख्ती के साथ-साथ जन-जागरूकता अभियान तेज कर दिया है।

इसी कड़ी में नगर निगम की टीम ने प्रतिबंधित प्लास्टिक का विक्रय और उपयोग करने वाले दुकानदारों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा के निर्देश पर आज स्वास्थ्य अमले ने नंदई चौक और निगम कार्यालय के सामने विशेष अभियान चलाया। इस दौरान 16 ठेला-खोमचा, दुकानों और होटलों की जांच की गई, जहां प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग पाया गया। टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए 1 हजार 8 सौ रुपये का जुर्माना वसूला और करीब 2 किलो सिंगल यूज प्लास्टिक जब्त की।

बिना जन-सहयोग के रोक संभव नहीं
निगम प्रशासन का कहना है कि स्वास्थ्य अमला समय-समय पर दुकानदारों को समझाइश देने के साथ चालानी कार्रवाई भी कर रहा है, लेकिन बिना आम नागरिकों के सहयोग के सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह रोक लगाना संभव नहीं है। निगम सफाई व्यवस्था और जलभराव रोकने के लिए नालों की सफाई तो कर रहा है, परंतु जब तक लोग खुद जागरूक नहीं होंगे, तब तक पर्यावरण संरक्षण की यह पहल कारगर साबित नहीं होगी।

दुकानदार और नागरिक दोनों बनें सहभागी : आयुक्त
नगर निगम आयुक्त श्री अतुल विश्वकर्मा ने सभी व्यापारियों से अपील की है कि वे अपने प्रतिष्ठानों में नियमित साफ-सफाई रखें और प्रतिबंधित प्लास्टिक का क्रय-विक्रय व उपयोग कतई न करें। इसके साथ ही उन्होंने नागरिकों से भी आह्वान किया है कि वे स्वच्छता को अपनी आदत बनाएं। जब भी घर से बाहर निकलें, अपने साथ कपड़े का थैला जरूर रखें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित कर पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं।

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जनदर्शन की शिकायत पर एक्शन : पटेवा में शासकीय जमीन से हटाया अतिक्रमण, किसान के खेत तक पहुंच का रास्ता खुला

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राजनांदगांव। कलेक्टर जितेन्द्र यादव के निर्देश पर घुमका तहसील के ग्राम पटेवा में शासकीय भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की गई। जनदर्शन में शिकायत मिलने के बाद राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की, जिससे आवेदक के खेत तक आवागमन का मार्ग सुगम हो गया।

जानकारी के अनुसार ग्राम पटेवा निवासी ऐमन कुमार ने कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन देकर बताया था कि शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे के कारण उनके खेत तक पहुंचने और कृषि कार्य करने में परेशानी हो रही है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।

इसके बाद एसडीएम गौतम कुमार पाटिल के नेतृत्व में तहसीलदार मुकेश ठाकुर, राजस्व निरीक्षक, हल्का पटवारी और पुलिस बल की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। टीम ने अतिक्रमणकर्ता जगदीश साहू द्वारा शासकीय भूमि पर किए गए अवैध कब्जे को हटाया।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने कहा कि जनदर्शन में प्राप्त शिकायतों का त्वरित निराकरण किया जाएगा और शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

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बोरतलाव हादसे की जांच तेज : अधिकारियों ने घटनास्थल का किया संयुक्त निरीक्षण, उत्खनन क्षेत्र का कराया सीमांकन

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राजनांदगांव। ग्राम बोरतलाव में तीन बच्चों की डूबने से हुई मौत के मामले में प्रशासनिक जांच तेज कर दी गई है। कलेक्टर जितेन्द्र यादव के निर्देश पर बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की।

निरीक्षण दल में अपर कलेक्टर सीएल मार्कण्डेय, डिप्टी कलेक्टर श्रीकांत कोराम, एसडीएम विश्वास कुमार, डिप्टी कलेक्टर एवं तहसीलदार अमीय श्रीवास्तव, थाना प्रभारी अवनीश श्रीवास, खनिज निरीक्षक भरत बंजारे तथा विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्रीनिवास मिश्रा शामिल रहे। अधिकारियों ने ग्राम पंचायत के सरपंच, मृतक बच्चों के परिजनों और ग्रामीणों की मौजूदगी में घटनास्थल का जायजा लिया।

जलभराव, सुरक्षा व्यवस्था और उत्खनन की जांच
अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान उत्खनन स्थल, जलभराव की स्थिति, सुरक्षा इंतजाम और अन्य परिस्थितियों का बारीकी से परीक्षण किया। साथ ही ठेकेदार द्वारा किए गए उत्खनन क्षेत्र का सीमांकन कर आवश्यक तथ्य और साक्ष्य एकत्र किए गए।

रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई
प्रशासन ने बताया कि संबंधित विभागों से आवश्यक प्रतिवेदन और अभिलेख मंगाए जा रहे हैं। सभी तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर विस्तृत जांच प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा। जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुसार आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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फसल परिवर्तन योजना से बदली गांतापार के किसान की तकदीर : पानी की किल्लत के बीच राकेश ने अपनाई अरहर की खेती

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राजनांदगांव। पानी की कमी से जूझ रहे किसानों के लिए राज्य सरकार की ‘फसल परिवर्तन योजना’ वरदान साबित हो रही है। राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम गांतापार के किसान राकेश कुमार यादव ने इस योजना का लाभ उठाते हुए पारंपरिक धान की खेती छोड़ अरहर (रहर) की खेती अपनाई है। कम पानी में बेहतर फसल की उम्मीद और शासन से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि ने उनकी राह आसान कर दी है।

किसान राकेश यादव के पास कुल 5 एकड़ कृषि भूमि है। उन्होंने बताया कि उनकी अधिकांश जमीन असिंचित होने के कारण धान की खेती में पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता था, जिससे हर साल अच्छी उपज नहीं मिलती थी। इस समस्या से निजात पाने के लिए उन्होंने इस वर्ष 3 एकड़ भूमि में अरहर और केवल 2 एकड़ में धान की फसल लगाई है।

15 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि से मिला प्रोत्साहन
किसान राकेश यादव ने बताया कि शासन द्वारा फसल परिवर्तन (क्रॉप डायवर्सिफिकेशन) अपनाने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 15,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इस आर्थिक मदद से किसानों को नई और वैकल्पिक फसलें अपनाने की प्रेरणा मिल रही है।

उन्होंने कहा, “पानी की कमी को देखते हुए धान के बजाय अरहर की खेती करना बेहद उपयुक्त है। यह योजना हम जैसे असिंचित क्षेत्र के किसानों के लिए एक बहुत अच्छी और दूरगामी पहल है।”

दूसरे किसानों से भी की वैकल्पिक खेती की अपील
कम लागत और कम पानी में बेहतर आय की उम्मीद जताते हुए राकेश कुमार यादव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने अन्य किसानों से भी अपील की है कि वे अपनी भूमि की स्थिति और पानी की उपलब्धता के अनुसार धान के मोह से बाहर निकलकर अरहर जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती करें और शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

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